{"_id":"5a00a08b4f1c1ba7678b9bcf","slug":"71509990539-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीभरत यात्रा सोमवार को चित्रकूट के लिए रवाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीभरत यात्रा सोमवार को चित्रकूट के लिए रवाना
Updated Mon, 06 Nov 2017 11:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। सत्ता प्राप्ति के लिए सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक धरोहरों पर हमले किए जा रहे हैं, जिसे हर हाल में रोकना होगा। यह तभी संभव होगा, जब समाज में सद्चरित्र का निर्माण होगा।
ये बातें सोमवार को अयोध्या से चित्रकूट तक निकलने वाली 45वीं श्रीभरत यात्रा का शुभारंभ करते हुए श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष व मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास ने कहीं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने आदर्शों और मर्यादित जीवन के द्वारा ही मानवता की रक्षा कर रामराज्य की स्थापना की।
उनके इस संकल्प कि पूर्ति में अनुज भरत जी सहायक सिद्ध हुए। 14 वर्षों तक भगवान श्रीराम ने जहां वनवासी जीवन व्यतीत कर धर्म की स्थापना की।
वहीं भरत जी ने चित्रकूट जाकर उनकी चरण पादुका को सिंहासन पर विराजमान कर स्वयं तपस्वी भेष धारण किया और अयोध्या की राजसत्ता का 14 वर्षों तक संचालन किया
ऐसे चरित्र और प्रेम की स्थापना को लेकर ही भरत यात्रा का आयोजन प्रत्येक वर्ष किया जा रहा है।
सात दिवसीय यात्रा 9 को पहुंचेगी चित्रकूट
सोमवार सुबह 45वीं श्रीभरत यात्रा वैदिक मंत्रोचारण के बीच सैकड़ों संत-धर्माचार्यों व राम भक्तों को साथ लेकर लगभग एक दर्जन चार पहिया व तीन बसों से मणिराम दासजी की छावनी से चित्रकूट के लिये रवाना हुई।
विज्ञापन
मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास शास्त्री के मार्गदर्शन में शुरू हुई सात दिवसीय श्रीभरत यात्रा नंदीग्राम, सीताकुंड, सुल्तानपुर, श्रग्वेरपुर, भारद्वाज मुनि आश्रम झूसी, प्रयाग होती हुई, नौ नवंबर को चित्रकूट पहुंचेगी।
यहां पर 10 नवंबर को कामद गिरी पर्वत की परिक्रमा, गुप्त गोदावरी का दर्शन पूजन व अन्य धार्मिक पौराणिक स्थलों की पूजा करने के बाद 12 नवंबर को सुबह अयोध्या के मणिराम दास छावनी में आकर समाप्त होगी।
विज्ञापन
ये बातें सोमवार को अयोध्या से चित्रकूट तक निकलने वाली 45वीं श्रीभरत यात्रा का शुभारंभ करते हुए श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष व मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास ने कहीं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने आदर्शों और मर्यादित जीवन के द्वारा ही मानवता की रक्षा कर रामराज्य की स्थापना की।
उनके इस संकल्प कि पूर्ति में अनुज भरत जी सहायक सिद्ध हुए। 14 वर्षों तक भगवान श्रीराम ने जहां वनवासी जीवन व्यतीत कर धर्म की स्थापना की।
वहीं भरत जी ने चित्रकूट जाकर उनकी चरण पादुका को सिंहासन पर विराजमान कर स्वयं तपस्वी भेष धारण किया और अयोध्या की राजसत्ता का 14 वर्षों तक संचालन किया
ऐसे चरित्र और प्रेम की स्थापना को लेकर ही भरत यात्रा का आयोजन प्रत्येक वर्ष किया जा रहा है।
सात दिवसीय यात्रा 9 को पहुंचेगी चित्रकूट
सोमवार सुबह 45वीं श्रीभरत यात्रा वैदिक मंत्रोचारण के बीच सैकड़ों संत-धर्माचार्यों व राम भक्तों को साथ लेकर लगभग एक दर्जन चार पहिया व तीन बसों से मणिराम दासजी की छावनी से चित्रकूट के लिये रवाना हुई।
विज्ञापन
मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास शास्त्री के मार्गदर्शन में शुरू हुई सात दिवसीय श्रीभरत यात्रा नंदीग्राम, सीताकुंड, सुल्तानपुर, श्रग्वेरपुर, भारद्वाज मुनि आश्रम झूसी, प्रयाग होती हुई, नौ नवंबर को चित्रकूट पहुंचेगी।
यहां पर 10 नवंबर को कामद गिरी पर्वत की परिक्रमा, गुप्त गोदावरी का दर्शन पूजन व अन्य धार्मिक पौराणिक स्थलों की पूजा करने के बाद 12 नवंबर को सुबह अयोध्या के मणिराम दास छावनी में आकर समाप्त होगी।