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एक जीवन रक्षक के सहारे 200 तैराक
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Sun, 21 Jun 2015 01:11 AM IST
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पर खेल विभाग के पास प्रदेश में तैराक तैयार करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षक नहीं है। जिले में करोड़ों की लागत से 20 साल पहले स्पोर्ट्स स्टेडियम में तरणताल का निर्माण हुआ था।
निर्माण के बाद जिले के तैराकों को खेल विभाग एक अदद प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं करा पाया है। खेल विभाग का खेल प्रेम ही तो है कि फैजाबाद में अंतर्राष्ट्रीय क्रीड़ा संकुल के नाम पर 79 करोड़ की योजना तो शुरू कराई गई लेकिन खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षक की स्थाई तैनाती की विभाग के आला हुक्मरानों को सुध नहीं आई।
स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक दर्जन से अधिक खेलों के प्रशिक्षण की योजना के तहत करोड़ों की लागत से तरण जाल और बहुउद्धेशीय हाल का निर्माण हुआ पर बैडमिंटन को छोड़कर किसी अन्य खेल को स्थाई प्रशिक्षक नहीं मिल पाया।
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तरणताल के निर्माण के बाद से जिले में तैराकी प्रशिक्षक नियुक्त नहीं हुआ है। यह अलग बात है कि नन्हें तैराकों को तैराकी के प्रशिक्षण के नाम खेल विभाग बकायदा शुल्क प्राप्त करता आ रहा है।
खेल विभाग में राजकुमार यादव जीवन रक्षक पद पर तैनात है लेकिन जीवन रक्षक के साथ-साथ तरणताल में अभिभावकों के अनुरोध पर वह प्रशिक्षण देते नजर आ जाते है। कई अभिभावकों को मलाल है कि उनके बच्चों को प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है लेकिन खेल विभाग जिले से बेहतर तैराक तैयार होने का दावा कर रहा है।
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी अभय सिंह ने कहा कि जिले में तैराकी प्रशिक्षक नियुक्त नहीं है। विभागीय निर्देश के क्रम में तैराकों से प्रशिक्षण शुल्क प्राप्त किया जा रहा है।
तैराकों को प्रशिक्षित करने के लिए हम अपने जीवन रक्षक से सहयोग प्राप्त कर रहे है। जिला क्रीड़ा समिति के संयुक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों से प्रशिक्षण शुल्क प्राप्त कर प्रशिक्षण सुनिश्चित न कराना ठगी है। इसके लिए उच्चस्तर पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
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निर्माण के बाद जिले के तैराकों को खेल विभाग एक अदद प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं करा पाया है। खेल विभाग का खेल प्रेम ही तो है कि फैजाबाद में अंतर्राष्ट्रीय क्रीड़ा संकुल के नाम पर 79 करोड़ की योजना तो शुरू कराई गई लेकिन खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षक की स्थाई तैनाती की विभाग के आला हुक्मरानों को सुध नहीं आई।
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स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक दर्जन से अधिक खेलों के प्रशिक्षण की योजना के तहत करोड़ों की लागत से तरण जाल और बहुउद्धेशीय हाल का निर्माण हुआ पर बैडमिंटन को छोड़कर किसी अन्य खेल को स्थाई प्रशिक्षक नहीं मिल पाया।
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तरणताल के निर्माण के बाद से जिले में तैराकी प्रशिक्षक नियुक्त नहीं हुआ है। यह अलग बात है कि नन्हें तैराकों को तैराकी के प्रशिक्षण के नाम खेल विभाग बकायदा शुल्क प्राप्त करता आ रहा है।
खेल विभाग में राजकुमार यादव जीवन रक्षक पद पर तैनात है लेकिन जीवन रक्षक के साथ-साथ तरणताल में अभिभावकों के अनुरोध पर वह प्रशिक्षण देते नजर आ जाते है। कई अभिभावकों को मलाल है कि उनके बच्चों को प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है लेकिन खेल विभाग जिले से बेहतर तैराक तैयार होने का दावा कर रहा है।
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी अभय सिंह ने कहा कि जिले में तैराकी प्रशिक्षक नियुक्त नहीं है। विभागीय निर्देश के क्रम में तैराकों से प्रशिक्षण शुल्क प्राप्त किया जा रहा है।
तैराकों को प्रशिक्षित करने के लिए हम अपने जीवन रक्षक से सहयोग प्राप्त कर रहे है। जिला क्रीड़ा समिति के संयुक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों से प्रशिक्षण शुल्क प्राप्त कर प्रशिक्षण सुनिश्चित न कराना ठगी है। इसके लिए उच्चस्तर पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।