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ईंट रखी और हो गया टिकट काउंटर पर कब्जा
Faizabad
Updated Tue, 21 Oct 2014 05:31 AM IST
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फैजाबाद। अयोध्या, फैजाबाद, रुदौली जैसे रेलवे स्टेशन पर आजकल ईंट और गत्ते बिकते हैं। चौंकिए नहीं, इस काम के लिए यहां कोई ईंट भट्ठा या दुकान नहीं खुली है। ऐसा काम करते हैं दलाल, जो लोगों को तत्काल आरक्षित टिकट उपलब्ध कराते हैं। इनका दिमाग इतना शातिर कि साहब की नजर में आने और पहला स्थान पाने के लिए एक दिन पहले ही अलग-अलग अपने आदमी लगा देते हैं। निगाह में आने के बाद ऐसे लोग अपने स्थान पर ईंट या गत्ता रखकर चले जाते हैं। दूरदराज से टिकट लेने पहुंचा आदमी इन ईंटों और गत्तों के पीछे खड़ा होता है। इस प्रकार से पहले से खड़े रहने के चलते इन दलालों के लोगों को पहले टिकट मिलता है और दूर से आने वाला आदमी अपनी प्रतीक्षा ही करता रह जाता है।
सूत्र बताते हैं एक दिन पहले ईंट और गत्ता रखने के बाद दूसरे दिन सुबह आठ बजे से पहले इन दलालों के आदमी एक बार फिर लाइन में सबसे आगे खडे़ हो जाते हैं। इनके फॉर्म पर नंबरिंग होने के बाद हाथ में फॉर्म के साथ वोटर आईडी और नाम असली यात्री का भरा रहता है। इन ईंट-गत्तों को खरीदने वाला यात्री भी छह-सात रुपये की जगह चार सौ से लेकर एक हजार रुपये तक अतिरिक्त अदा करता है। सौदा कितने में तय कर पाएंगे, यह यात्री के ऊपर है।
रेलवे सूत्रों की मानें तो काम को घोसियाना मोहल्ले के कुछ युवक, ई-टिकटिंग से जुडे़ साइबर कैफे के कुछ मालिकान तथा स्टेशन पर समय गुजारने वाले लोग अंजाम दे रहे हैं। खिड़की खुली तो एक दो टिकट के बाद कन्फर्म टिकट समाप्त हो जाता है और वेटिंग मिलने लगती है। दलालों का इतना काकस है कि कर्मियों का काम कर पाना मुश्किल हो जाता है। कई बार तो मारपीट तक की नौबत आ जाती है। फैजाबाद में तो मारपीट और धक्के के चलते यहां की खिड़कियां कई बार टूटीं और बदलीं जा चुकी हैं।
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सूत्र बताते हैं एक दिन पहले ईंट और गत्ता रखने के बाद दूसरे दिन सुबह आठ बजे से पहले इन दलालों के आदमी एक बार फिर लाइन में सबसे आगे खडे़ हो जाते हैं। इनके फॉर्म पर नंबरिंग होने के बाद हाथ में फॉर्म के साथ वोटर आईडी और नाम असली यात्री का भरा रहता है। इन ईंट-गत्तों को खरीदने वाला यात्री भी छह-सात रुपये की जगह चार सौ से लेकर एक हजार रुपये तक अतिरिक्त अदा करता है। सौदा कितने में तय कर पाएंगे, यह यात्री के ऊपर है।
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रेलवे सूत्रों की मानें तो काम को घोसियाना मोहल्ले के कुछ युवक, ई-टिकटिंग से जुडे़ साइबर कैफे के कुछ मालिकान तथा स्टेशन पर समय गुजारने वाले लोग अंजाम दे रहे हैं। खिड़की खुली तो एक दो टिकट के बाद कन्फर्म टिकट समाप्त हो जाता है और वेटिंग मिलने लगती है। दलालों का इतना काकस है कि कर्मियों का काम कर पाना मुश्किल हो जाता है। कई बार तो मारपीट तक की नौबत आ जाती है। फैजाबाद में तो मारपीट और धक्के के चलते यहां की खिड़कियां कई बार टूटीं और बदलीं जा चुकी हैं।
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