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नहीं बरस रहे मेघ, उमसभरी गर्मी से सांसत
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:33 AM IST
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अब 10 जुलाई तक वर्षा होने की संभावना
फैजाबाद। एक सप्ताह पूर्व जिले में मानसून के प्रवेश करने के बाद भी मेघ नहीं बरस रहे हैं। जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिख रही हैं, साथ ही लोगों का उमस भरी गर्मी से बुरा हाल है। मौसम विभाग भी अब 10 जुलाई तक वर्षा होने की संभावना जता रहा है।
एक सप्ताह पूर्व जिले में मानसून ने प्रवेश किया। जिससे दो-तीन दिन तक आसमान में काले बादल छाए रहे और अलग-अलग इलाकों में वर्षा हुई। दो दिन पूर्व से मौसम का मिजाज फिर बदला। अचानक तेज धूप व उमस का कहर पहले की तरह ही शुरू हुआ।
शुक्रवार सुबह से ही उमस जारी रही। जरूरी काम निपटाने निकले लोग जगह-जगह पेड़ों की छांव ही तलाशते रहे। कचहरी परिसर, अस्पताल, तहसील, रेलवे स्टेशन आदि सार्वजनिक स्थलों पर भी लोग पसीने से तर-ब-तर नजर आए।
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उधर, मानसून के दस्तक देने के बाद एक बार किसानों में बरसात को लेकर आस जगी थी। कुछ किसानों ने तो धान की रोपाई करने के लिए बेरन आदि की निराई का कार्य भी शुरू कर दिया था। धान की रोपाई के लिए बरसात की सख्त आवश्यकता थी तो मौसम ने भी दगा दे दिया।
बिजली की कटौती समस्या को चौगुना कर रही है। अब किसान बारिश की आस में आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा है। नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि 10 जुलाई से ही हल्की बरसात की संभावना है।
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फैजाबाद। एक सप्ताह पूर्व जिले में मानसून के प्रवेश करने के बाद भी मेघ नहीं बरस रहे हैं। जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिख रही हैं, साथ ही लोगों का उमस भरी गर्मी से बुरा हाल है। मौसम विभाग भी अब 10 जुलाई तक वर्षा होने की संभावना जता रहा है।
एक सप्ताह पूर्व जिले में मानसून ने प्रवेश किया। जिससे दो-तीन दिन तक आसमान में काले बादल छाए रहे और अलग-अलग इलाकों में वर्षा हुई। दो दिन पूर्व से मौसम का मिजाज फिर बदला। अचानक तेज धूप व उमस का कहर पहले की तरह ही शुरू हुआ।
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शुक्रवार सुबह से ही उमस जारी रही। जरूरी काम निपटाने निकले लोग जगह-जगह पेड़ों की छांव ही तलाशते रहे। कचहरी परिसर, अस्पताल, तहसील, रेलवे स्टेशन आदि सार्वजनिक स्थलों पर भी लोग पसीने से तर-ब-तर नजर आए।
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उधर, मानसून के दस्तक देने के बाद एक बार किसानों में बरसात को लेकर आस जगी थी। कुछ किसानों ने तो धान की रोपाई करने के लिए बेरन आदि की निराई का कार्य भी शुरू कर दिया था। धान की रोपाई के लिए बरसात की सख्त आवश्यकता थी तो मौसम ने भी दगा दे दिया।
बिजली की कटौती समस्या को चौगुना कर रही है। अब किसान बारिश की आस में आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा है। नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि 10 जुलाई से ही हल्की बरसात की संभावना है।