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मांगे नहीं मानी गई तो होगी बेमियादी हड़ताल
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Wed, 23 Dec 2015 12:16 AM IST
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वेतन विसंगतियों व अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को राज्य कर्मचारियों की हड़ताल से अधिकांश कार्यालयों में ताला लटका रहा। कुछ कार्यालयों में ताला खुला तो वहां कर्मचारियों के न होने से कामकाज का माहौल रत्ती भर भी नहीं दिखा। कार्यालय में कुर्सियां खाली पड़ी थी और कामकाज पूरी तरह से ठप रहा।
हड़ताल के कारण विकास भवन, कचहरी व अन्य कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। कर्मचारी अपने कार्यालयों से बाहर निकलकर कचहरी स्थित वट वृक्ष के नीचे पहुंचे और सभा कर सरकार के खिलाफ विगुल फूंका। हड़ताल के दूसरे दिन राज्य कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि 23 फरवरी तक उनकी मांगे नहीं मानी गई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।
कर्मचारियों ने कहा कि सरकार चार साल से उनकी उपेक्षा कर रही है। हड़ताल के दौरान किसी भी कर्मचारी का उत्पीड़न किया गया तो उसे सख्ती से निपटा जाएगा। 23 दिसंबर को कर्मचारियों की बैठक होगी। बैठक में सभी कर्मचारियों से बैठक में भाग लेने की अपील की गई।
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परिषद के जिला अध्यक्ष दिलीप मिश्रा ने कहा शीर्ष अधिकारियों की सहमत के बाद भी मांगों से संबंधित शासनादेश जारी नहीं किया गया। केंद्रीय कर्मचारियों की भांति वेतन भत्ते दिए जाएं व पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए। वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक द्विवेदी ने कहा कि सातवें वेतन आयोग में उनके हकों को मार दिया गया है।
राज्य सरकार ने उनकी समान वेतन भत्तों को केंद्र के समान न मानकर बहुत बडा अन्नाय किया है। जिसे पूरा कराना सभी कर्मचारियों सभी का कर्तव्य है। विजय बहादुर तोमर ने कहा कि एक जुटता के बल पर ही हम अपनी बातों को मनवा सकते हैं।
सभा की अध्यक्षता अशोक दुबे तथा संचालन प्रदीप सक्सेना ने किया। इस मौके पर राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अवनीश मिश्र, मो. सलीम, वीरेंद्र कुमार, अनिरुद्ध कुमार, राजीव धनगर, अरविंद धनगर, पुष्पा भदौरिया, महेंद्र प्रताप, ब्रजेंद्र धनगर, पूरन सिंह राजीव यादव, राम करन सिंह शाक्य, जमाल अहमद, अरुण पांडेय, राजीव वाल्मीकि आदि मौजूद रहे।
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हड़ताल के कारण विकास भवन, कचहरी व अन्य कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। कर्मचारी अपने कार्यालयों से बाहर निकलकर कचहरी स्थित वट वृक्ष के नीचे पहुंचे और सभा कर सरकार के खिलाफ विगुल फूंका। हड़ताल के दूसरे दिन राज्य कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि 23 फरवरी तक उनकी मांगे नहीं मानी गई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।
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कर्मचारियों ने कहा कि सरकार चार साल से उनकी उपेक्षा कर रही है। हड़ताल के दौरान किसी भी कर्मचारी का उत्पीड़न किया गया तो उसे सख्ती से निपटा जाएगा। 23 दिसंबर को कर्मचारियों की बैठक होगी। बैठक में सभी कर्मचारियों से बैठक में भाग लेने की अपील की गई।
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परिषद के जिला अध्यक्ष दिलीप मिश्रा ने कहा शीर्ष अधिकारियों की सहमत के बाद भी मांगों से संबंधित शासनादेश जारी नहीं किया गया। केंद्रीय कर्मचारियों की भांति वेतन भत्ते दिए जाएं व पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए। वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक द्विवेदी ने कहा कि सातवें वेतन आयोग में उनके हकों को मार दिया गया है।
राज्य सरकार ने उनकी समान वेतन भत्तों को केंद्र के समान न मानकर बहुत बडा अन्नाय किया है। जिसे पूरा कराना सभी कर्मचारियों सभी का कर्तव्य है। विजय बहादुर तोमर ने कहा कि एक जुटता के बल पर ही हम अपनी बातों को मनवा सकते हैं।
सभा की अध्यक्षता अशोक दुबे तथा संचालन प्रदीप सक्सेना ने किया। इस मौके पर राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अवनीश मिश्र, मो. सलीम, वीरेंद्र कुमार, अनिरुद्ध कुमार, राजीव धनगर, अरविंद धनगर, पुष्पा भदौरिया, महेंद्र प्रताप, ब्रजेंद्र धनगर, पूरन सिंह राजीव यादव, राम करन सिंह शाक्य, जमाल अहमद, अरुण पांडेय, राजीव वाल्मीकि आदि मौजूद रहे।