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एक लाख आबादी वाले रुदौली नगर में सरकारी अस्पताल नहीं
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भेलसर। कहने को तो जनता को स्वास्थ्य सुविधा केंद्र और प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। पर इसे रुदौली नगरवासियों का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि शहरी दर्जा मिलने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाएं नदारद हैं। अगर कोई बीमार हो जाए तो इलाज को तीन किलोमीटर दूर खैरनपुर गांव पहुंचना होगा, तभी उसे सरकारी स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।
पच्चीस हजार की जनसंख्या वाले क्षेत्र में पीएचसी तथा 25 से 60 हजार की आबादी वाले क्षेत्र में सीएचसी और एक लाख से ऊपर वाले क्षेत्र में सिविल अस्पताल का दर्जा दिया जाता है मगर आश्चर्य की बात है कि रुदौली नगर पालिका की आबादी करीब एक लाख होने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधा के मामले में गांव से भी बदतर है।
हालत ये है कि पालिका क्षेत्र में एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है। मरीजों को उपचार के लिए झोलाछाप की शरण में जाना पड़ता है। सरकारी सुविधा के लिए सीएचसी खैरनपुर गांव जाना पड़ता है। तीन दशक पूर्व नगर के मोहल्ला कटरा में प्राथमिक स्वास्थ्य संचालित हो रहा था, लेकिन अस्पताल जर्जर होने के बाद उसे बंद कर दिया गया। जबकि बंद पड़े अस्पताल की भूमि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण बड़ी आसानी से हो सकता था, जिस पर जनप्रतिनिधियों ने ध्यान ही नहीं दिया।
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मरीजों को उपचार के लिए उस समय सबसे बड़ी परेशानी होती है, जब रात में कोई चिकित्सक भी नहीं मिलता है। जिन्हें उपचार के लिए रात में तीन किलोमीटर दूर सीएचसी खैरनपुर गांव जाने के लिए रात में कोई साधन भी नहीं मिलता है। भगवान भरोसे ही रात काटनी पड़ती है। यहां की जनता स्वास्थ्य सुविधा की पीड़ा से जूझ रहे हैं पर जिम्मेदार मौन साधे बैठे हैं।
...जनता का दर्द :
नगर के निवासी सतींद्र प्रकाश शास्त्री कहते हैं कि विडंबना यह है कि इतनी बड़ी आबादी के क्षेत्र में सरकारी सुविधा तो नदारद है। कोई स्वयं सेवी अथवा जनप्रतिनिधि भी आगे नहीं आया, जो कुछ कर सके। नगर के ही निवासी प्रेम प्रकाश गुप्त बताते हैं कि सरकारी दावे भले ही बड़े-बड़े किए जा रहे हो। लेकिन, हकीकत यह है कि रुदौली में अभी भी समुचित स्वास्थ्य सुविधा नदारद है।
नगर के ही अहमद सलीम कहते हैं कि सरकारी व्यवस्था स्वयं बीमार है। अगर सरकारी सुविधाओं पर नजर डालें तो एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी नहीं है। जबकि शासन प्रशासन को यहां वृहद रुप से स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना चाहिए। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को हो रही है। नगर के ही अजय कुमार गुप्ता कहते हैं कि नगर में स्थित प्राइवेट अस्पताल में रात्रि सेवा की कोई गारंटी नहीं है। चिकित्सक अपने घर चले जाते हैं। रात्रि को स्वास्थ्य खराब हो जाने पर अस्पताल आते हैं तो डॉक्टर या स्टाफ मिलने की कोई गारंटी नहीं है।
नगर के जर्जर अस्पताल को महिला अस्पताल बनाने के लिए विधायक रामचंद्र यादव ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर बंद पड़े जर्जर प्राथमिक स्वास्थ्य के स्थान पर महिला अस्पताल बनेगा, क्योंकि सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को होती है। जनता की मांग पर सीएचसी से एक चिकित्सक को प्रतिदिन भेजा जाता है। जिससे नगर के मरीजों को स्वास्थ्य केंद सुविधा मिल सके।
- पीके गुप्ता, अधीक्षक, सीएचसी खैरनपुर रुदौली
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पच्चीस हजार की जनसंख्या वाले क्षेत्र में पीएचसी तथा 25 से 60 हजार की आबादी वाले क्षेत्र में सीएचसी और एक लाख से ऊपर वाले क्षेत्र में सिविल अस्पताल का दर्जा दिया जाता है मगर आश्चर्य की बात है कि रुदौली नगर पालिका की आबादी करीब एक लाख होने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधा के मामले में गांव से भी बदतर है।
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हालत ये है कि पालिका क्षेत्र में एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है। मरीजों को उपचार के लिए झोलाछाप की शरण में जाना पड़ता है। सरकारी सुविधा के लिए सीएचसी खैरनपुर गांव जाना पड़ता है। तीन दशक पूर्व नगर के मोहल्ला कटरा में प्राथमिक स्वास्थ्य संचालित हो रहा था, लेकिन अस्पताल जर्जर होने के बाद उसे बंद कर दिया गया। जबकि बंद पड़े अस्पताल की भूमि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण बड़ी आसानी से हो सकता था, जिस पर जनप्रतिनिधियों ने ध्यान ही नहीं दिया।
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मरीजों को उपचार के लिए उस समय सबसे बड़ी परेशानी होती है, जब रात में कोई चिकित्सक भी नहीं मिलता है। जिन्हें उपचार के लिए रात में तीन किलोमीटर दूर सीएचसी खैरनपुर गांव जाने के लिए रात में कोई साधन भी नहीं मिलता है। भगवान भरोसे ही रात काटनी पड़ती है। यहां की जनता स्वास्थ्य सुविधा की पीड़ा से जूझ रहे हैं पर जिम्मेदार मौन साधे बैठे हैं।
...जनता का दर्द :
नगर के निवासी सतींद्र प्रकाश शास्त्री कहते हैं कि विडंबना यह है कि इतनी बड़ी आबादी के क्षेत्र में सरकारी सुविधा तो नदारद है। कोई स्वयं सेवी अथवा जनप्रतिनिधि भी आगे नहीं आया, जो कुछ कर सके। नगर के ही निवासी प्रेम प्रकाश गुप्त बताते हैं कि सरकारी दावे भले ही बड़े-बड़े किए जा रहे हो। लेकिन, हकीकत यह है कि रुदौली में अभी भी समुचित स्वास्थ्य सुविधा नदारद है।
नगर के ही अहमद सलीम कहते हैं कि सरकारी व्यवस्था स्वयं बीमार है। अगर सरकारी सुविधाओं पर नजर डालें तो एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी नहीं है। जबकि शासन प्रशासन को यहां वृहद रुप से स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना चाहिए। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को हो रही है। नगर के ही अजय कुमार गुप्ता कहते हैं कि नगर में स्थित प्राइवेट अस्पताल में रात्रि सेवा की कोई गारंटी नहीं है। चिकित्सक अपने घर चले जाते हैं। रात्रि को स्वास्थ्य खराब हो जाने पर अस्पताल आते हैं तो डॉक्टर या स्टाफ मिलने की कोई गारंटी नहीं है।
नगर के जर्जर अस्पताल को महिला अस्पताल बनाने के लिए विधायक रामचंद्र यादव ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर बंद पड़े जर्जर प्राथमिक स्वास्थ्य के स्थान पर महिला अस्पताल बनेगा, क्योंकि सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को होती है। जनता की मांग पर सीएचसी से एक चिकित्सक को प्रतिदिन भेजा जाता है। जिससे नगर के मरीजों को स्वास्थ्य केंद सुविधा मिल सके।
- पीके गुप्ता, अधीक्षक, सीएचसी खैरनपुर रुदौली