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पंचकोसी परिधि पर भी आस्था का सैलाब
Faizabad
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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अयोध्या। 14 कोसी के बाद रामनगरी की पंचकोसीय परिधि पर भी आस्था का सैलाब उमड़ा। अपराह्न 11:56 बजे कार्तिक शुक्ल एकादशी का मुहूर्त लगते ही परिक्रमा मार्ग के विभिन्न नुक्कड़ों पर श्रद्धालुओं का सोता फूट पड़ा। सर्वाधिक रौनक सरयू तट से लगे नयाघाट बंधा तिराहा पर रही। यहां से परिक्रमा शुरू करने वाले श्रद्धालुओं में से बहुतों ने पहले पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाई और सद् संकल्प के साथ परिक्रमा पथ की राह ली। कुछ की जुबान पर राम नाम और मंगल गीत था, जो मौन थे उनके भी जेहन से आराध्य के प्रति अनुराग बिंबित हो रहा था। पहाड़ी नदी की तरह परिक्रमार्थियों का प्रवाह आगे बढ़ने के साथ प्रगाढ़ होता गया। इसमें शामिल होने वालों में 14 कोसी परिक्रमा के विपरीत ग्रामीणों के साथ नगरीय क्षेत्र के लोगों की भी भरपूर शिरकत रही। इनमें युवाओं की भी अच्छी खासी संख्या रही। कोई दो घंटे बाद नगरी की परिधि श्रद्धालुओं से पूरी तरह कस उठी और संध्या की दस्तक के साथ परिक्रमार्थियों का हुजूम यौवन का स्पर्श करने लगा। कुछ देर के लिए प्रतीत हुआ कि नगरी खाली हो गई और अधिकांश लोग परिक्रमा का पुण्य अर्जित करने में लीन हो चले हैं। हालांकि वास्तविकता ऐसी नहीं रही। 21 बार पंचकोसी परिक्रमा कर चुके अधिवक्ता सुभाष त्रिपाठी के अनुसार परिक्रमा का चरम प्रवाहित होना अभी शेष है। उन्होंने बताया कि पंचकोसी परिक्रमा करने वाले ब्रह्म मुहूर्त में इस अनुष्ठान का निष्पादन पसंद करते हैं। ऐसे में समझा जाता है कि शनिवार की भोर परिक्रमा की रौनक एक बार फिर शिखर पर होगी। इस बीच अगली कतार के लोगों की परिक्रमा पूर्ण भी हुई। सरयू में आचमन के साथ उनकी मुख-मुद्रा से प्रकट हो रहा उल्लास इस अनुष्ठान की कहानी बयां करने वाला रहा। झांसी से आए अवकाश प्राप्त शिक्षक शिवकुमार दीक्षित के अनुसार यह अति आनंद दायक है। शरीर तो निढाल पड़ गया पर अंत:करण उतना ही सजग हो गया है।
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