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‘जल ही जीवन है इसे न होने देंगे कम’
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Tue, 05 Apr 2016 01:12 AM IST
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पक्का तालाब प्राथमिक विद्यालय में जल संरक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेते जगदीश प्रसाद व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
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सामाजिक संस्था नेचर कंजर्वेशन एंड ह्यूमन वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में पक्का तालाब स्थित प्राथमिक विद्यालय में जल संरक्षण पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने शपथ लिया कि जल की बर्बादी नहीं होने देंगे। साथ ही नारा लगाया कि ‘जल ही जीवन है इसे न होने देंगे कम, जल का सही प्रयोग करेंगे हम।’ गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित पूर्व अध्यापक जगदीश प्रसाद सक्सेना ने कहा कि छात्र ही कल का भविष्य हैं। हम लोग छात्रों को जागरूक कर नए युग के निर्माण की आधारशिला रखने का प्रयास कर रहें हैं ताकि इनकी चेतना को जगाया जा सके।
आगे चल कर यह पर्यावरण संरक्षण व समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। समाजसेवी सोनिया ने कहा कि हम लोग बचपन में जो सीखते है, वही जीवन में अपनाते हैं। बच्चों का मन कोरे कागज की तरह होता है, यदि आज बच्चों के मन में जल के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ा दिया जाए तो वह जल की बर्बादी को कम करने में अच्छी भूमिका का निर्वाह कर सकते हैं। समाज सेवी निर्मल सिंह ने कहा कि भूजल का अत्याधिक दोहन चिंता का विषय है।
जब से सबमर्सिबल पंप का चलन बढ़ा है लोग आवश्यकता से अधिक भूजल की बर्बादी कर रहे हैं। इसकी वजह से प्रत्येक वर्ष लगभग एक फिट भूजल के स्तर में गिरावट आ रही हैं। तालाब, पोखर, झीलें सूखती जा रहीं हैं, कई जगह तो इनका अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। इसलिए पर्यावरण प्रबंधन समूहों का गठन किया जाना अति आवश्यक हो गया है।
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उन्होंने छात्रों के समूह का गठन करते हुए कहा कि यदि समय रहते हम छात्रों को पानी की बर्बादी रोकने के लिए तैयार कर लेंगे तो वह निश्चित रुप से अपने घरवालों व आस पड़ोस के लोगों को भी रोक सकनेे में सफल होंगे। विद्यालय की प्रधानाचार्य ब्रह्मा देवी ने हाथ धोकर खाना खाने की सीख दी और पानी की बर्बादी कम करने की बात कही। कार्यक्रम का संचालन ज्योति ने किया। इस अवसर पर संजय सक्सेना, सुषमा, बदरुल हसन व प्रिया आदि मौजूद रहीं।
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आगे चल कर यह पर्यावरण संरक्षण व समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। समाजसेवी सोनिया ने कहा कि हम लोग बचपन में जो सीखते है, वही जीवन में अपनाते हैं। बच्चों का मन कोरे कागज की तरह होता है, यदि आज बच्चों के मन में जल के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ा दिया जाए तो वह जल की बर्बादी को कम करने में अच्छी भूमिका का निर्वाह कर सकते हैं। समाज सेवी निर्मल सिंह ने कहा कि भूजल का अत्याधिक दोहन चिंता का विषय है।
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जब से सबमर्सिबल पंप का चलन बढ़ा है लोग आवश्यकता से अधिक भूजल की बर्बादी कर रहे हैं। इसकी वजह से प्रत्येक वर्ष लगभग एक फिट भूजल के स्तर में गिरावट आ रही हैं। तालाब, पोखर, झीलें सूखती जा रहीं हैं, कई जगह तो इनका अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। इसलिए पर्यावरण प्रबंधन समूहों का गठन किया जाना अति आवश्यक हो गया है।
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उन्होंने छात्रों के समूह का गठन करते हुए कहा कि यदि समय रहते हम छात्रों को पानी की बर्बादी रोकने के लिए तैयार कर लेंगे तो वह निश्चित रुप से अपने घरवालों व आस पड़ोस के लोगों को भी रोक सकनेे में सफल होंगे। विद्यालय की प्रधानाचार्य ब्रह्मा देवी ने हाथ धोकर खाना खाने की सीख दी और पानी की बर्बादी कम करने की बात कही। कार्यक्रम का संचालन ज्योति ने किया। इस अवसर पर संजय सक्सेना, सुषमा, बदरुल हसन व प्रिया आदि मौजूद रहीं।