{"_id":"62000e2b01bba56f801fcfc2","slug":"xpress-way-etawah-news-knp6792241175","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो एक्सप्रेस वे का संगम, सुविधा मिली न रोजगार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो एक्सप्रेस वे का संगम, सुविधा मिली न रोजगार
विज्ञापन
दोनों एक्सप्रेस वे को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा ओवर ब्रिज
- फोटो : ETAWAH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इटावा/ताखा। क्षेत्र का कुदरैल गांव, एक ऐसा गांव हैं। जहां से दो एक्सप्रेस वे गुजरते हैं। इस गांव में ही लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे और बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे मिलते हैं। जब बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे बनना शुरू हुआ तो कुदरैल गांव काफी चर्चा में रहा लेकिन इस गांव में सुविधाओं का टोटा है। रोजगार भी कुछ खास नहीं। और तो और यदि इस गांव के लोगों को एक्सप्रेस वे पर सफर करना हो तो उसे कम से कम 20 किमी दूर जाना पड़ेगा। गांव में एक्स्प्रेस वे पर चढ़ने के लिए कोई कट नहीं बनाया गया।
बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर काम तेजी से चल रहा है। इस गांव में ही यह एक्सप्रेस वे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे से जोड़ दिया जाएगा। इसके लिए दो ओवरब्रिज बनाने का काम चल रहा है। यहां के लोगों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बहुत ही रूखा से जवाब दिया। एक इंटर कॉलेज के शिक्षक ने बताया कि हमारे गांव की चर्चा तो बहुत हो रही है लेकिन इसमें गांव को कुछ नहीं मिला। यहां दोनों एक्सप्रेस वे जुड़ रहे हैं, यदि उतरने व चढ़ने की सुविधा होती तो कुछ स्थिति बदल सकती थी। गांव के लोग कुछ कारोबार भी कर सकते थे। यहां के लोग तो बस एक्सप्रेस वे से गुजरते वाहनों को देख भर सकते हैं। इस एक्सप्रेस वे के लिए गांव के किसानों ने अपनी जमीन दी है। उम्मीद थी कि कट बनने से क्षेत्र का विकास होगा लेकिन हुआ कुछ नहीं।
लोगों ने ताखा क्षेत्र में चढ़ने और उतरने के लिए दोनों एक्सप्रेसवे पर कट की मांग करते हुए महीनों प्रदर्शन किए थे लेकिन किसी ने उस ओर ध्यान नहीं दिया। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर निर्माण कार्य शुरू होने पर ही प्रदर्शन किए गए थे लेकिन मांग पूरी न होने से निराशा हाथ लगी थी।
विज्ञापन
कुदरैल गांव और ताखा ब्लाक के अन्य गांवों के लोगों को यदि एक्सप्रेस पर सफर करना है तो पहले उसे कम से कम 20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर जाने के लिए कुदरैल से भरथना-बिधूना मार्ग होते हुए पक्का तालाब कट पर जाना होगा, ये करीब 25 किमी का रास्ता है। वहीं आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर जाने के लिए चौपला कट से एक्सप्रेस वे पर चढ़ना होगा और लखनऊ जाने के लिए सौरिख से एक्सप्रेस वे पकड़ना होगा। इनकी दूरी भी लगभग 20 किमी है।
क्षेत्र का राजनीतिक रसूख भी कम नहीं है। यह क्षेत्र जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है, जहां से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव विधायक रहते हैं। वहीं लोकसभा क्षेत्र मैनपुरी पड़ता है, जहां से मुलायम सिंह यादव सांसद हैं।
कुदरैल गांव निवासी सोनू शर्मा का कहना है कि क्षेत्र के किसानों के साथ सरकार ने छल किया। किसानों को भूमिहीन के साथ बेरोजगार भी कर दिया। लोगों ने सोचा था कि खेती चली जाएगी लेकिन क्षेत्र के लोगों को चढ़ने-उतरने की सुविधा मिलेगी। जिससे क्षेत्र का विकास होगा।
सुखैया गांव निवासी राघवेंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि कट न होने से काफी दिक्कतें हो रही हैं। करीब 20 किलोमीटर का सफर तय करके एक्सप्रेस वे का सफर करने को मिलेगा।
कुदरैल गांव निवासी नवीन सविता का कहना है कि यहां के किसानों ने, युवाओं ने शासन को पत्र भेजे, धरना-प्रदर्शन किया, लाठियां खाईं लेकिन मिला कुछ नहीं।
कुदरैल गांव निवासी संजू तिवारी का कहना है कि गांव के लोगों ने शासन से लेकर प्रशासन तक कट की मांग की लेकिन किसी भी ने हमारी जायज मांग को नहीं सुना।
विज्ञापन
बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर काम तेजी से चल रहा है। इस गांव में ही यह एक्सप्रेस वे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे से जोड़ दिया जाएगा। इसके लिए दो ओवरब्रिज बनाने का काम चल रहा है। यहां के लोगों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बहुत ही रूखा से जवाब दिया। एक इंटर कॉलेज के शिक्षक ने बताया कि हमारे गांव की चर्चा तो बहुत हो रही है लेकिन इसमें गांव को कुछ नहीं मिला। यहां दोनों एक्सप्रेस वे जुड़ रहे हैं, यदि उतरने व चढ़ने की सुविधा होती तो कुछ स्थिति बदल सकती थी। गांव के लोग कुछ कारोबार भी कर सकते थे। यहां के लोग तो बस एक्सप्रेस वे से गुजरते वाहनों को देख भर सकते हैं। इस एक्सप्रेस वे के लिए गांव के किसानों ने अपनी जमीन दी है। उम्मीद थी कि कट बनने से क्षेत्र का विकास होगा लेकिन हुआ कुछ नहीं।
विज्ञापन
लोगों ने ताखा क्षेत्र में चढ़ने और उतरने के लिए दोनों एक्सप्रेसवे पर कट की मांग करते हुए महीनों प्रदर्शन किए थे लेकिन किसी ने उस ओर ध्यान नहीं दिया। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर निर्माण कार्य शुरू होने पर ही प्रदर्शन किए गए थे लेकिन मांग पूरी न होने से निराशा हाथ लगी थी।
विज्ञापन
कुदरैल गांव और ताखा ब्लाक के अन्य गांवों के लोगों को यदि एक्सप्रेस पर सफर करना है तो पहले उसे कम से कम 20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर जाने के लिए कुदरैल से भरथना-बिधूना मार्ग होते हुए पक्का तालाब कट पर जाना होगा, ये करीब 25 किमी का रास्ता है। वहीं आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर जाने के लिए चौपला कट से एक्सप्रेस वे पर चढ़ना होगा और लखनऊ जाने के लिए सौरिख से एक्सप्रेस वे पकड़ना होगा। इनकी दूरी भी लगभग 20 किमी है।
क्षेत्र का राजनीतिक रसूख भी कम नहीं है। यह क्षेत्र जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है, जहां से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव विधायक रहते हैं। वहीं लोकसभा क्षेत्र मैनपुरी पड़ता है, जहां से मुलायम सिंह यादव सांसद हैं।
कुदरैल गांव निवासी सोनू शर्मा का कहना है कि क्षेत्र के किसानों के साथ सरकार ने छल किया। किसानों को भूमिहीन के साथ बेरोजगार भी कर दिया। लोगों ने सोचा था कि खेती चली जाएगी लेकिन क्षेत्र के लोगों को चढ़ने-उतरने की सुविधा मिलेगी। जिससे क्षेत्र का विकास होगा।
सुखैया गांव निवासी राघवेंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि कट न होने से काफी दिक्कतें हो रही हैं। करीब 20 किलोमीटर का सफर तय करके एक्सप्रेस वे का सफर करने को मिलेगा।
कुदरैल गांव निवासी नवीन सविता का कहना है कि यहां के किसानों ने, युवाओं ने शासन को पत्र भेजे, धरना-प्रदर्शन किया, लाठियां खाईं लेकिन मिला कुछ नहीं।
कुदरैल गांव निवासी संजू तिवारी का कहना है कि गांव के लोगों ने शासन से लेकर प्रशासन तक कट की मांग की लेकिन किसी भी ने हमारी जायज मांग को नहीं सुना।

दोनों एक्सप्रेस वे को जोड़ने के लिए निर्माणाधीन सड़क- फोटो : ETAWAH