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नवजात शिशुओं पर विशेष नजर रखेंगी आशा बहू
Updated Sun, 06 Aug 2017 12:04 AM IST
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मवई में हुआ 10 दिवसीय प्रशिक्षण, बांटे गए प्रमाणपत्र
मवई (फैजाबाद)। अब गांवों में नवजात शिशु की देखभाल 28 दिन तक आशा कार्यकर्ता विशेष तौर पर करेंगी। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए आशाओं को 10 दिवसीय प्रशिक्षण दिया है। प्रशिक्षण के बाद उत्तीर्ण आशाओं को स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी गिरजेश सैनी व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रविकांत वर्मा ने शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मवई पर प्रमाणपत्र वितरित किया।
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी गिरजेश सैनी ने सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को सख्ती से लागू करने को कहा। साथ ही न्यू बॉर्न केयर योजना के सुचारु संचालन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि, प्रतिवर्ष राज्य में एक हजार में नवजात शिशु मृत्युदर 44 है।
50 फीसदी नवजात की मृत्यु जन्म के 28 दिन के अंदर हो जाती है। विभाग द्वारा आशाओं को दिए गए होम बेस न्यू बॉर्न केयर कार्यक्रम पर गंभीरता से कार्य करने पर नवजात की मृत्यु दर में कमी आने की संभावना है।
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चिकित्सा अधिकारी डॉ. रविकांत वर्मा ने कहा कि, विभागीय निर्देश के तहत आशा कार्यकर्ता प्रसूता के घर जाकर स्तनपान, प्रसूता व नवजात के रहन-सहन की विस्तृत जानकारी देंगी। नवजात के जन्म से लेकर 42 दिन तक आशा हर दिन घर जाकर नवजात को देखेंगी।
यदि इस अवधि में नवजात में संक्रमण के लक्षण दिखेंगे तो आशा परिवारीजनों को प्रोत्साहित कर सीएचसी में ले जाकर इलाज कराएंगी। इसके लिए आशा को 250 रुपये दिए जाएंगे। विशेष परिस्थितियों में नवजात शिशुओं को जिला अस्पताल भेजने की भी व्यवस्था है।
ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेसिंग मैनेजर विनोद सिंह ने बताया कि, मवई क्षेत्र की 60 आशा पहले ही प्रशिक्षित हो चुकी थीं, जिन्हें प्रमाणपत्र दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि आशाओं को वजन मशीन, डिजिटल थर्मामीटर, डिजिटल घड़ी, टार्च, कंबल सहित संपूर्ण किट उपलब्ध कराई गई है। इस मौके पर प्रशिक्षक अरविंद सिंह, सुरेश सिंह, आशा बहू विमला, रीता, मीना आदि मौजूद रहीं।
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मवई (फैजाबाद)। अब गांवों में नवजात शिशु की देखभाल 28 दिन तक आशा कार्यकर्ता विशेष तौर पर करेंगी। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए आशाओं को 10 दिवसीय प्रशिक्षण दिया है। प्रशिक्षण के बाद उत्तीर्ण आशाओं को स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी गिरजेश सैनी व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रविकांत वर्मा ने शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मवई पर प्रमाणपत्र वितरित किया।
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी गिरजेश सैनी ने सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को सख्ती से लागू करने को कहा। साथ ही न्यू बॉर्न केयर योजना के सुचारु संचालन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि, प्रतिवर्ष राज्य में एक हजार में नवजात शिशु मृत्युदर 44 है।
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50 फीसदी नवजात की मृत्यु जन्म के 28 दिन के अंदर हो जाती है। विभाग द्वारा आशाओं को दिए गए होम बेस न्यू बॉर्न केयर कार्यक्रम पर गंभीरता से कार्य करने पर नवजात की मृत्यु दर में कमी आने की संभावना है।
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चिकित्सा अधिकारी डॉ. रविकांत वर्मा ने कहा कि, विभागीय निर्देश के तहत आशा कार्यकर्ता प्रसूता के घर जाकर स्तनपान, प्रसूता व नवजात के रहन-सहन की विस्तृत जानकारी देंगी। नवजात के जन्म से लेकर 42 दिन तक आशा हर दिन घर जाकर नवजात को देखेंगी।
यदि इस अवधि में नवजात में संक्रमण के लक्षण दिखेंगे तो आशा परिवारीजनों को प्रोत्साहित कर सीएचसी में ले जाकर इलाज कराएंगी। इसके लिए आशा को 250 रुपये दिए जाएंगे। विशेष परिस्थितियों में नवजात शिशुओं को जिला अस्पताल भेजने की भी व्यवस्था है।
ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेसिंग मैनेजर विनोद सिंह ने बताया कि, मवई क्षेत्र की 60 आशा पहले ही प्रशिक्षित हो चुकी थीं, जिन्हें प्रमाणपत्र दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि आशाओं को वजन मशीन, डिजिटल थर्मामीटर, डिजिटल घड़ी, टार्च, कंबल सहित संपूर्ण किट उपलब्ध कराई गई है। इस मौके पर प्रशिक्षक अरविंद सिंह, सुरेश सिंह, आशा बहू विमला, रीता, मीना आदि मौजूद रहीं।