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गोशाला में दो गोवंश मरे, चार बीमार
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फोटो संख्या 12 सैफई विकास खंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत शिवपुरी टिमरूआ के मजरा लाडमपुर मैं बनी गौशा?
- फोटो : ETAWHA
बसरेहर। सैफई विकास खंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत शिवपुरी टिमरूआ के मजरा लाडमपुर स्थित गोशाला में दो गोवंश की मौत हो गई। वहीं चार बीमार है। ग्राम प्रधान ने दोनों गोवंशों को मैदान में दफन करा दिया। गोवंशों को सूखा भूसा खिलाया जा रहा है। हरा चारा उपलब्ध नहीं होने से वह कमजोर व बीमार हो रहे हैं।
मजरा लाडमपुर स्थित गोशाला में 100 से अधिक गोवंश है, इनमें से चार हालत खराब है, कई बीमार है। बीमारों का चेकअप भी नहीं हो रहा है। कर्मचारी वीरेंद्र सिंह का कहना है सूखा भूसा खाने से गोवंश कमजोर हो रहे है। ठंड से बचाव के भी इंतजाम नहीं है। ग्राम प्रधान रामशंकर कठेरिया ने बताया सूखा भूसा खाने से गोवंश कमजोर हो गए है। ठंड की वजह से गोवंश की मौत हो गई। ठंड से बचाव के इंतजाम किए जाएंगे।
गोशाला में बंधी हैं भैंसें
जसवंतनगर। क्षेत्र के ग्राम नगला खुमान मौजा कैस्त में गोशाला शोपीस बनी हुई है। वहां पर गायों को प्रश्रय देने की बजाय भैंसों के रहने और निजी उपयोग का केंद्र बना दिया गया है। राज्य सरकार ने गोवंश को संरक्षण देने के लिए गोशालाएं बनाने के लिए लाखों का खर्च किया है। सरकार के जिम्मेदार अफसर सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने में जुटे हैं। नगला खुमान में जो गोशाला बनाई गई है। उसमें दो भैंस बंधी रहती हैं। फ़ाटक भी नहीं लगा है। बताते हैं कि बड़े अफसरों को इन कामों को देखने की फुर्सत नहीं है। (संवाद)
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मजरा लाडमपुर स्थित गोशाला में 100 से अधिक गोवंश है, इनमें से चार हालत खराब है, कई बीमार है। बीमारों का चेकअप भी नहीं हो रहा है। कर्मचारी वीरेंद्र सिंह का कहना है सूखा भूसा खाने से गोवंश कमजोर हो रहे है। ठंड से बचाव के भी इंतजाम नहीं है। ग्राम प्रधान रामशंकर कठेरिया ने बताया सूखा भूसा खाने से गोवंश कमजोर हो गए है। ठंड की वजह से गोवंश की मौत हो गई। ठंड से बचाव के इंतजाम किए जाएंगे।
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गोशाला में बंधी हैं भैंसें
जसवंतनगर। क्षेत्र के ग्राम नगला खुमान मौजा कैस्त में गोशाला शोपीस बनी हुई है। वहां पर गायों को प्रश्रय देने की बजाय भैंसों के रहने और निजी उपयोग का केंद्र बना दिया गया है। राज्य सरकार ने गोवंश को संरक्षण देने के लिए गोशालाएं बनाने के लिए लाखों का खर्च किया है। सरकार के जिम्मेदार अफसर सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने में जुटे हैं। नगला खुमान में जो गोशाला बनाई गई है। उसमें दो भैंस बंधी रहती हैं। फ़ाटक भी नहीं लगा है। बताते हैं कि बड़े अफसरों को इन कामों को देखने की फुर्सत नहीं है। (संवाद)
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