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नए पोलिंग बूथ बनाने की जिम्मेदारी ने बढ़ाई मुश्किल
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अयोध्या। कोरोना को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की तैयारी पंचायत चुनाव में मुश्किलें बढ़ा रही है। नए पोलिंग बूथ बनाने को लेकर तैयारी तेज हो गई है। एक मतदेय स्थल पर आठ सौ से ज्यादा मतदाता नहीं होंगे। ऐसे में सूची के पुनरीक्षण के बाद एक बार फिर बूथों पर मतदाताओं की संख्या को लेकर सर्वे की जरूरत होगी, ताकि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव आसानी से कराए जा सकें।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चार पदों के लिए एक साथ मतदान कराए जाने की संभावना है। इसके मद्देनजर मतदान केंद्रों पर भीड़ न हो और समय व आसानी से मतदान संपन्न हो सके। इसके साथ ही इन दिनों कोरोना का दौर है। भीड़ से संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसलिए मतदान के दौरान एक जगह पर भीड़ न रहने देने की कोशिश है। इसके लिए मतदेय स्थलों पर मतदाताओं की संख्या कम रखने की रणनीति है। इसी के तहत एक बूथ पर 12 सौ के स्थान पर अब आठ सौ से ज्यादा मतदाता नहीं रखे जाएंगे। साथ ही एक मतदान केंद्र पर छ से ज्यादा मतदान स्थल नहीं बनाए जा सकते हैं। इसके चलते जिम्मेदारों की मुश्किल जरूर बढ़ गई है। पुनरीक्षण में मतदाताओं की संख्या खासी बढ़ने की संभावना है।
इसी रणनीति के तहत राज्य निर्वाचन आयोग ने पिछले जनवरी फरवरी में एक बार मतदान केंद्र और मतदेय स्थलों की संख्या का रिवीजन किया गया था। जिले में कुल 804 ग्राम पंचायतें हैं। नए सिरे से मतदान केंद्र और मतदेय स्थलों को बनाने की प्रक्रिया में कुल 898 मतदान केंद्र और 2690 मतदेय स्थल बनाए गए थे। हालांकि, उस समय प्रशासन ने पुनरीक्षण में मतदाताओं की संख्या को बूथों पर सात से सवा सात सौ रखने की रणनीति अपनाई थी जिससे पुनरीक्षण के बाद मतदाता बढ़े तो भी यह आठ सौ से ज्यादा न हो लेकिन, पुनरीक्षण में मतदाताओं की संख्या खासी बढ़ने की संभावना है ऐसे में मतदान केंद्र और मतदेय स्थल दोनों में वृद्धि हो सकती है।
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इसके लिए नए सिरे से मतदान केंद्र और मतदेय स्थल की समीक्षा अवश्य की जाएगी। यह कार्रवाई पुनरीक्षण के बाद होगा। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी सूर्य भान का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चल रहा है। इसको अंतिम रूप देने और प्रकाशन के बाद मतदान केंद्र और मतदेय स्थलों के नए सिरे से निर्धारण की कार्रवाई की जाएगी।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चार पदों के लिए एक साथ मतदान कराए जाने की संभावना है। इसके मद्देनजर मतदान केंद्रों पर भीड़ न हो और समय व आसानी से मतदान संपन्न हो सके। इसके साथ ही इन दिनों कोरोना का दौर है। भीड़ से संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसलिए मतदान के दौरान एक जगह पर भीड़ न रहने देने की कोशिश है। इसके लिए मतदेय स्थलों पर मतदाताओं की संख्या कम रखने की रणनीति है। इसी के तहत एक बूथ पर 12 सौ के स्थान पर अब आठ सौ से ज्यादा मतदाता नहीं रखे जाएंगे। साथ ही एक मतदान केंद्र पर छ से ज्यादा मतदान स्थल नहीं बनाए जा सकते हैं। इसके चलते जिम्मेदारों की मुश्किल जरूर बढ़ गई है। पुनरीक्षण में मतदाताओं की संख्या खासी बढ़ने की संभावना है।
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इसी रणनीति के तहत राज्य निर्वाचन आयोग ने पिछले जनवरी फरवरी में एक बार मतदान केंद्र और मतदेय स्थलों की संख्या का रिवीजन किया गया था। जिले में कुल 804 ग्राम पंचायतें हैं। नए सिरे से मतदान केंद्र और मतदेय स्थलों को बनाने की प्रक्रिया में कुल 898 मतदान केंद्र और 2690 मतदेय स्थल बनाए गए थे। हालांकि, उस समय प्रशासन ने पुनरीक्षण में मतदाताओं की संख्या को बूथों पर सात से सवा सात सौ रखने की रणनीति अपनाई थी जिससे पुनरीक्षण के बाद मतदाता बढ़े तो भी यह आठ सौ से ज्यादा न हो लेकिन, पुनरीक्षण में मतदाताओं की संख्या खासी बढ़ने की संभावना है ऐसे में मतदान केंद्र और मतदेय स्थल दोनों में वृद्धि हो सकती है।
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इसके लिए नए सिरे से मतदान केंद्र और मतदेय स्थल की समीक्षा अवश्य की जाएगी। यह कार्रवाई पुनरीक्षण के बाद होगा। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी सूर्य भान का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चल रहा है। इसको अंतिम रूप देने और प्रकाशन के बाद मतदान केंद्र और मतदेय स्थलों के नए सिरे से निर्धारण की कार्रवाई की जाएगी।