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दक्षिण अफ्रीका से पूर्वजों का गांव ढूंढने निकले रामकृष्ण
Updated Mon, 20 Nov 2017 11:34 PM IST
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बीकापुर। भारत में अपने पूर्वजों के पैतृक गांव की खोज में दक्षिण अफ्रीका से एक बुजुर्ग यहां पहुंचे हैं। उनका कहना है कि रोजगार के सिलसिले में 126 वर्ष पूर्व उनके पूर्वज दक्षिण अफ्रीका में जाकर बस गए थे। सोमवार सुबह बीकापुर तहसील पहुंचे रामकृष्ण रामनाथ (60) ने एसडीएम प्रमोद कुमार तिवारी से पूर्वजों के पैतृक गांव को ढूंढने में मदद करने का अनुरोध किया।
जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसीलदार विनीत गुप्ता, रामकृष्ण के साथ बीकापुर क्षेत्र के करौदी गांव गए और घंटों पूछताछ किया, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। तहसीलदार विनीत कुमार गुप्ता ने बताया कि तहसील क्षेत्र में करौंदी नाम के तीन गांव हैं, जिसमें दो गांव बीकापुर कोतवाली क्षेत्र व एक गांव हैदरगंज थाना क्षेत्र में पड़ता है।
बीकापुर कोतवाली क्षेत्र के दोनों गांव में खोजबीन किया गया, लेकिन सुराग नहीं मिला। मंगलवार को हैदरगंज थाना क्षेत्र के करौदी गांव में भी टीम पहुंचकर खोजबीन करेगी। दक्षिण अफ्रीका से पूर्वजों की खोज में आए रामकृष्ण रामनाथ ने बताया कि उनके परदादा भिखारु शर्मा कुछ भारतीयों के साथ रोजगार की तलाश में पानी के जहाज से 25 वर्ष की उम्र में 28 अप्रैल 1891 को दक्षिण अफ्रीका गए थे और वहीं बस गए थे।
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भारत आए रामकृष्ण के पास मात्र एक कागज है, जो उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनल अफेयर से प्राप्त किया है। उस कागजात में उनके परबाबा बेकारु पुत्र जोखू का अफ्रीका जाने का जिक्र है, जिसमें बीकापुर तहसील का पता ग्राम करौंदी थाना बीकापुर जिला फैजाबाद अंकित है।
रामकृष्ण रामनाथ ने बताया कि उनकी शादी गोंडा जनपद के कप्तानगंज के निवासी एक परिवार से हुई है, उनका परिवार सैकड़ों वर्षों से अफ्रीका में रह रहा है। बताया कि पूर्वजों की खोज में छह माह का वीजा लेकर भारत आए हैं। रामकृष्ण अफ्रीका में एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। अंग्रेजी भाषा के अलावा टूटी-फूटी हिंदी भी बोल लेते हैं।
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जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसीलदार विनीत गुप्ता, रामकृष्ण के साथ बीकापुर क्षेत्र के करौदी गांव गए और घंटों पूछताछ किया, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। तहसीलदार विनीत कुमार गुप्ता ने बताया कि तहसील क्षेत्र में करौंदी नाम के तीन गांव हैं, जिसमें दो गांव बीकापुर कोतवाली क्षेत्र व एक गांव हैदरगंज थाना क्षेत्र में पड़ता है।
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बीकापुर कोतवाली क्षेत्र के दोनों गांव में खोजबीन किया गया, लेकिन सुराग नहीं मिला। मंगलवार को हैदरगंज थाना क्षेत्र के करौदी गांव में भी टीम पहुंचकर खोजबीन करेगी। दक्षिण अफ्रीका से पूर्वजों की खोज में आए रामकृष्ण रामनाथ ने बताया कि उनके परदादा भिखारु शर्मा कुछ भारतीयों के साथ रोजगार की तलाश में पानी के जहाज से 25 वर्ष की उम्र में 28 अप्रैल 1891 को दक्षिण अफ्रीका गए थे और वहीं बस गए थे।
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भारत आए रामकृष्ण के पास मात्र एक कागज है, जो उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनल अफेयर से प्राप्त किया है। उस कागजात में उनके परबाबा बेकारु पुत्र जोखू का अफ्रीका जाने का जिक्र है, जिसमें बीकापुर तहसील का पता ग्राम करौंदी थाना बीकापुर जिला फैजाबाद अंकित है।
रामकृष्ण रामनाथ ने बताया कि उनकी शादी गोंडा जनपद के कप्तानगंज के निवासी एक परिवार से हुई है, उनका परिवार सैकड़ों वर्षों से अफ्रीका में रह रहा है। बताया कि पूर्वजों की खोज में छह माह का वीजा लेकर भारत आए हैं। रामकृष्ण अफ्रीका में एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। अंग्रेजी भाषा के अलावा टूटी-फूटी हिंदी भी बोल लेते हैं।