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नए युग के भारत का लें संकल्प
Updated Fri, 26 Jan 2018 01:32 AM IST
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नए युग के भारत का लें संकल्प
हमारा देश कृषि प्रधान है। यहां कृषि में अभी बहुत कार्य होने शेष हैं। कृषि एक ऐसा संसाधन है जो भारत को अर्थिक रूप से संपन्न बना सकता है। इस लिए गणतंत्र दिवस हमें यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हमारे वैज्ञानिक व शोधार्थी पूरी लगन व निष्ठा के साथ अपने कार्यों में तत्परता से जुटकर कृषि के क्षेत्र में नए अविष्कार करें। जिससे कृषि के क्ष्ेात्र में अपार विकास हो व हमारा देश नए युग की ओर जा सके।- प्रो. अख्तर हसीब ,कुलपति, आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय
सम-सामयिक शोध लाएगा परिवर्तन
हमारा देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ज्यादातर लोग युवा हैं। आवश्यकता इस बात की है कि युवा शक्ति को सही दिशा में ले जाया जाए। संकल्प इस बात का लिया जाना चाहिए कि देश के युवा शिक्षा की ओर ज्यादा ध्यान दें और कोशिश यह होनी चाहिए कि जिन छात्राओं व युवाओं को जो विषय प्रिय हों उनकी इच्छा के अनुरूप ही उनको संबंधित फील्ड में भेजा जाए। इससे छात्रों में रुचि भी जागेगी और सम-सामयकि शोध की संभावनाएं बढ़ेगी। इस समाज व देश में चमत्कारी परिवर्तन आएगा। - प्रो. मनोज दीक्षित, कुलपति डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय
पढ़ाई की बेहतर सुविधाएं दे सकतीं हैं चमत्कारी परिणाम
देश में प्रतिभावान छात्रों की कमी नहीं है लेकिन आर्थिक अभाव व सामाजिक तानाबाना कहीं न कहीं इनको प्रभावित कर रहा है। अच्छे छात्रों के साथ यह परेशानी जरूर है कि उपयुक्त मंच न मिलने से प्रतिभाएं समाप्त हो जातीं हैं। हमें इस गणतंत्र पर यह संकल्प लेना कि जो प्रातिभावान छात्र-छात्राएं हैं उनको सही दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाए। सरकारी स्तर पर भी प्रतिभावान छात्रों को आगे लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।- प्रो. विनोद चौधरी, पर्यावरण विज्ञान विभाग, अवध विश्वविद्यालय
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कला और संस्कृति से जुड़ाव से बनेगा नया भारत
हमारे देश की चर्चा आदि काल से कला-संस्कृति के लिए ही रही है। हमारा देश सदैव अनेकता में एकता का परिचय देता चला आया है। इसका मुख्य कारण हमारी भारतीय संस्कृति ही रही है। इसे कलाओं से जोड़कर हमने विविध आयाम स्थापित किए हैं। इस गणतंत्र पर हमें अपनी कला संस्कृति के पुराने आयाम को स्थापित करने का संकल्प लेना चाहिए । इससे हम एक नए भारत को देख सकेंगे।- जर्नादन पांडेय, रंगकर्मी
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हमारा देश कृषि प्रधान है। यहां कृषि में अभी बहुत कार्य होने शेष हैं। कृषि एक ऐसा संसाधन है जो भारत को अर्थिक रूप से संपन्न बना सकता है। इस लिए गणतंत्र दिवस हमें यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हमारे वैज्ञानिक व शोधार्थी पूरी लगन व निष्ठा के साथ अपने कार्यों में तत्परता से जुटकर कृषि के क्षेत्र में नए अविष्कार करें। जिससे कृषि के क्ष्ेात्र में अपार विकास हो व हमारा देश नए युग की ओर जा सके।- प्रो. अख्तर हसीब ,कुलपति, आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय
सम-सामयिक शोध लाएगा परिवर्तन
हमारा देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ज्यादातर लोग युवा हैं। आवश्यकता इस बात की है कि युवा शक्ति को सही दिशा में ले जाया जाए। संकल्प इस बात का लिया जाना चाहिए कि देश के युवा शिक्षा की ओर ज्यादा ध्यान दें और कोशिश यह होनी चाहिए कि जिन छात्राओं व युवाओं को जो विषय प्रिय हों उनकी इच्छा के अनुरूप ही उनको संबंधित फील्ड में भेजा जाए। इससे छात्रों में रुचि भी जागेगी और सम-सामयकि शोध की संभावनाएं बढ़ेगी। इस समाज व देश में चमत्कारी परिवर्तन आएगा। - प्रो. मनोज दीक्षित, कुलपति डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय
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पढ़ाई की बेहतर सुविधाएं दे सकतीं हैं चमत्कारी परिणाम
देश में प्रतिभावान छात्रों की कमी नहीं है लेकिन आर्थिक अभाव व सामाजिक तानाबाना कहीं न कहीं इनको प्रभावित कर रहा है। अच्छे छात्रों के साथ यह परेशानी जरूर है कि उपयुक्त मंच न मिलने से प्रतिभाएं समाप्त हो जातीं हैं। हमें इस गणतंत्र पर यह संकल्प लेना कि जो प्रातिभावान छात्र-छात्राएं हैं उनको सही दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाए। सरकारी स्तर पर भी प्रतिभावान छात्रों को आगे लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।- प्रो. विनोद चौधरी, पर्यावरण विज्ञान विभाग, अवध विश्वविद्यालय
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कला और संस्कृति से जुड़ाव से बनेगा नया भारत
हमारे देश की चर्चा आदि काल से कला-संस्कृति के लिए ही रही है। हमारा देश सदैव अनेकता में एकता का परिचय देता चला आया है। इसका मुख्य कारण हमारी भारतीय संस्कृति ही रही है। इसे कलाओं से जोड़कर हमने विविध आयाम स्थापित किए हैं। इस गणतंत्र पर हमें अपनी कला संस्कृति के पुराने आयाम को स्थापित करने का संकल्प लेना चाहिए । इससे हम एक नए भारत को देख सकेंगे।- जर्नादन पांडेय, रंगकर्मी