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सरलता एवं साधुता की प्रतिमूर्ति थे महादेव दास: देवेंद्रप्रसादाचार्य
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अयोध्या। शीशमहल के साकेतवासी महंत मानस मार्तंड की उपाधि से विभूषित महंत महादेव दास शास्त्री को संत-धर्माचार्यों ने शोकसभा कर श्रद्धांजलि अर्पित की। शोकसभा की अध्यक्षता करते हुए दशरथ महल बड़ास्थान के महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि महंत महादेव दास की वाणी में सहजता एवं प्रेम की साक्षात उपस्थिति आत्मसात होती थी। वे सरलता व साधुता की प्रतिमूर्ति और संत परंपरा की अनमोल कड़ी थे।
जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि वे रामचरित मानस के विख्यात प्रवक्ता था। राम के चरित्र को जन-जन तक पहुंचाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि आधुनिक समाज में भी उनकी धर्मनिष्ठा सराहनीय थी। वे संत समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
रंगमहल के महंत रामशरण दास ने कहा कि उनका निधन संत समाज को व्यथित करने वाला है। महंत कन्हैयादास रामायणी ने कहा कि उनका निधन संत समाज की अपूर्णनीय क्षति है। शोकसभा का संचालन महंत रामभूषण दास कृपालु महाराज ने किया। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में महंत रामशरण दास रामायणी, महंत राममंगल दास, आचार्य विष्णुदेव नायक, महंत रामजी दास, नंदकिशोर शास्त्री, महंत उद्धव शरण, लवकुश दास सहित अन्य शामिल रहे।
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जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि वे रामचरित मानस के विख्यात प्रवक्ता था। राम के चरित्र को जन-जन तक पहुंचाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि आधुनिक समाज में भी उनकी धर्मनिष्ठा सराहनीय थी। वे संत समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
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रंगमहल के महंत रामशरण दास ने कहा कि उनका निधन संत समाज को व्यथित करने वाला है। महंत कन्हैयादास रामायणी ने कहा कि उनका निधन संत समाज की अपूर्णनीय क्षति है। शोकसभा का संचालन महंत रामभूषण दास कृपालु महाराज ने किया। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में महंत रामशरण दास रामायणी, महंत राममंगल दास, आचार्य विष्णुदेव नायक, महंत रामजी दास, नंदकिशोर शास्त्री, महंत उद्धव शरण, लवकुश दास सहित अन्य शामिल रहे।
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