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शासन का आदेश बेअसर, फिर रुका गन्ना मूल्य भुगतान
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अयोध्या। गन्ना मूल्य भुगतान के लिए शासन का सख्त फरमान इस बार भी मिल मालिकों पर बेअसर साबित हो रहा है। इस पेराई सत्र में भी मिल मालिक नियमानुसार 14 दिन पूर्व तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान नहीं कर रहे हैं। मौजूदा समय में 14 दिन पहले खरीदे गए गन्ने का दोनों चीनी मिलों पर 55.17 करोड़ रुपये बकाया गया है।
जिले के करीब 80 हजार किसानों ने इस बार 73 हजार 305 हेक्टेयर में गन्ना उत्पादन किया है, जिसकी खपत के लिए जिले में प्रमुख रूप से दो चीनी मिलें संचालित हैं। दोनों चीनी मिलों ने पेराई सत्र के शुरू होने के बाद तेजी से गन्ना पेराई की है, लेकिन किसानों की गाढ़ी कमाई का भुगतान करने में पीछे हैं।
केएम शुगर मिल्स लिमिटेड मोतीनगर में बीते 20 नवंबर से पेराई कार्य शुरू हुआ है। जिसने बीती तीन जनवरी तक 31.94 लाख क्विंटल गन्ना क्रय करके 3.35 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। जबकि रौजागांव चीनी मिल में पेराई कार्य 16 नवंबर को शुरू हुआ है। अब तक यहां 29.18 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद करके 3.32 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है। दोनों चीनी मिलें गन्ना पेराई व चीनी उत्पादन में काफी तेज नजर आ रही हैं, लेकिन गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर उदासीन हैं।
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शासन की ओर से किसानों के गन्ने का मूल्य इस बार भी नहीं बढ़ाया गया है। लेकिन चीनी मिलों को 14 दिन पूर्व तक क्रय किए गए समस्त गन्ने का भुगतान करने के लिए निर्देशित किया है। गत वर्ष भी गन्ना मूल्य भुगतान अटक गया था, जो पेराई सत्र शुरू होने तक होता रहा है। इस बार भी मिल मालिक उसी ढर्रे पर चलते दिखाई दे रहे हैं।
मसौधा चीनी मिल पर 14 दिन तक खरीदे गए गन्ने का कुल मूल्य 67.62 करोड़ बनता है, जिसके सापेक्ष अब तक 34.31 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि 33.30 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं, रौजागांव चीनी मिल पर इस अवधि का कुल 66.03 करोड़ रुपये बनता है, जिसके सापेक्ष कुल 44.15 करोड़ का भुगतान हुआ है और 21.87 करोड़ अवशेष है।
मसौधा चीनी मिल ने छह दिसंबर व रौजागांव चीनी मिल ने आठ दिसंबर तक खरीदे गन्ने का भुगतान किया है। हालांकि भुगतान करने में रौजागांव चीनी मिल मसौधा चीनी मिल की अपेक्षा आगे है। इस तरह वर्तमान पेराई सत्र में भी किसानों को अपनी ही गाढ़ी कमाई पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। अभी से ही गन्ना मूल्य भुगतान रुकने से किसान गत वर्ष की पुनरावृत्ति की संभावना व्यक्त कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन मिल मालिकों के बुलंद इरादे के आगे नतमस्तक नजर आ रहा है। बस, बैठकों में भुगतान का मौखिक आदेश जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ले रहा है।
वर्जन
शुरुआती दौर में तेजी से गन्ना मूल्य भुगतान हुआ था। मौजूदा समय में करीब 55 करोड़ रुपये बकाया है। शासनादेश का अनुपालन करते हुए तीव्रता से भुगतान करने का निर्देश चीनी मिलों को दिया गया है।
- अरविंद प्रकाश सिंह, जिला गन्ना अधिकारी अयोध्या
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जिले के करीब 80 हजार किसानों ने इस बार 73 हजार 305 हेक्टेयर में गन्ना उत्पादन किया है, जिसकी खपत के लिए जिले में प्रमुख रूप से दो चीनी मिलें संचालित हैं। दोनों चीनी मिलों ने पेराई सत्र के शुरू होने के बाद तेजी से गन्ना पेराई की है, लेकिन किसानों की गाढ़ी कमाई का भुगतान करने में पीछे हैं।
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केएम शुगर मिल्स लिमिटेड मोतीनगर में बीते 20 नवंबर से पेराई कार्य शुरू हुआ है। जिसने बीती तीन जनवरी तक 31.94 लाख क्विंटल गन्ना क्रय करके 3.35 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। जबकि रौजागांव चीनी मिल में पेराई कार्य 16 नवंबर को शुरू हुआ है। अब तक यहां 29.18 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद करके 3.32 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है। दोनों चीनी मिलें गन्ना पेराई व चीनी उत्पादन में काफी तेज नजर आ रही हैं, लेकिन गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर उदासीन हैं।
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शासन की ओर से किसानों के गन्ने का मूल्य इस बार भी नहीं बढ़ाया गया है। लेकिन चीनी मिलों को 14 दिन पूर्व तक क्रय किए गए समस्त गन्ने का भुगतान करने के लिए निर्देशित किया है। गत वर्ष भी गन्ना मूल्य भुगतान अटक गया था, जो पेराई सत्र शुरू होने तक होता रहा है। इस बार भी मिल मालिक उसी ढर्रे पर चलते दिखाई दे रहे हैं।
मसौधा चीनी मिल पर 14 दिन तक खरीदे गए गन्ने का कुल मूल्य 67.62 करोड़ बनता है, जिसके सापेक्ष अब तक 34.31 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि 33.30 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं, रौजागांव चीनी मिल पर इस अवधि का कुल 66.03 करोड़ रुपये बनता है, जिसके सापेक्ष कुल 44.15 करोड़ का भुगतान हुआ है और 21.87 करोड़ अवशेष है।
मसौधा चीनी मिल ने छह दिसंबर व रौजागांव चीनी मिल ने आठ दिसंबर तक खरीदे गन्ने का भुगतान किया है। हालांकि भुगतान करने में रौजागांव चीनी मिल मसौधा चीनी मिल की अपेक्षा आगे है। इस तरह वर्तमान पेराई सत्र में भी किसानों को अपनी ही गाढ़ी कमाई पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। अभी से ही गन्ना मूल्य भुगतान रुकने से किसान गत वर्ष की पुनरावृत्ति की संभावना व्यक्त कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन मिल मालिकों के बुलंद इरादे के आगे नतमस्तक नजर आ रहा है। बस, बैठकों में भुगतान का मौखिक आदेश जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ले रहा है।
वर्जन
शुरुआती दौर में तेजी से गन्ना मूल्य भुगतान हुआ था। मौजूदा समय में करीब 55 करोड़ रुपये बकाया है। शासनादेश का अनुपालन करते हुए तीव्रता से भुगतान करने का निर्देश चीनी मिलों को दिया गया है।
- अरविंद प्रकाश सिंह, जिला गन्ना अधिकारी अयोध्या