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संत और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करेगी विहिप
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:33 AM IST
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संत और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करेगी विहिप
अयोध्या। राममंदिर मामले में हो रही देरी को लेकर नाराज चल रहे संत समाज को मनाने का काम अब विश्व हिंदू परिषद करेगी। संत समाज और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने का अभियान चातुर्मास में 23 जुलाई से 23 नवंबर के बीच शुरू होगा। विहिप हर शंकराचार्य, अखाड़ों के महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर सहित संत-महंतों से हस्ताक्षर कराएगी। संत राममंदिर मसले पर अपने सुझाव व विचार भी लिखेंगे। जिसे सरकार तक पहुंचाने का काम होगा।
केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार है, फैजाबाद-अयोध्या में सांसद, विधायक से लेकर महापौर तक भाजपा के हैं बावजूद इसके राममंदिर मामले में सरकार द्वारा उचित पहल न किए जाने से संत खासे नाराज हैं। सरकार मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की बात कहकर बच रही है। संतों ने सरकार को चेताया भी था कि यदि राममंदिर निर्माण का मार्ग शीघ्र प्रशस्त न हुआ तो 2019 के चुनाव में भाजपा को झटका लगेगा।
जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के करीब दो दर्जन संतों को लखनऊ बुलाकर उन्हें राममंदिर निर्माण के प्रति आश्वस्त करते हुए उनका स्वागत सत्कार भी किया गया था। अयोध्या में सरयू महोत्सव के लिए 10 लाख प्रदान कर संतों की नाराजगी दूर करने का भी प्रयास किया था।
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रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मोत्सव में देश के कोने-कोने से शामिल संत-धर्माचार्यों ने भी राममंदिर के लिए प्रस्ताव बनाने की मांग मुखर की थी। संत सम्मेलन का उद्घाटन करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों को धैर्य रखने की सलाह देते हुए कहा था कि भगवान राम का मंदिर मर्यादा में रहकर ही बनेगा।
अब विश्व हिंदू परिषद संत समाज को मनाने के साथ ही संगठित करने का भी काम करेगी। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा बताते हैं कि संत और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करना बहुत जरूरी है। इसके लिए चार्तुमास में संतों से मिलने का अभियान शुरू किया जाएगा। चार्तुमास में संत भ्रमण नहीं करते, ऐसे में मुलाकात भी आसान होगी।
23 जुलाई से 23 नवंबर के बीच विहिप के पदाधिकारी व सदस्य संतों से संपर्क करेंगे। बताया कि संत और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने के क्रम में विहिप हर शंकराचार्य, अखाड़ों के महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर सहित संत-महंतों से हस्ताक्षर कराएगी। संतों की राय जानेगी। जिसे सरकार तक पहुंचाने का काम किया जाएगा। इससे संतों के रुख से सरकार को अवगत कराने में आसानी होगी और संत और सरकार के बीच समन्वय भी स्थापित होगा।
राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे सरकार : कमलनयन दास
अयोध्या। मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि संत समाज ही नहीं हर हिंदू समाज की इच्छा है कि, अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण मोदी व योगी राज में हो जाना चाहिए। सबकी भावनाएं सरकार के साथ जुड़ी हुई हैं। समय अनुकूल है, अब नहीं तो कब राममंदिर का निर्माण होगा। सरकार जल्द से जल्द राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे, अब विलंब नहीं होना चाहिए।
मोदी व योगी राज में ही होगा राममंदिर का निर्माण : महंत सुरेश दास
दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि अयोध्या भगवान श्रीरामकी जन्मभूमि है, यह कोर्ट ने भी प्रमाणित कर दिया है। इसलिए राममंदिर तो बनना ही है। राममंदिर निर्माण के लिए समय भी उचित है। देश की करोड़ों जनता अब राममंदिर निर्माण चाहती है, हमें पूरी उम्मीद है कि मोदी एवं योगी शासन में ही राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। वह दिन दूर नहीं जब अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण शुरू होगा।
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अयोध्या। राममंदिर मामले में हो रही देरी को लेकर नाराज चल रहे संत समाज को मनाने का काम अब विश्व हिंदू परिषद करेगी। संत समाज और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने का अभियान चातुर्मास में 23 जुलाई से 23 नवंबर के बीच शुरू होगा। विहिप हर शंकराचार्य, अखाड़ों के महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर सहित संत-महंतों से हस्ताक्षर कराएगी। संत राममंदिर मसले पर अपने सुझाव व विचार भी लिखेंगे। जिसे सरकार तक पहुंचाने का काम होगा।
केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार है, फैजाबाद-अयोध्या में सांसद, विधायक से लेकर महापौर तक भाजपा के हैं बावजूद इसके राममंदिर मामले में सरकार द्वारा उचित पहल न किए जाने से संत खासे नाराज हैं। सरकार मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की बात कहकर बच रही है। संतों ने सरकार को चेताया भी था कि यदि राममंदिर निर्माण का मार्ग शीघ्र प्रशस्त न हुआ तो 2019 के चुनाव में भाजपा को झटका लगेगा।
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जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के करीब दो दर्जन संतों को लखनऊ बुलाकर उन्हें राममंदिर निर्माण के प्रति आश्वस्त करते हुए उनका स्वागत सत्कार भी किया गया था। अयोध्या में सरयू महोत्सव के लिए 10 लाख प्रदान कर संतों की नाराजगी दूर करने का भी प्रयास किया था।
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रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मोत्सव में देश के कोने-कोने से शामिल संत-धर्माचार्यों ने भी राममंदिर के लिए प्रस्ताव बनाने की मांग मुखर की थी। संत सम्मेलन का उद्घाटन करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों को धैर्य रखने की सलाह देते हुए कहा था कि भगवान राम का मंदिर मर्यादा में रहकर ही बनेगा।
अब विश्व हिंदू परिषद संत समाज को मनाने के साथ ही संगठित करने का भी काम करेगी। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा बताते हैं कि संत और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करना बहुत जरूरी है। इसके लिए चार्तुमास में संतों से मिलने का अभियान शुरू किया जाएगा। चार्तुमास में संत भ्रमण नहीं करते, ऐसे में मुलाकात भी आसान होगी।
23 जुलाई से 23 नवंबर के बीच विहिप के पदाधिकारी व सदस्य संतों से संपर्क करेंगे। बताया कि संत और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने के क्रम में विहिप हर शंकराचार्य, अखाड़ों के महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर सहित संत-महंतों से हस्ताक्षर कराएगी। संतों की राय जानेगी। जिसे सरकार तक पहुंचाने का काम किया जाएगा। इससे संतों के रुख से सरकार को अवगत कराने में आसानी होगी और संत और सरकार के बीच समन्वय भी स्थापित होगा।
राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे सरकार : कमलनयन दास
अयोध्या। मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि संत समाज ही नहीं हर हिंदू समाज की इच्छा है कि, अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण मोदी व योगी राज में हो जाना चाहिए। सबकी भावनाएं सरकार के साथ जुड़ी हुई हैं। समय अनुकूल है, अब नहीं तो कब राममंदिर का निर्माण होगा। सरकार जल्द से जल्द राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे, अब विलंब नहीं होना चाहिए।
मोदी व योगी राज में ही होगा राममंदिर का निर्माण : महंत सुरेश दास
दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि अयोध्या भगवान श्रीरामकी जन्मभूमि है, यह कोर्ट ने भी प्रमाणित कर दिया है। इसलिए राममंदिर तो बनना ही है। राममंदिर निर्माण के लिए समय भी उचित है। देश की करोड़ों जनता अब राममंदिर निर्माण चाहती है, हमें पूरी उम्मीद है कि मोदी एवं योगी शासन में ही राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। वह दिन दूर नहीं जब अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण शुरू होगा।