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पोस्ट कोविड व अस्थमा रोगियों के लिए घातक हो सकती है आतिशबाजी
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अयोध्या। दीपावली पर्व के उत्सव में जरा सी लापरवाही बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। कोरोना के कहर से बचने के बाद अब अस्थमा रोगियों के लिए दीपों के इस पर्व पर फूटने वाले पटाखे और घातक साबित हो सकते हैं। पटाखों से हवा में घुलने वाले बारुद की गंध समस्या को दोगुना कर सकती है। ऊपर से इससे जलने पर त्वचा को भी काफी खतरा हो सकता है और भविष्य में सफेद दाग की समस्या तक हो सकती है। इसके अलावा ये पटाखें आखों और शरीर के अन्य अंगों को भी जख्मी कर सकते हैं।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रामकिशोर कहते हैं कि इन दिनों बदलता हुआ मौसम अस्थमा रोगियों के लिए वैसे भी घातक माना जाता है। कोरोना संक्रमण काल में भी इन रोगियों की जान हथेली पर ही थी। ऊपर से आतिशबाजी समस्या को और जटिल बना सकती है। उन्होंने कोरोना को मात दे चु के लोगों को और सचेत रहने की सलाह दी है।
डॉक्टर रामकिशोर ने बताया कि आतिशबाजी के बाद वातावरण में कार्बन मोनो आक्साइड एवं कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा काफी बढ़ जाती है, जिससे अस्थमा रोगियों को सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होती है। पोस्ट कोविड मरीजों को स्वस्थ होने के बाद भी सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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इसलिए पोस्ट कोविड मरीज व अस्थमा रोगियों को पटाखे फोड़े जाने वाले स्थानों से दूर रहना चाहिए। यदि जाना जरूरी हो तो मुंह पर मास्क लगा कर जाएं। खूब पानी पिएं, पूजा के समय अगरबत्ती का प्रयोग न करें, घी या तेल का दीपक जलाएं। धूम्रपान न करें, न ही धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में रहें।
जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ आरबी वर्मा कहते हैं कि कोई भी पटाखा या फुलझड़ी हाथ में पकड़कर न जलाएं। कभी-कभी अचानक जलाते समय फटने पर त्वचा में घाव हो जाता है, जो आगे चलकर सफेद दाग का रूप भी ले सकता है।
जिन्हें बारूद के धुएं से एलर्जी है, उनके शरीर में लाल रंग का चकत्ता भी निकलता है। बताया कि आतिशबाजी से पूर्व पूरी बांह तक सूती वस्त्र पहनें, सिर पर टोपी व आंख पर चश्मा लगाएं। त्वचा जलने पर ठंडे पानी से धुलें, बर्फ का टुकड़ा रखें। तत्पश्चात एंटी बायोटिक एवं एंटी सेप्टिक क्रीम लगाने के उपरांत चिकित्सक से संपर्क करें।
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जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रामकिशोर कहते हैं कि इन दिनों बदलता हुआ मौसम अस्थमा रोगियों के लिए वैसे भी घातक माना जाता है। कोरोना संक्रमण काल में भी इन रोगियों की जान हथेली पर ही थी। ऊपर से आतिशबाजी समस्या को और जटिल बना सकती है। उन्होंने कोरोना को मात दे चु के लोगों को और सचेत रहने की सलाह दी है।
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डॉक्टर रामकिशोर ने बताया कि आतिशबाजी के बाद वातावरण में कार्बन मोनो आक्साइड एवं कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा काफी बढ़ जाती है, जिससे अस्थमा रोगियों को सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होती है। पोस्ट कोविड मरीजों को स्वस्थ होने के बाद भी सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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इसलिए पोस्ट कोविड मरीज व अस्थमा रोगियों को पटाखे फोड़े जाने वाले स्थानों से दूर रहना चाहिए। यदि जाना जरूरी हो तो मुंह पर मास्क लगा कर जाएं। खूब पानी पिएं, पूजा के समय अगरबत्ती का प्रयोग न करें, घी या तेल का दीपक जलाएं। धूम्रपान न करें, न ही धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में रहें।
जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ आरबी वर्मा कहते हैं कि कोई भी पटाखा या फुलझड़ी हाथ में पकड़कर न जलाएं। कभी-कभी अचानक जलाते समय फटने पर त्वचा में घाव हो जाता है, जो आगे चलकर सफेद दाग का रूप भी ले सकता है।
जिन्हें बारूद के धुएं से एलर्जी है, उनके शरीर में लाल रंग का चकत्ता भी निकलता है। बताया कि आतिशबाजी से पूर्व पूरी बांह तक सूती वस्त्र पहनें, सिर पर टोपी व आंख पर चश्मा लगाएं। त्वचा जलने पर ठंडे पानी से धुलें, बर्फ का टुकड़ा रखें। तत्पश्चात एंटी बायोटिक एवं एंटी सेप्टिक क्रीम लगाने के उपरांत चिकित्सक से संपर्क करें।