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धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रीराम कथा आरंभ
Updated Mon, 19 Mar 2018 12:48 AM IST
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धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रीराम कथा आरंभ
अयोध्या। वासंतिक नवरात्र के आरंभ के साथ ही चैत्र रामनवमी मेला का भी शुभारंभ हो गया। मठ-मंदिरों व आश्रमों में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रीरामकथा आरंभ हो गई है। बड़ा भक्तमाल, हिंदू धाम, जानकी महल, हनुमानबाग समेत अन्य मठ मंदिरों में श्रद्धालु रामकथा का रसपान कर रहे हैं।
बड़ाभक्तमाल के महंत कौशल किशोर दास के सानिध्य व महंत अवधेश दास के संयोजन में डॉ. राघवाचार्य के श्रीमुख से रामकथा का शुभारंभ हुआ। कथा का शुभारंभ जिला जज चंद्रहास राम, सीजेएम अरविंद प्रसाद गुप्ता, न्यायिक मजिस्ट्रेट देवेंद्रप्रताप सिंह व भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने संतों की मौजूदगी में द्वीप प्रज्वलन कर किया। डॉ. राघवाचार्य ने प्रवचन सुनाते हुए कहा कि श्रीराम मर्यादा की प्रतिमूर्ति हैं। रामचरितमानस के प्रत्येक शब्द का अर्थ गूढ़ है, एक-एक शब्द अनुकरणीय है। जिसने रामचरित मानस का अनुकरण किया उसका जीवन सार्थक हो गया। इस अवसर पर दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, महंत जन्मेजय शरण, नागा हरिदास, नागा रामलखन दास, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य भाजपा निशेंद्र मोहन मिश्र आदि मौजूद रहे।
वहीं, हिंदू धाम में भक्तों को कथामृत का पान कराते हुए पूर्व सांसद रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि मैं लगातार 15 वर्षों से राम के चरित्र का वर्णन अयोध्या में इसलिए कर रहा हूं, जिससे आध्यात्मिक शक्ति जागृत होकर श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण में सहायक हो। कहा कि किष्किंधा में श्रीराम ने सुग्रीव से मैत्री करने के बाद यह आश्वासन दिया कि बाली को अत्याचार का फल जरूर मिलेगा। श्रीराम ने समाज की विकृत शक्तियों को उखाड़ फेंकने का काम अपने जीवन में किया। उन्होंने बालि का वध कर सुग्रीव की मित्रता निभाई। इस दौरान आचार्य संतोष मिश्र, अखिलेश पांडेय, कौशल मिश्र सहित अन्य मौजूद रहे।
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अयोध्या। वासंतिक नवरात्र के आरंभ के साथ ही चैत्र रामनवमी मेला का भी शुभारंभ हो गया। मठ-मंदिरों व आश्रमों में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रीरामकथा आरंभ हो गई है। बड़ा भक्तमाल, हिंदू धाम, जानकी महल, हनुमानबाग समेत अन्य मठ मंदिरों में श्रद्धालु रामकथा का रसपान कर रहे हैं।
बड़ाभक्तमाल के महंत कौशल किशोर दास के सानिध्य व महंत अवधेश दास के संयोजन में डॉ. राघवाचार्य के श्रीमुख से रामकथा का शुभारंभ हुआ। कथा का शुभारंभ जिला जज चंद्रहास राम, सीजेएम अरविंद प्रसाद गुप्ता, न्यायिक मजिस्ट्रेट देवेंद्रप्रताप सिंह व भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने संतों की मौजूदगी में द्वीप प्रज्वलन कर किया। डॉ. राघवाचार्य ने प्रवचन सुनाते हुए कहा कि श्रीराम मर्यादा की प्रतिमूर्ति हैं। रामचरितमानस के प्रत्येक शब्द का अर्थ गूढ़ है, एक-एक शब्द अनुकरणीय है। जिसने रामचरित मानस का अनुकरण किया उसका जीवन सार्थक हो गया। इस अवसर पर दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, महंत जन्मेजय शरण, नागा हरिदास, नागा रामलखन दास, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य भाजपा निशेंद्र मोहन मिश्र आदि मौजूद रहे।
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वहीं, हिंदू धाम में भक्तों को कथामृत का पान कराते हुए पूर्व सांसद रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि मैं लगातार 15 वर्षों से राम के चरित्र का वर्णन अयोध्या में इसलिए कर रहा हूं, जिससे आध्यात्मिक शक्ति जागृत होकर श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण में सहायक हो। कहा कि किष्किंधा में श्रीराम ने सुग्रीव से मैत्री करने के बाद यह आश्वासन दिया कि बाली को अत्याचार का फल जरूर मिलेगा। श्रीराम ने समाज की विकृत शक्तियों को उखाड़ फेंकने का काम अपने जीवन में किया। उन्होंने बालि का वध कर सुग्रीव की मित्रता निभाई। इस दौरान आचार्य संतोष मिश्र, अखिलेश पांडेय, कौशल मिश्र सहित अन्य मौजूद रहे।
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