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दो डकैतों को 10 साल का कारावास
Faizabad
Updated Sat, 21 Sep 2013 05:37 AM IST
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फैजाबाद। घटना के 28 साल बाद डकैती के मामले में दो लोगों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। प्रत्येक पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी हुआ। फैसला अपर जिला जज तृतीय की अदालत से शुक्रवार को हुआ। मामला अयोध्या कोतवाली के भारीपुर डेराबीबी मोहल्ले का है।
अपर शासकीय अधिवक्ता साहिर नईम सफवी ने बताया कि घटना 28 अगस्त 1985 की है। इसी मोहल्ले के रहने वाले धरनीधर द्विवेदी ने अदालत में अर्जी दी कि उनके मोहल्ले के रहने वाले शंभूधर द्विवेदी व विद्याधर द्विवेदी ने घटनावाले दिन उनके घर में घुसकर जबरदस्ती चावल, धनिया व कालीन उठा ले गए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया। रिपोर्ट के बाद विवेचक ने दोनों को क्लीन चिट देते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इस पर धरनीधर की कोर्ट में आपत्ति के बाद एफआर निरस्त करके दोनों को तलब किया। इस आदेश के खिलाफ आरोपियों ने निगरानी की। जिसे स्वीकृत करके कोर्ट ने मामले को बतौर परिवाद दर्ज करने का आदेश निचली अदालत को भेजा। वहां वादी और गवाहों के बयान के बाद फिर दोनों को विचारण के लिए तलब किया। इस आदेश को निगरानी के माध्यम से जिला जज के यहां चुनौती दी गई। निगरानी निरस्त हुई तो आरोपी इसके खिलाफ हाईकोर्ट चले गए वहां से भी आरोपियों को कोई राहत नहीं मिला तो अदालत में सरेंडर किया। शुक्रवार को अदालत ने दोनों को डकैती के मामले में दोषी पाते हुए सजा दी।
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अपर शासकीय अधिवक्ता साहिर नईम सफवी ने बताया कि घटना 28 अगस्त 1985 की है। इसी मोहल्ले के रहने वाले धरनीधर द्विवेदी ने अदालत में अर्जी दी कि उनके मोहल्ले के रहने वाले शंभूधर द्विवेदी व विद्याधर द्विवेदी ने घटनावाले दिन उनके घर में घुसकर जबरदस्ती चावल, धनिया व कालीन उठा ले गए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया। रिपोर्ट के बाद विवेचक ने दोनों को क्लीन चिट देते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इस पर धरनीधर की कोर्ट में आपत्ति के बाद एफआर निरस्त करके दोनों को तलब किया। इस आदेश के खिलाफ आरोपियों ने निगरानी की। जिसे स्वीकृत करके कोर्ट ने मामले को बतौर परिवाद दर्ज करने का आदेश निचली अदालत को भेजा। वहां वादी और गवाहों के बयान के बाद फिर दोनों को विचारण के लिए तलब किया। इस आदेश को निगरानी के माध्यम से जिला जज के यहां चुनौती दी गई। निगरानी निरस्त हुई तो आरोपी इसके खिलाफ हाईकोर्ट चले गए वहां से भी आरोपियों को कोई राहत नहीं मिला तो अदालत में सरेंडर किया। शुक्रवार को अदालत ने दोनों को डकैती के मामले में दोषी पाते हुए सजा दी।
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