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सामाजिक चेतना के मार्गदर्शक थे भगवान रामानंदाचार्य : महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य
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अयोध्या। रामानंद भगवान ने विशेष परिस्थितियों में सारे समाज को एकजुट करने का काम किया। वे भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक तथा धार्मिक एवं सामाजिक चेतना के मार्गदर्शक थे। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक जीवन धारा को अक्षुण्ण प्रवाहित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। रामभक्ति की गंगा कोने-कोने में प्रवाहित कराने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। ये बातें दशरथ महल बड़ास्थान के महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहीं।
वे श्रीरामानंदाचार्य भगवान की 719वीं जयंती के अवसर पर भगवदाचार्य स्मारक सदन में संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे। जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि भगवान की भक्ति का हर व्यक्ति अधिकारी है, परमात्मा की दृष्टि में कोई भेद नहीं है। इसलिए रामानंदाचार्य ने कहा है कि ‘जाति-पाति पूछै नहिं कोई, हरि का भजै सो हरि का होई...’। रामानंदाचार्य भगवान ने रामभक्ति के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों में सामाजिक समरसता तथा समन्वय की भावना पैदा करने का सफल प्रयास किया।
कार्यक्रम के आयोजक महंत राममंगल दास रामायणी ने कहा कि रामानंदाचार्य के भक्ति संबंधी विचारों में जन सामान्य की भावना का प्रतिनिधित्व है। रामभक्ति के माध्यम से उन्होंने देश में नव जागरण किया। गोष्ठी का संचालन नवयन्यायाचार्य तुलसीदास ने किया। गोष्ठी में कमल दास, महंत पवन दास शास्त्री, महंत संतगोपाल दास, महंत रामभजन दास सहित अन्य संत-धर्माचार्य मौजूद रहे।
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रामनगरी के अन्य मंदिरों मणिरामदास की छावनी, श्रीरामबल्लभाकुंज, हरिधामगोपाल मंदिर, लक्ष्मण किला, हनुमान किला सहित अन्य में रामानंदाचार्य जयंती पर विभिन्न अनुष्ठान हुए।
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वे श्रीरामानंदाचार्य भगवान की 719वीं जयंती के अवसर पर भगवदाचार्य स्मारक सदन में संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे। जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि भगवान की भक्ति का हर व्यक्ति अधिकारी है, परमात्मा की दृष्टि में कोई भेद नहीं है। इसलिए रामानंदाचार्य ने कहा है कि ‘जाति-पाति पूछै नहिं कोई, हरि का भजै सो हरि का होई...’। रामानंदाचार्य भगवान ने रामभक्ति के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों में सामाजिक समरसता तथा समन्वय की भावना पैदा करने का सफल प्रयास किया।
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कार्यक्रम के आयोजक महंत राममंगल दास रामायणी ने कहा कि रामानंदाचार्य के भक्ति संबंधी विचारों में जन सामान्य की भावना का प्रतिनिधित्व है। रामभक्ति के माध्यम से उन्होंने देश में नव जागरण किया। गोष्ठी का संचालन नवयन्यायाचार्य तुलसीदास ने किया। गोष्ठी में कमल दास, महंत पवन दास शास्त्री, महंत संतगोपाल दास, महंत रामभजन दास सहित अन्य संत-धर्माचार्य मौजूद रहे।
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रामनगरी के अन्य मंदिरों मणिरामदास की छावनी, श्रीरामबल्लभाकुंज, हरिधामगोपाल मंदिर, लक्ष्मण किला, हनुमान किला सहित अन्य में रामानंदाचार्य जयंती पर विभिन्न अनुष्ठान हुए।