{"_id":"62b4ad1fbc976b25c46d4adc","slug":"waterlogging-1-5-crore-expenditure-will-be-a-problem-again-as-it-is-etawah-news-knp7039391179","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलभराव: डेढ़ करोड़ खर्च फिर से समस्या रहेगी जस की तस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलभराव: डेढ़ करोड़ खर्च फिर से समस्या रहेगी जस की तस
विज्ञापन
नई मंडी रोड पर अंडरपास के आसपास भरा गंदा पानी। संवाद
- फोटो : ETAWAH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इटावा। नाले और नालियों के निर्माण पर नगर पालिका ने साल भर में डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर दिए लेकिन जलभराव वाले क्षेत्रों में ज्यादातर नाले और नालियां अधूरी पड़ी हैं। कई सड़कों पर तपती गर्मी में भी गंदा पानी भरा है। नगर पालिका पूरे साल में इन क्षेत्रों में जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर पाई है। कई नालों में अभी भी सिल्ट भरी है। पालिका प्रशासन की इस लापरवाही से इस बार फिर बड़ी आबादी को जलभराव की समस्या झेलनी पड़ेगी।
नगर पालिका के 14 वार्डों में हर साल बारिश में जलभराव होता है। पानी घरों तक भर जाता है। ज्यादातर बारिश होने पर लोगों के लिए घरों के बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। समस्या से निजात के लिए नगर पालिका ने शासन से पांच करोड़ रुपये मांगे थे लेकिन डेढ़ करोड़ ही मिले। इस धनराशि को नालियों और नालों पर खर्च करना बताया गया है लेकिन जलभराव वाले क्षेत्रों में ज्यादातर नाले टूटे पड़े हैं। नई मंडी के पास कानपुर आगरा हाईवे के अंडरपास के दोनों हमेशा जलभराव रहता है। घरों का गंदा पानी बंबे से होकर सड़क पर भरता है। यहां पानी को निकालने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
कुछ ऐसा ही हाल महेरा चुुंगी के आसपास आजाद नगर टीला, सुंदरपुर रेलवे क्रासिंग, विनीत विहार कालोनी आदि में भी है। जीएल नर्सिंग होम के सामने वाला नाला भी अधूरा पड़ा है। सुंदरपुर मोड पर नाले में दो बिजली के खंभे भी लगे हैं। सिविल लाइन इलाके में मैनपुरी क्रासिंग के किनारों पर गंदा पानी भरा रहता है।
विज्ञापन
14 पंप सेट से निकालेंगे पानी
नगर पालिका के मुख्य सफाई निरीक्षक ब्रह्मपाल सिंह का दावा है कि नालों की सफाई का 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जिन वाड़ोर् में जलभराव होता है वहां एक-एक पंप सेट लगा दिया गया है। जहां पानी के निकास की कोई सुविधा है नहीं है, वहां मशीन से पानी निकाला जाएगा।
विज्ञापन
नगर पालिका के 14 वार्डों में हर साल बारिश में जलभराव होता है। पानी घरों तक भर जाता है। ज्यादातर बारिश होने पर लोगों के लिए घरों के बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। समस्या से निजात के लिए नगर पालिका ने शासन से पांच करोड़ रुपये मांगे थे लेकिन डेढ़ करोड़ ही मिले। इस धनराशि को नालियों और नालों पर खर्च करना बताया गया है लेकिन जलभराव वाले क्षेत्रों में ज्यादातर नाले टूटे पड़े हैं। नई मंडी के पास कानपुर आगरा हाईवे के अंडरपास के दोनों हमेशा जलभराव रहता है। घरों का गंदा पानी बंबे से होकर सड़क पर भरता है। यहां पानी को निकालने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
विज्ञापन
कुछ ऐसा ही हाल महेरा चुुंगी के आसपास आजाद नगर टीला, सुंदरपुर रेलवे क्रासिंग, विनीत विहार कालोनी आदि में भी है। जीएल नर्सिंग होम के सामने वाला नाला भी अधूरा पड़ा है। सुंदरपुर मोड पर नाले में दो बिजली के खंभे भी लगे हैं। सिविल लाइन इलाके में मैनपुरी क्रासिंग के किनारों पर गंदा पानी भरा रहता है।
विज्ञापन
14 पंप सेट से निकालेंगे पानी
नगर पालिका के मुख्य सफाई निरीक्षक ब्रह्मपाल सिंह का दावा है कि नालों की सफाई का 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जिन वाड़ोर् में जलभराव होता है वहां एक-एक पंप सेट लगा दिया गया है। जहां पानी के निकास की कोई सुविधा है नहीं है, वहां मशीन से पानी निकाला जाएगा।

विनीत बिहार में अधूरा पड़ा नाला। संवाद- फोटो : ETAWAH