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नींव बनने से पहले शुरू होगा रिटेनिंग वॉल का निर्माण
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अयोध्या। राममंदिर की नींव की नई डिजाइन को लेकर जहां देशभर के तकनीकी विशेषज्ञ मंथन करने में जुटे हैं। वहीं नींव का काम शुरू करने से पहले रिटेनिंग वॉल का निर्माण एक दो दिन में प्रारंभ होने वाला है। जब तक नींव की डिजाइन फाइनल हो रही है इस बीच समय का सदुपयोग करते हुए ट्रस्ट ने रिटेनिंग वॉल निर्माण शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
दूसरी तरफ राममंदिर की नींव का काम शुरू होने में अभी नक्शे में पेच फंसा हुआ है और काम शुरू होने में देरी हो रही है। इसके लिए इसी हफ्ते दिल्ली में एक बैठक भी हुई थी लेकिन अभी भी नींव को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। इसको देखते हुए काफी मजदूरों को छुट्टी दे दी गई है।
उतने ही मजदूर रामजन्मभूमि परिसर में हैं जितने रिटेनिंग वॉल के निर्माण कार्य में लगेंगेे। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया गया एक-दो दिन के भीतर रिटेनिंग वॉल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। मंदिर के तीन तरफ रिटेनिंग वॉल बनाई जाएगी ताकि भूकंप व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से मंदिर को सुरक्षित रखा जा सके।
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एफसीआरए होने के बाद ही खुलेंगे विदेशी फंडिंग के रास्ते
अयोध्या। ट्रस्ट ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) के लिए आवेदन किया गया है। इसकी मंजूरी मिलने के बाद ही विदेशी फंडिंग के रास्ते खुल सकेंगे और विदेशी रामभक्त दान दे पाएंगे। ट्रस्ट कार्यालय में आए दिन विदेशी रामभक्तों के फोन आ रहे हैं। लेकिन एफसीआरए न होने से विदेशी फंडिंग नहीं हो पा रही है। यह अनुमति मिलते ही लाखों की तादाद में विदेशों में रह रहे भारतीय भी राममंदिर के लिए चंदा दे सकेंगे।
अयोध्या में भूमिपूजन के बाद से मंदिर निर्माण के लिए दान देने का सिलसिला तेज है। अभी लोग चेक, मनीऑर्डर, ऑनलाइन ट्रांसफर, नकदी समेत आभूषण, चांदी की ईंटें आदि के जरिये चंदा भेज रहे हैं। ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार राममंदिर के लिए एक अरब से ज्यादा का चंदा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अकाउंट में जमा हो चुका है। सबसे ज्यादा चंदा ट्रस्ट के एसबीआई खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर से आया है। राममंदिर ट्रस्ट के कार्यालय में भी हर दिन करीब 20 से 30 हजार की नगदी आ रही है। ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि मुश्किल ये है कि जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को विदेश में रहने वाले एनआरआई व विदेशी भक्तों की ओर से चंदा देने के लिए खूब फोन आ रहे हैं, लेकिन ट्रस्ट अभी विदेशी चंदा लेने के लिए अधिकृत नहीं है।
यह है एफसीआरए
भारत में जब कोई व्यक्ति या संस्था, एनजीओ किसी विदेशी स्रोत से चंदा लेती है तो उसे फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) यानी विदेशी सहयोग विनियमन अधिनियम के नियमों का पालन करना होता है पहले एफसीआरए, 1976 को लागू किया गया था, लेकिन साल 2010 में नया फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट 2010 आ गया जिसे 1 मई 2011 से लागू किया गया है।
एनआरआई कर सकते हैं राममंदिर के लिए दान
प्रवासी भारतीयों (एनआआई) के सहयोग या चंदे को विदेशी चंदा या सहयोग नहीं माना जाता और इस तरह का दान एफसीआरए के तहत नहीं आता, लेकिन यह सहयोग एनआरआई के अपने निजी बचत से होना चाहिए। इसीलिए राम मंदिर ट्रस्ट एनआरआई चंदा हासिल करने के लिए पंजाब नेशनल बैंक में एक अकाउंट खोलने जा रहा है। ऐसे लोग एनआरआई कहलाते हैं जो रहते तो किसी और देश में हैं, लेकिन उनके पास इंडियन पासपोर्ट होता है यानी वे भारतीय नागरिक होते हैं।
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दूसरी तरफ राममंदिर की नींव का काम शुरू होने में अभी नक्शे में पेच फंसा हुआ है और काम शुरू होने में देरी हो रही है। इसके लिए इसी हफ्ते दिल्ली में एक बैठक भी हुई थी लेकिन अभी भी नींव को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। इसको देखते हुए काफी मजदूरों को छुट्टी दे दी गई है।
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उतने ही मजदूर रामजन्मभूमि परिसर में हैं जितने रिटेनिंग वॉल के निर्माण कार्य में लगेंगेे। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया गया एक-दो दिन के भीतर रिटेनिंग वॉल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। मंदिर के तीन तरफ रिटेनिंग वॉल बनाई जाएगी ताकि भूकंप व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से मंदिर को सुरक्षित रखा जा सके।
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एफसीआरए होने के बाद ही खुलेंगे विदेशी फंडिंग के रास्ते
अयोध्या। ट्रस्ट ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) के लिए आवेदन किया गया है। इसकी मंजूरी मिलने के बाद ही विदेशी फंडिंग के रास्ते खुल सकेंगे और विदेशी रामभक्त दान दे पाएंगे। ट्रस्ट कार्यालय में आए दिन विदेशी रामभक्तों के फोन आ रहे हैं। लेकिन एफसीआरए न होने से विदेशी फंडिंग नहीं हो पा रही है। यह अनुमति मिलते ही लाखों की तादाद में विदेशों में रह रहे भारतीय भी राममंदिर के लिए चंदा दे सकेंगे।
अयोध्या में भूमिपूजन के बाद से मंदिर निर्माण के लिए दान देने का सिलसिला तेज है। अभी लोग चेक, मनीऑर्डर, ऑनलाइन ट्रांसफर, नकदी समेत आभूषण, चांदी की ईंटें आदि के जरिये चंदा भेज रहे हैं। ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार राममंदिर के लिए एक अरब से ज्यादा का चंदा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अकाउंट में जमा हो चुका है। सबसे ज्यादा चंदा ट्रस्ट के एसबीआई खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर से आया है। राममंदिर ट्रस्ट के कार्यालय में भी हर दिन करीब 20 से 30 हजार की नगदी आ रही है। ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि मुश्किल ये है कि जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को विदेश में रहने वाले एनआरआई व विदेशी भक्तों की ओर से चंदा देने के लिए खूब फोन आ रहे हैं, लेकिन ट्रस्ट अभी विदेशी चंदा लेने के लिए अधिकृत नहीं है।
यह है एफसीआरए
भारत में जब कोई व्यक्ति या संस्था, एनजीओ किसी विदेशी स्रोत से चंदा लेती है तो उसे फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) यानी विदेशी सहयोग विनियमन अधिनियम के नियमों का पालन करना होता है पहले एफसीआरए, 1976 को लागू किया गया था, लेकिन साल 2010 में नया फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट 2010 आ गया जिसे 1 मई 2011 से लागू किया गया है।
एनआरआई कर सकते हैं राममंदिर के लिए दान
प्रवासी भारतीयों (एनआआई) के सहयोग या चंदे को विदेशी चंदा या सहयोग नहीं माना जाता और इस तरह का दान एफसीआरए के तहत नहीं आता, लेकिन यह सहयोग एनआरआई के अपने निजी बचत से होना चाहिए। इसीलिए राम मंदिर ट्रस्ट एनआरआई चंदा हासिल करने के लिए पंजाब नेशनल बैंक में एक अकाउंट खोलने जा रहा है। ऐसे लोग एनआरआई कहलाते हैं जो रहते तो किसी और देश में हैं, लेकिन उनके पास इंडियन पासपोर्ट होता है यानी वे भारतीय नागरिक होते हैं।