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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Are indebted Master, princes also raised hand

कर्जदार हो रहे गुरुजी, प्रधानों ने भी खड़े किए हाथ

Sun, 02 Aug 2015 10:56 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 02 Aug 2015 10:56 PM IST
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इसके जवाब में प्रधानाध्यापक समेत प्रधानों में भी गुस्सा बढ़ रहा है। अपने को कर्जदार होने की दुहाई देकर हाथ खड़े किए जा रहे हैं। कई प्रधानों ने बीएसए पत्र लिखकर कहा है कि वे अब दूध का इंतजाम नहीं कर सकते।
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ऐसे में हर बच्चे को दो सौ एमएल दूध देने का फरमान दम तोड़ता दिख रहा है। जिले में कक्षा एक से आठ तक कुल दो लाख 33 हजार 780 बच्चे हैं। जिन्हें हर बुधवार को मिड-डे-मील में दूध पिलाने के लिए प्रति छात्र 200 एमएल के हिसाब से 46 हजार 756 लीटर दूध की जरूरत है।
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इसको लेकर अभी तक शासन से बजट का आवंटन नहीं हुआ है। शुरूआत में अफसरों ने प्रधानाध्यापक व प्रधानों को जल्द बजट उपलब्ध कराने का वादा कर जुलाई में जैसे-तैसे पांच बुधवार में कहीं दो तो कहीं एक बुधवार को बच्चों को दूध दिलवा दिया।
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गांव के ग्वालों को भी लगा कि अब बाजार की दौड़ लगाए बगैर गांव में ही दूध की खपत हो जाएगी। वह भी उधारी पर दूध देते गए। लेकिन अब पशुओं को चारा आदि के लिए धन की मांग शुरू हुई तो प्रधान व प्रधानाध्यापकों की हालत पस्त हो रही है। कर्जदार होकर भागते फिर रहे हैं।

सोहावल के अरथर गांव के प्रधान राजकिशोर यादव ने बीएसए को पत्र लिखा है कि दूध का धन नहीं मिलने के कारण बच्चों को दूध नहीं पिला सकते। उनके आदेश का पालन करके कर्जदार बन गए हैं।

यहीं हाल सोहावल के ही मगलसी के प्रधान रामचेत यादव, मजनावां के प्रधान ओमप्रकाश यादव, पिरखौली के प्रधान रामसूरतयादव ने भी बयां किया है। ऐसे कई पत्र बीएसए को मिल रहे हैं, जिसमें दूध न पिलाने की व्यथा है।

साथ ही चेतावनी भी है कि बुधवार 5 जुलाई से पहले भुगतान का इंतजाम करें, वरना दूध पिलाना बंद रहेगा। बीएसए प्रदीप कुमार द्विवेदी ने बताया कि सभी बेसिक स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि बुधवार 5 जुलाई के शतप्रतिशत दूध पिलाना सुनिश्चित करें।

वरना लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई होगी। कनर्वजन कास्ट से दूध खरीदने का कोई आदेश नहीं है। यह मिड-डे मील बनाने का खर्च है। दूध के लिए प्रति छात्र 200 एमएल खपत के हिसाब से प्रस्ताव भेजा गया है।


शासन से मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन दूध वितरण हर हाल में जारी रखने के कड़े निर्देश हैं। इसी वजह से जिलाधिकारी ने भी लेखपाल से लेकर ब्लॉक व स्वास्थ्य समेत तमाम अधिकारियों के पर्यवेक्षण कर रिपोर्ट देने का निर्देश दे रखा है।

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