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पत्रकारिता लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाए रखने के लिए प्रतिबद्घ: डॉ त्रिपाठी
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अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में शनिवार को संसदीय पत्रकारिता की चुनौतियां एवं समाधान विषय पर आयोजित व्याख्यान को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए विधानसभा के पूर्व मुख्य संपादक डॉ. अरुणेंद्र चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि संसदीय पत्रकारिता लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाये रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में स्थापित मीडिया के समक्ष सदन की कार्यवाही से लेकर विधिक चुनौतियां विद्यमान रहती है। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि संसदीय पत्रकारिता के लिए संविधान का गहन अध्ययन आवश्यक है क्योंकि सदन में कार्यवाही के कुछ अंशों को संपादित कर समाचार प्रेषित किये जाते हैं। विधिक जानकारी के अभाव में संसदीय विशेषाधिकार के अवमान होने की स्थिति बन सकती है।
उन्होंने कहा कि संसदीय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपार संभावनाएं है, लेकिन इस क्षेत्र में विधिक रूप से सक्षम होने पर पत्रकारिता के क्षेत्र में बड़ा अवसर प्राप्त हो सकता है। कई अवसरों के संसदीय अवमान का संदर्भ देते हुए सचेत किया कि विधिक रूप से अपरिपक्वता पत्रकार के समक्ष कानूनी चुनौती बन सकती है।
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सदन में कार्यवाही के दौरान निष्पक्ष रूप से लोकहित में समाचारों का संपादन करना होता है। समाचार संकलन में अध्यक्ष की अनुमति के बगैर तथ्यों का प्रकाशन संसदीय विशेषाधिकार की श्रेणी में आता है।
विभाग के शिक्षक डॉ. विजयेन्दु चतुर्वेदी ने कहा कि संसदीय पत्रकारिता से जुड़ने का तात्पर्य कानून की बारीकियों के साथ समाचार संकलन एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप समाचारों की प्रस्तुति महत्वपूर्ण पक्ष है। इस मौके पर डॉ. राजेश सिंह कुशवाहा, डॉ. अनिल कुमार, शिक्षक डॉ. आरएन पाण्डेय, साक्षी श्रीवास्तव, मोनिका सिंह, नेहा सिंह, अमन कुमार, राजेश कुमार, आदित्य मेहरोत्रा आदि मौजूद रहे।
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लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में स्थापित मीडिया के समक्ष सदन की कार्यवाही से लेकर विधिक चुनौतियां विद्यमान रहती है। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि संसदीय पत्रकारिता के लिए संविधान का गहन अध्ययन आवश्यक है क्योंकि सदन में कार्यवाही के कुछ अंशों को संपादित कर समाचार प्रेषित किये जाते हैं। विधिक जानकारी के अभाव में संसदीय विशेषाधिकार के अवमान होने की स्थिति बन सकती है।
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उन्होंने कहा कि संसदीय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपार संभावनाएं है, लेकिन इस क्षेत्र में विधिक रूप से सक्षम होने पर पत्रकारिता के क्षेत्र में बड़ा अवसर प्राप्त हो सकता है। कई अवसरों के संसदीय अवमान का संदर्भ देते हुए सचेत किया कि विधिक रूप से अपरिपक्वता पत्रकार के समक्ष कानूनी चुनौती बन सकती है।
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सदन में कार्यवाही के दौरान निष्पक्ष रूप से लोकहित में समाचारों का संपादन करना होता है। समाचार संकलन में अध्यक्ष की अनुमति के बगैर तथ्यों का प्रकाशन संसदीय विशेषाधिकार की श्रेणी में आता है।
विभाग के शिक्षक डॉ. विजयेन्दु चतुर्वेदी ने कहा कि संसदीय पत्रकारिता से जुड़ने का तात्पर्य कानून की बारीकियों के साथ समाचार संकलन एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप समाचारों की प्रस्तुति महत्वपूर्ण पक्ष है। इस मौके पर डॉ. राजेश सिंह कुशवाहा, डॉ. अनिल कुमार, शिक्षक डॉ. आरएन पाण्डेय, साक्षी श्रीवास्तव, मोनिका सिंह, नेहा सिंह, अमन कुमार, राजेश कुमार, आदित्य मेहरोत्रा आदि मौजूद रहे।