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बैंक शाखाओं को व्यावसायिक प्रतिष्ठान के रूप में विकसित करने पर जोर
Updated Sat, 02 Jun 2018 01:04 AM IST
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बैंक का आधुनिकीकरण अति आवश्यक
फैजाबाद। जिला जिला सहकारी बैंक संचालक मंडल की बैठक शुक्रवार हुई। इसमें बैंक शाखाओं को व्यावसायिक प्रतिष्ठान के रूप में विकसित करने पर जोर रहा। जिससे बैंक बाजार की व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा का सामना कर सके।
बैक के सभापति धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बैंक का आधुनिकीकरण अति आवश्यक है। बोर्ड की बैठक में सहकारी बैंक को बाजार में प्रतिस्पर्धा को देखते और विकसित बनाने की योजना पर विचार किया गया। खासतौर से नए सिरे से बैंक को लाइसेंस मिलने के बाद यह मंथन का विषय बताया गया। इसके लिए एक योजना पर भी विचार किया गया। जिला सहकारी बैंक के सभापति ने बताया कि बैंक की अभी 24 ब्रांच सीबीएस नहीं हो पाई है, जिन्हें एक महीने के भीतर सीबीएस किए जाने पर चर्चा की गई।
बताया कि सहकारी बैंकों में ग्राहकों की आमद बढ़े इसके लिए सुविधाएं बढ़ाने तथा अन्य बैंकों से प्रतिस्पर्धा में लाने पर भी विचार किया गया। बैंक के संचालकों से उनके क्षेत्र में स्थित बैंक की शाखाओं के बारे में रिपोर्ट की अपेक्षा की गई साथ ही कहा गया कि संचालकों से आने वाले सुझाव के आधार पर बैंक शाखाओं को विकसित किए जाने पर विचार होगा। सभापति ने बताया कि ऋण वसूली को लेकर सुझाव रहा कि जिन किसानों का ऋण बकाया है, उनसे संवाद स्थापित करके बैंक के बकाए को जमा करने की अपील की जाए। बैठक में संचालक विश्वनाथ सिंह, डिंपल सिंह, मंजू सहित बैंक के अधिकारी दिवाकर सिंह, रेनू कुशवाहा, राहुल सिंह, सुधीर कुमार सिंह मौजूद रहे।
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फैजाबाद। जिला जिला सहकारी बैंक संचालक मंडल की बैठक शुक्रवार हुई। इसमें बैंक शाखाओं को व्यावसायिक प्रतिष्ठान के रूप में विकसित करने पर जोर रहा। जिससे बैंक बाजार की व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा का सामना कर सके।
बैक के सभापति धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बैंक का आधुनिकीकरण अति आवश्यक है। बोर्ड की बैठक में सहकारी बैंक को बाजार में प्रतिस्पर्धा को देखते और विकसित बनाने की योजना पर विचार किया गया। खासतौर से नए सिरे से बैंक को लाइसेंस मिलने के बाद यह मंथन का विषय बताया गया। इसके लिए एक योजना पर भी विचार किया गया। जिला सहकारी बैंक के सभापति ने बताया कि बैंक की अभी 24 ब्रांच सीबीएस नहीं हो पाई है, जिन्हें एक महीने के भीतर सीबीएस किए जाने पर चर्चा की गई।
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बताया कि सहकारी बैंकों में ग्राहकों की आमद बढ़े इसके लिए सुविधाएं बढ़ाने तथा अन्य बैंकों से प्रतिस्पर्धा में लाने पर भी विचार किया गया। बैंक के संचालकों से उनके क्षेत्र में स्थित बैंक की शाखाओं के बारे में रिपोर्ट की अपेक्षा की गई साथ ही कहा गया कि संचालकों से आने वाले सुझाव के आधार पर बैंक शाखाओं को विकसित किए जाने पर विचार होगा। सभापति ने बताया कि ऋण वसूली को लेकर सुझाव रहा कि जिन किसानों का ऋण बकाया है, उनसे संवाद स्थापित करके बैंक के बकाए को जमा करने की अपील की जाए। बैठक में संचालक विश्वनाथ सिंह, डिंपल सिंह, मंजू सहित बैंक के अधिकारी दिवाकर सिंह, रेनू कुशवाहा, राहुल सिंह, सुधीर कुमार सिंह मौजूद रहे।
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