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पुराने शोधार्थियों की ‘मिस्ट्री’ बनी नए पंजीयन में बाधा
Faizabad
Updated Wed, 14 Nov 2012 12:00 PM IST
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फैजाबाद। अवध विश्वविद्यालय में तकरीबन ढाई वर्षों से शोध कार्र्य में नए पंजीकरण बंद हैं। प्रदेश स्तरीय पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी, परिणाम आ चुका है। बावजूद इसके नए शोध पंजीकरण नहीं शुरू हो सके। इसकी राह में पुराने शोधार्थियों के पंजीयन की ‘मिस्ट्री’ बाधा बनी हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसमें इस कदर उलझा है कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा के अभ्यर्थियों के पंजीकरण के लिए रोडमैप भी तैयार नहीं कर पा रहा है। रिक्त सीटों का आकलन अधूरा है और न ही कोर्स वर्क का प्रारूप ही निर्धारित कर सका है। मजेदार बात यह है कि विवि ने सूबे में पहली बार पीएचडी की प्रवेश परीक्षा कराई। पूर्व में यूजीसी के नियमों का हवाला देते हुए विवि प्रशासन ने ही शोध कार्यों पर प्रतिबंध लगाया, यही अब विवि के लिए रहस्य बन गया है। जिसे वह निस्तारित नहीं कर पा रहा है।
संदेह की आशंका पर तकरीबन एक वर्ष से एक हजार शोधार्थियों की शोध प्रक्रिया लटकी हुई है। अब तक विश्वविद्यालय के आला अधिकारी इसका निस्तारण नहीं कर सके। अधिकांश अभ्यर्थी शोध प्रबंध भी बना चुके हैं। दूसरी ओर पीएचडी दाखिले की प्रवेश परीक्षा के बाद अब तक विवि में कितने विषयों में कितनी सीटें शोध के लिए रिक्त हैं, इसका आकलन नहीं किया जा सका। इसकी वजह पुरानी ठप शोध प्रक्रिया बताई जाती है। गौरतलब है कि अवध विवि परिसर व संबद्ध तकरीबन 36 महाविद्यालयों में शोध गाइड, शोध का निर्देशन करते हैं। इन्हीं गाइड्स के अंतर्गत ही रिक्त सीटों का आकलन किया जाना है। पुरानी प्रक्रिया सुलटाने के लिए विधिक राय भी मांगी गई, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में है। खबर है कि प्रो. आरसी सारस्वत के त्याग पत्र के बाद कुलपति का दायित्व संभालने वाले प्रो. पीके सिन्हा नए सिरे से पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रहे हैं। बताते हैं कि पुराने प्रकरण के निस्तारण के लिए एक तरफ कवायद चलेगी। वहीं नए शोधार्थियों के लिए छह माह के कोर्स वर्क का सृजन किया जाएगा। शोध में नया पंजीकरण न होने तथा पुराने प्रकरण के निस्तारण न किए जाने से शोधार्थियों के साथ ही शिक्षक भी खौफ हैं। अवध विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ. प्रदीप सिंह ने विवि को चेताया है कि यदि शीघ्र प्रकरण का निपटारा नहीं किया गया तो शिक्षक संघ आंदोलन को बाध्य होगा। वहीं छात्र नेता बलराम यादव शोधार्थियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहते हैं कि पीएचडी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने वाला विश्वविद्यालय ही शोध के पंजीकरण की प्रक्रिया अभी नहीं शुरू करा सका, जो हास्यास्पद है। उन्होंने कहा कि कानपुर विवि ने इसी परीक्षा के आधार पर पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने पुराने प्रकरण के निस्तारण और नए पंजीकरण के शुरू किए जाने की मांग की। अविवि का कोई अधिकारी पुरानी प्रक्रिया कब तक निस्तारित की जाएगी, इस बारे में कुछ बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि कुलपति पीके सिन्हा ने कहा कि पुराना प्रकरण टेक्निकल है, उस पर अध्ययन करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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संदेह की आशंका पर तकरीबन एक वर्ष से एक हजार शोधार्थियों की शोध प्रक्रिया लटकी हुई है। अब तक विश्वविद्यालय के आला अधिकारी इसका निस्तारण नहीं कर सके। अधिकांश अभ्यर्थी शोध प्रबंध भी बना चुके हैं। दूसरी ओर पीएचडी दाखिले की प्रवेश परीक्षा के बाद अब तक विवि में कितने विषयों में कितनी सीटें शोध के लिए रिक्त हैं, इसका आकलन नहीं किया जा सका। इसकी वजह पुरानी ठप शोध प्रक्रिया बताई जाती है। गौरतलब है कि अवध विवि परिसर व संबद्ध तकरीबन 36 महाविद्यालयों में शोध गाइड, शोध का निर्देशन करते हैं। इन्हीं गाइड्स के अंतर्गत ही रिक्त सीटों का आकलन किया जाना है। पुरानी प्रक्रिया सुलटाने के लिए विधिक राय भी मांगी गई, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में है। खबर है कि प्रो. आरसी सारस्वत के त्याग पत्र के बाद कुलपति का दायित्व संभालने वाले प्रो. पीके सिन्हा नए सिरे से पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रहे हैं। बताते हैं कि पुराने प्रकरण के निस्तारण के लिए एक तरफ कवायद चलेगी। वहीं नए शोधार्थियों के लिए छह माह के कोर्स वर्क का सृजन किया जाएगा। शोध में नया पंजीकरण न होने तथा पुराने प्रकरण के निस्तारण न किए जाने से शोधार्थियों के साथ ही शिक्षक भी खौफ हैं। अवध विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ. प्रदीप सिंह ने विवि को चेताया है कि यदि शीघ्र प्रकरण का निपटारा नहीं किया गया तो शिक्षक संघ आंदोलन को बाध्य होगा। वहीं छात्र नेता बलराम यादव शोधार्थियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहते हैं कि पीएचडी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने वाला विश्वविद्यालय ही शोध के पंजीकरण की प्रक्रिया अभी नहीं शुरू करा सका, जो हास्यास्पद है। उन्होंने कहा कि कानपुर विवि ने इसी परीक्षा के आधार पर पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने पुराने प्रकरण के निस्तारण और नए पंजीकरण के शुरू किए जाने की मांग की। अविवि का कोई अधिकारी पुरानी प्रक्रिया कब तक निस्तारित की जाएगी, इस बारे में कुछ बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि कुलपति पीके सिन्हा ने कहा कि पुराना प्रकरण टेक्निकल है, उस पर अध्ययन करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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