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सोमवती अमावस्या पर सरयू स्नान को उमड़े श्रद्धालु
Updated Mon, 21 Aug 2017 11:48 PM IST
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सोमवती अमावस्या पर सरयू स्नान को उमड़े श्रद्धालु
अयोध्या। सोमवती अमावस्या पर सरयू स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, सुबह से ही सरयू घाटों पर स्नान कर दान करने वालों का तांता लगा रहा। सरयू स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, रामलला व कनक भवन के दरबार में माथा टेका। इस दौरान विवाहित महिलाओं द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत-चंदन इत्यादि से पूजा की गई, इसके बाद महिलाओं ने वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा की।
पंडित कौशल्यानंद वर्धन बताते हैं कि सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। ये वर्ष में लगभग एक अथवा दो ही बार पड़ती है। इस वर्ष की अमावस्या अधिक महत्वपूर्ण इसलिए भी है कि पूरे वर्ष भर जब मनुष्य पितृ तर्पण करता है तो जिस कुशा का प्रयोग करता है उसे ग्रहण करने का दिन भाद्रपद अमावस्या होती है। यदि यह अमावस्या सोमवार को पड़े तो अधिक पुण्यदायी मानी जाती है क्योंकि सोमवार को पृथ्वी पर सोमांश प्राप्त होता है। वहीं, सोमवती अमावस्या पर सूर्यग्रहण का भी संयोग रहा, हालांकि भारत में नहीं दिखने से सूतक आदि का कोई प्रभाव स्नान या पूजा पाठ पर नहीं माना गया।
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अयोध्या। सोमवती अमावस्या पर सरयू स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, सुबह से ही सरयू घाटों पर स्नान कर दान करने वालों का तांता लगा रहा। सरयू स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, रामलला व कनक भवन के दरबार में माथा टेका। इस दौरान विवाहित महिलाओं द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत-चंदन इत्यादि से पूजा की गई, इसके बाद महिलाओं ने वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा की।
पंडित कौशल्यानंद वर्धन बताते हैं कि सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। ये वर्ष में लगभग एक अथवा दो ही बार पड़ती है। इस वर्ष की अमावस्या अधिक महत्वपूर्ण इसलिए भी है कि पूरे वर्ष भर जब मनुष्य पितृ तर्पण करता है तो जिस कुशा का प्रयोग करता है उसे ग्रहण करने का दिन भाद्रपद अमावस्या होती है। यदि यह अमावस्या सोमवार को पड़े तो अधिक पुण्यदायी मानी जाती है क्योंकि सोमवार को पृथ्वी पर सोमांश प्राप्त होता है। वहीं, सोमवती अमावस्या पर सूर्यग्रहण का भी संयोग रहा, हालांकि भारत में नहीं दिखने से सूतक आदि का कोई प्रभाव स्नान या पूजा पाठ पर नहीं माना गया।
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