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Etawah News: खरपतवार ने रोका पानी का रास्ता, टेल के 50 गांवों में सिंचाई का संकट
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बकेवर। खरीफ सीजन के बीच बकेवर-महेवा क्षेत्र के रजबहों और माइनरों में उगी खरपतवार किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। पानी का प्रवाह बाधित होने से टेल के 50 गांवों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे धान की रोपाई प्रभावित हो रही है और किसानों को मजबूरन नलकूपों व निजी संसाधनों के सहारे सिंचाई करनी पड़ रही है।
क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग रजबहों और माइनरों की समय पर सफाई नहीं कराता। रबी सीजन में भी सीमित दूरी तक ही सफाई होती है, जबकि खरीफ फसल के दौरान सफाई नहीं होने से कुछ ही महीनों में खरपतवार और घास दोबारा उग आती है। इससे पानी का प्रवाह धीमा पड़ जाता है और टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता। भोगनीपुर निचली गंगानहर से बकेवर-महेवा क्षेत्र के लिए कुड़रिया, सुनवर्षा, महेवा सहित कई रजवाहे निकले हैं। इनके अलावा करीब 20 से अधिक माइनर क्षेत्र के गांवों की सिंचाई का प्रमुख आधार हैं। वर्तमान में कुड़रिया, सुनवर्सा, महेवा और विधीपुरा रजबहों के साथ ही बकेवर व नसीदीपुरा माइनरों में बड़ी मात्रा में खरपतवार उग आई है। इन रजबहों और माइनरों के टेल पर स्थित लुधियानी, भरईपुर, पटिया, इकघरा, नगला खादर, नसीदीपुर सहित करीब 50 गांवों में पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच रहा है। कई स्थानों पर कुलाबों से पानी निकलना भी बंद हो गया है। ऐसे में खेतों में पानी भरने के बाद होने वाली धान की रोपाई प्रभावित हो रही है।
किसान ध्यान सिंह यादव ने बताया कि कुड़रिया रजबहे में 15 दिन पहले पानी छोड़ा गया था, लेकिन चटोरपुर गांव के आगे तक पानी नहीं पहुंचा। रजबहे में उगी खरपतवार पानी के प्रवाह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
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नगला खादर निवासी किसान अरुण कुमार ने बताया कि बकेवर माइनर में पानी नहीं आने से किसानों के सामने धान की रोपाई का संकट खड़ा हो गया है। निजी संसाधनों से सिंचाई करने में अतिरिक्त खर्च हो रहा है।
वर्जन
सफाई के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्य नहीं कराया जा सका है। हालांकि जहां ज्यादा परेशानी है वहां संबंधित कर्मचारी को भेजकर समस्या का समाधान करवाने का प्रयास किया जाता है। - राकेश कुमार, एक्सईएन भोगनीपुर निचली गंगा नहर
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क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग रजबहों और माइनरों की समय पर सफाई नहीं कराता। रबी सीजन में भी सीमित दूरी तक ही सफाई होती है, जबकि खरीफ फसल के दौरान सफाई नहीं होने से कुछ ही महीनों में खरपतवार और घास दोबारा उग आती है। इससे पानी का प्रवाह धीमा पड़ जाता है और टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता। भोगनीपुर निचली गंगानहर से बकेवर-महेवा क्षेत्र के लिए कुड़रिया, सुनवर्षा, महेवा सहित कई रजवाहे निकले हैं। इनके अलावा करीब 20 से अधिक माइनर क्षेत्र के गांवों की सिंचाई का प्रमुख आधार हैं। वर्तमान में कुड़रिया, सुनवर्सा, महेवा और विधीपुरा रजबहों के साथ ही बकेवर व नसीदीपुरा माइनरों में बड़ी मात्रा में खरपतवार उग आई है। इन रजबहों और माइनरों के टेल पर स्थित लुधियानी, भरईपुर, पटिया, इकघरा, नगला खादर, नसीदीपुर सहित करीब 50 गांवों में पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच रहा है। कई स्थानों पर कुलाबों से पानी निकलना भी बंद हो गया है। ऐसे में खेतों में पानी भरने के बाद होने वाली धान की रोपाई प्रभावित हो रही है।
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किसान ध्यान सिंह यादव ने बताया कि कुड़रिया रजबहे में 15 दिन पहले पानी छोड़ा गया था, लेकिन चटोरपुर गांव के आगे तक पानी नहीं पहुंचा। रजबहे में उगी खरपतवार पानी के प्रवाह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
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नगला खादर निवासी किसान अरुण कुमार ने बताया कि बकेवर माइनर में पानी नहीं आने से किसानों के सामने धान की रोपाई का संकट खड़ा हो गया है। निजी संसाधनों से सिंचाई करने में अतिरिक्त खर्च हो रहा है।
वर्जन
सफाई के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्य नहीं कराया जा सका है। हालांकि जहां ज्यादा परेशानी है वहां संबंधित कर्मचारी को भेजकर समस्या का समाधान करवाने का प्रयास किया जाता है। - राकेश कुमार, एक्सईएन भोगनीपुर निचली गंगा नहर