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बच्चों को खुद से कामयाब देख खुश होता है पिता
Updated Mon, 18 Jun 2018 12:32 AM IST
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बच्चों को खुद से ज्यादा कामयाब देख खुश होता पिता
फैजाबाद। पिता ही वह शख्स होता है, जो बच्चों को खुद से ज्यादा कामयाब होता देखकर खुश होता है। सफलता के आसमां पर बच्चे की उड़ान उसे प्रफुल्लित करती है। बचपन में अंगुली पकड़कर चलाने से लेकर हर सुख-दुख में बच्चों के हर कदम उनके पिता के बदौलत ही होते हैं। बच्चों की मुस्कराहट के लिये पूरा जीवन पिता, पुत्र को समर्पित कर देता है।
यह बातें रविवार को फादर्स-डे के अवसर पर अयोध्या धाम समिति के तत्वावधान में शहर के मोतीबाग स्थित होटल के सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. एचबी सिंह ने कही। कार्यक्रम में विभिन्न समाज के सात बुजुर्गों को पिताश्री की उपाधि से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पूर्व प्रोफेसर डॉ. जगन्नाथ त्रिपाठी, मानिक चंद्र अग्रवाल, सरदार राजेंद्र सिंह छाबड़ा, धीरेंद्र कुमार आर्य, शंभूनाथ खन्ना एडवोकेट व पीएस टंडन को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष निरंकार अग्रवाल व संचालन संजय महेंद्रा ने किया। इस मौके पर गिरीश चंद्र मनचंदा, योगी सोमेशनाथ, धर्म सेना के संस्थापक संतोष दुबे, वेदप्रकाश राजपाल, कृपानिधान तिवारी, रवि मेहरोत्रा आदि मौजूद रहे।
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फैजाबाद। पिता ही वह शख्स होता है, जो बच्चों को खुद से ज्यादा कामयाब होता देखकर खुश होता है। सफलता के आसमां पर बच्चे की उड़ान उसे प्रफुल्लित करती है। बचपन में अंगुली पकड़कर चलाने से लेकर हर सुख-दुख में बच्चों के हर कदम उनके पिता के बदौलत ही होते हैं। बच्चों की मुस्कराहट के लिये पूरा जीवन पिता, पुत्र को समर्पित कर देता है।
यह बातें रविवार को फादर्स-डे के अवसर पर अयोध्या धाम समिति के तत्वावधान में शहर के मोतीबाग स्थित होटल के सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. एचबी सिंह ने कही। कार्यक्रम में विभिन्न समाज के सात बुजुर्गों को पिताश्री की उपाधि से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पूर्व प्रोफेसर डॉ. जगन्नाथ त्रिपाठी, मानिक चंद्र अग्रवाल, सरदार राजेंद्र सिंह छाबड़ा, धीरेंद्र कुमार आर्य, शंभूनाथ खन्ना एडवोकेट व पीएस टंडन को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष निरंकार अग्रवाल व संचालन संजय महेंद्रा ने किया। इस मौके पर गिरीश चंद्र मनचंदा, योगी सोमेशनाथ, धर्म सेना के संस्थापक संतोष दुबे, वेदप्रकाश राजपाल, कृपानिधान तिवारी, रवि मेहरोत्रा आदि मौजूद रहे।
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