{"_id":"5c1a8bd9bdec2256b73ee74a","slug":"131545243609-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान को भी लगने लगी ठंड, रजाई-हीटर लगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान को भी लगने लगी ठंड, रजाई-हीटर लगे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भगवान को भी लगने लगी ठंड, रजाई-हीटर लगे
अयोध्या। रामनगरी मंदिरों की नगरी है। यहां संत-धर्माचार्य अपने से कहीं अधिक अपने आराध्य के प्रति संवेदनशील होते है। वह मंदिरों में विराजमान अपने आराध्य को ठंड से बचाने के लिए तरह-तरह की व्यवस्थाएं करते हैं।
इसी क्रम में रामनगरी के मठ-मंदिरों में भगवान को ठंड से बचाने के लिए उन्हें ऊनी वस्त्र पहनाए जा रहे हैं तो कहीं गर्भगृह में ब्लोअर, अंगीठी व हीटर के जरिए भगवान को ठंडक से बचाने का उपाय किया जा रहा है।
ज्ञ्बजरंग बली की प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी में बजरंग बली को रजाई की ओट में रखा जा रहा है। दशरथ महल बड़ा स्थान में धनुषधारी भगवान को रजाई ओढ़ाई जा रही है।
विज्ञापन
बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य कहते हैं कि भक्तिभाव से हम गर्मी में भगवान के लिए फूल बंग्ला झांकी सजाते हैं तो ठंड में उन्हें गर्म कपड़े पहनाएं जाते हैं। रसिक परंपरा में आराध्य के पति भक्ति भाव अर्पित है, इसकी तस्दीक सरयू तट स्थित रसमोद कुंज में होती हैं।
यहां मंदिर में विराजमान भगवान को रजाई ओढ़ाई जा रही है तो अंगीठी भी जलाकर उन्हें ठंडक से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। बिड़ला मंदिर में महाराज एवं महाराजनी के रूप में विराजमान राम-सीता के विग्रह को आचमन तक गर्म पानी से कराया जा रहा है।
मंदिर के प्रबंधक पवन सिंह बताते हैं कि भगवान के लिए मखमली रजाई एवं ऊनी वस्त्र के साथ बिड़ला सरकार को शृंगार से भोग व आरती में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
इसके अतिरिक्त दशरथमहल बड़ास्थान, श्रीरामबल्लभाकुंज, कनकभवन सरकार सहित अन्य मंदिरों में भी भगवान को ठंड से बचाने के लिए तरह-तरह के यत्न किए जा रहे हैं।
रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला सरकार को भी ठंड से बचाने के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं। रामजन्मभूमि के अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि रामजन्मभूमि में भगवान रामलला बाल रूप में विराजमान हैं।
जिस तरह एक मां बच्चे को ठंड से बचाने के लिए उपाय करती है। उसी तरह बालरूप भगवान रामलला को ठंड से बचाने के लिए हर यत्न किए गए हैं। बताया कि भगवान को रजाई, कंबल ओढ़ाए जा रहे हैं, सिंहासन तक ऊनी हैं, वस्त्र भी ऊनी पहनाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
अयोध्या। रामनगरी मंदिरों की नगरी है। यहां संत-धर्माचार्य अपने से कहीं अधिक अपने आराध्य के प्रति संवेदनशील होते है। वह मंदिरों में विराजमान अपने आराध्य को ठंड से बचाने के लिए तरह-तरह की व्यवस्थाएं करते हैं।
इसी क्रम में रामनगरी के मठ-मंदिरों में भगवान को ठंड से बचाने के लिए उन्हें ऊनी वस्त्र पहनाए जा रहे हैं तो कहीं गर्भगृह में ब्लोअर, अंगीठी व हीटर के जरिए भगवान को ठंडक से बचाने का उपाय किया जा रहा है।
विज्ञापन
ज्ञ्बजरंग बली की प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी में बजरंग बली को रजाई की ओट में रखा जा रहा है। दशरथ महल बड़ा स्थान में धनुषधारी भगवान को रजाई ओढ़ाई जा रही है।
विज्ञापन
बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य कहते हैं कि भक्तिभाव से हम गर्मी में भगवान के लिए फूल बंग्ला झांकी सजाते हैं तो ठंड में उन्हें गर्म कपड़े पहनाएं जाते हैं। रसिक परंपरा में आराध्य के पति भक्ति भाव अर्पित है, इसकी तस्दीक सरयू तट स्थित रसमोद कुंज में होती हैं।
यहां मंदिर में विराजमान भगवान को रजाई ओढ़ाई जा रही है तो अंगीठी भी जलाकर उन्हें ठंडक से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। बिड़ला मंदिर में महाराज एवं महाराजनी के रूप में विराजमान राम-सीता के विग्रह को आचमन तक गर्म पानी से कराया जा रहा है।
मंदिर के प्रबंधक पवन सिंह बताते हैं कि भगवान के लिए मखमली रजाई एवं ऊनी वस्त्र के साथ बिड़ला सरकार को शृंगार से भोग व आरती में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
इसके अतिरिक्त दशरथमहल बड़ास्थान, श्रीरामबल्लभाकुंज, कनकभवन सरकार सहित अन्य मंदिरों में भी भगवान को ठंड से बचाने के लिए तरह-तरह के यत्न किए जा रहे हैं।
रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला सरकार को भी ठंड से बचाने के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं। रामजन्मभूमि के अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि रामजन्मभूमि में भगवान रामलला बाल रूप में विराजमान हैं।
जिस तरह एक मां बच्चे को ठंड से बचाने के लिए उपाय करती है। उसी तरह बालरूप भगवान रामलला को ठंड से बचाने के लिए हर यत्न किए गए हैं। बताया कि भगवान को रजाई, कंबल ओढ़ाए जा रहे हैं, सिंहासन तक ऊनी हैं, वस्त्र भी ऊनी पहनाए जा रहे हैं।