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चंद दिनों की जिंदगी, इसमें नफरत की जगह कहां : श्रीश्री -AMBEDKAR NAGAR
Updated Thu, 16 Nov 2017 11:46 PM IST
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फैजाबाद। अयोध्या विवाद में सुलह-समझौते की कोशिशें पहले भी हुई हैं जो नाकाम हुई हैं। इसके बावजूद हम एक प्रयास और कर रहे हैं। मुझे पता है कि ये आसान नहीं हैं लेकिन ये असंभव भी नहीं है। ये बात श्रीश्री रविशंकर ने फार्ब्स इंटर कॉलेज में आयोजित इस्तकबालिया जलसे में मुसलिम समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए कही।
चंद दिन की जिंदगी है, इसमें नफरत की जगह कहां... इन शब्दों से अपनी बात शुरू करते हुए श्रीश्री ने कहा कि आज दोनों समुदाय के बीच इतनी दूरियां नहीं बन गई हैं कि हम बैठकर बात भी ना कर सकें। इसमें किसी नेता व कोर्ट की जरूरत नहीं है, हमें एक ऐसी मिसाल पेश करनी होगी जो पूरे विश्व के लिए प्रेरणा की बात बन जाए। कहा कि सम्मान, सहयोग, सद्भाव व सौहार्द्र को मानने वाली शख्सियतें आज भी हैं और वो इस विवाद का हल चाहती हैं, ये विवाद आपसी प्रेम व भाईचारे से ही हल होना चाहिए। कहा कि इसका हल दोनों समुदायों की सहमति से ही होना चाहिए। पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह की अगुवाई में आयोजित इस जलसे में मंच पर मौजूद मुफ्ती मेराज, सै. निजाम अशरफ, इकबाल मुस्तफा व मंजर मेंहदी ने श्रीश्री का स्वागत किया तो उन्होंने भी इनको अंगवस्त्र व माल्यार्पण कर शांति और सद्भाव से विवाद का हल निकालने की अपील की।
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चंद दिन की जिंदगी है, इसमें नफरत की जगह कहां... इन शब्दों से अपनी बात शुरू करते हुए श्रीश्री ने कहा कि आज दोनों समुदाय के बीच इतनी दूरियां नहीं बन गई हैं कि हम बैठकर बात भी ना कर सकें। इसमें किसी नेता व कोर्ट की जरूरत नहीं है, हमें एक ऐसी मिसाल पेश करनी होगी जो पूरे विश्व के लिए प्रेरणा की बात बन जाए। कहा कि सम्मान, सहयोग, सद्भाव व सौहार्द्र को मानने वाली शख्सियतें आज भी हैं और वो इस विवाद का हल चाहती हैं, ये विवाद आपसी प्रेम व भाईचारे से ही हल होना चाहिए। कहा कि इसका हल दोनों समुदायों की सहमति से ही होना चाहिए। पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह की अगुवाई में आयोजित इस जलसे में मंच पर मौजूद मुफ्ती मेराज, सै. निजाम अशरफ, इकबाल मुस्तफा व मंजर मेंहदी ने श्रीश्री का स्वागत किया तो उन्होंने भी इनको अंगवस्त्र व माल्यार्पण कर शांति और सद्भाव से विवाद का हल निकालने की अपील की।
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