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झूलन में आज सज-धज के युगल सरकार बैठे हैं.....
Updated Mon, 30 Jul 2018 12:04 AM IST
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झूलन में आज सज-धज के युगल सरकार बैठे हैं...
अयोध्या। रंगमहल मंदिर में श्रावण झूलनोत्सव का श्रीगणेश सावन के प्रथम दिन से हो गया है। रामनगरी के विभिन्न मंदिरों में झूलनोत्सव का पर्व सावन शुक्ल तृतीया से मनाया जाता है। इसी दिन पौराणिक मणिपर्वत पर मेले का आयोजन होता है
वहीं रामकोट स्थित पौराणिक मंदिर रंगमहल में गुरुपूर्णिमा से ही झूलनोत्सव का श्रीगणेश हो जाता है लेकिन गुरुपूर्णिमा पर ग्रहण का साया होने के कारण एक दिन बाद मंदिर में झूलनोत्सव प्रारंभ हुआ जो पूरी दिव्यता-भव्यता के साथ रक्षाबंधन तक चलेगा। झूलन में आज सज-धज के युगल सरकार बैठे हैं, अलिन मन मोहने मानो सुछवि श्रृंगार बैठे हैं... जैसे अन्य पदों पर भक्त भावविभोर हो रहे हैं। मधुर उपासना परंपरा की प्रधान पीठ रंगमहल में श्रावण झूलनोत्सव एक माह तक विभिन्न सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों के मध्य संचालित होता है। विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों की प्रस्तुतियां महोत्सव को दिव्यता प्रदान कर रही हैं।
रंगमहल के श्रीमहंत रामशरण दास बताते हैं कि रंगमहल के संस्थापक प्रथम आचार्य स्वामी सरयू शरण जी द्वारा लगभग दो सौ वर्ष पूर्व झूलनोत्सव की परंपरा शुरू की गई थी। मंदिर में एक माह तक झूलनोत्सव का आयोजन होता है। इस वर्ष 7 अगस्त को फूलबंगला व 20 अगस्त को गलबहियां झांकी सजाई जाएगी। हर दिन शाम को 7.30 बजे से 10 बजे तक झूलनोत्सव होता है।
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अयोध्या। रंगमहल मंदिर में श्रावण झूलनोत्सव का श्रीगणेश सावन के प्रथम दिन से हो गया है। रामनगरी के विभिन्न मंदिरों में झूलनोत्सव का पर्व सावन शुक्ल तृतीया से मनाया जाता है। इसी दिन पौराणिक मणिपर्वत पर मेले का आयोजन होता है
वहीं रामकोट स्थित पौराणिक मंदिर रंगमहल में गुरुपूर्णिमा से ही झूलनोत्सव का श्रीगणेश हो जाता है लेकिन गुरुपूर्णिमा पर ग्रहण का साया होने के कारण एक दिन बाद मंदिर में झूलनोत्सव प्रारंभ हुआ जो पूरी दिव्यता-भव्यता के साथ रक्षाबंधन तक चलेगा। झूलन में आज सज-धज के युगल सरकार बैठे हैं, अलिन मन मोहने मानो सुछवि श्रृंगार बैठे हैं... जैसे अन्य पदों पर भक्त भावविभोर हो रहे हैं। मधुर उपासना परंपरा की प्रधान पीठ रंगमहल में श्रावण झूलनोत्सव एक माह तक विभिन्न सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों के मध्य संचालित होता है। विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों की प्रस्तुतियां महोत्सव को दिव्यता प्रदान कर रही हैं।
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रंगमहल के श्रीमहंत रामशरण दास बताते हैं कि रंगमहल के संस्थापक प्रथम आचार्य स्वामी सरयू शरण जी द्वारा लगभग दो सौ वर्ष पूर्व झूलनोत्सव की परंपरा शुरू की गई थी। मंदिर में एक माह तक झूलनोत्सव का आयोजन होता है। इस वर्ष 7 अगस्त को फूलबंगला व 20 अगस्त को गलबहियां झांकी सजाई जाएगी। हर दिन शाम को 7.30 बजे से 10 बजे तक झूलनोत्सव होता है।
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