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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की टीम ने गेहूं की फसल जांची
Updated Sat, 24 Feb 2018 12:33 AM IST
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की टीम ने जांची गेहूं की फसल
फैजाबाद। नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज में संचालित अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजनाएं गेहूं एवं जौ के विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्र पर गए परीक्षणों का निरीक्षण एवं मूल्यांकन करने आई भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के वैज्ञानिकों की टीम के सदस्यों ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जेएस संधू के साथ गेहूं की फसल का अवलोकन किया।
वैज्ञानिक दल का नेतृत्व कर रहे इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च इन ड्राई एरियाज मोरक्को के बार्ले ब्रीडर डॉ. आरपीएस वर्मा ने कुलपति को विश्वविद्यालय के परीक्षणों पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को सुझाव दिया है कि परीक्षणों को छोटे-छोटे टुकड़ों में लगाया जाय तो ज्यादा विश्वसनीय परिणाम व आंकड़े प्राप्त हो सकेंगे। कुलपति प्रो. संधू ने कहा कि नवीनतम विकसित शोध तकनीकों का उपयोग एवं परीक्षण स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किया जाय तो बेहतर परिणाम हासिल हो सकते हैं। इस दौरान टीम के अन्य सदस्य इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ले करनाल के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. चुन्नी लाल, चंद्रशेखर कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर के ब्रीडर डॉ. पीके गुप्ता तथा नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. शिव प्रताप सिंह उपस्थित रहे।
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फैजाबाद। नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज में संचालित अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजनाएं गेहूं एवं जौ के विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्र पर गए परीक्षणों का निरीक्षण एवं मूल्यांकन करने आई भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के वैज्ञानिकों की टीम के सदस्यों ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जेएस संधू के साथ गेहूं की फसल का अवलोकन किया।
वैज्ञानिक दल का नेतृत्व कर रहे इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च इन ड्राई एरियाज मोरक्को के बार्ले ब्रीडर डॉ. आरपीएस वर्मा ने कुलपति को विश्वविद्यालय के परीक्षणों पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को सुझाव दिया है कि परीक्षणों को छोटे-छोटे टुकड़ों में लगाया जाय तो ज्यादा विश्वसनीय परिणाम व आंकड़े प्राप्त हो सकेंगे। कुलपति प्रो. संधू ने कहा कि नवीनतम विकसित शोध तकनीकों का उपयोग एवं परीक्षण स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किया जाय तो बेहतर परिणाम हासिल हो सकते हैं। इस दौरान टीम के अन्य सदस्य इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ले करनाल के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. चुन्नी लाल, चंद्रशेखर कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर के ब्रीडर डॉ. पीके गुप्ता तथा नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. शिव प्रताप सिंह उपस्थित रहे।
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