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Etawah News: लोकार्पण के ढाई साल बीते... सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीजों के भर्ती की सुविधा नहीं

Tue, 06 Oct 2026 11:25 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा Updated Tue, 06 Oct 2026 11:25 PM IST
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Two and a half years since inauguration... no facility for patient admissions at the super-specialty hospital.
फोटो 17::::500 बेड अस्पताल में सीटी स्कैन के लिए अपने मरीज को स्ट्रेचर पर लाए तीमारदार। संवाद
सैफई। मुख्यमंत्री के लोकार्पण करने के ढाई साल बाद भी आयुर्विज्ञान विवि के 500 बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीजों की भर्ती शुरू नहीं हो सकी है। ओपीडी सेवा भी लोकार्पण के करीब 10 माह बाद शुरू हो सकी थी। अब आईपीडी (भर्ती की व्यवस्था) शुरू करने के लिए जरूरी स्टाफ की भर्ती, उपकरण-सामग्री की खरीद और टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से मामला अटका है। इसका खामियाजा मरीजों और तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि विवि प्रबंधन का दावा है कि जल्द ही स्टाफ की भर्ती करके मरीजों को भर्ती कर उपचार मुहैया कराया जाएगा।
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2017 में अखिलेश यादव की सरकार में आयुर्विज्ञान विवि में ही 500 बेड सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनवाने के प्रस्ताव पर मोहर लगी थी। इसके बाद अस्पताल का निर्माण भी शुरू हो गया था, लेकिन 2017 में ही सरकार जाने के बाद नई भाजपा सरकार में अस्पताल के बजट को संशोधित कराया गया था, पर लंबे समय तक बजट न मिलने की वजह से काम देरी से शुरू हो पाया था। 2024 में निर्माण निगम की ओर से भवन हैंडओवर किया गया था।
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इसके बाद मार्च 2024 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अस्पताल का लोकार्पण किया था। उन्होंने जल्द ही अस्पताल में ओपीडी और आईपीडी शुरू कराने का आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी ओपीडी की सेवा जनवरी 2025 में हो सकी थी। वहीं अभी तक आईपीडी के सेवा शुरू नहीं हो सकी है।
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500 बेड की नई बिल्डिंग में ओपीडी संचालित हो रही है, जबकि भर्ती मरीजों के लिए अभी पुराने भवन पर ही निर्भरता है। इससे जांच और विशेषज्ञों से परामर्श के लिए मरीजों को इधर-उधर ले जाना पड़ता है। मसलन, पुराने भवन में भर्ती मरीज को सीटी स्कैन के लिए करीब एक किमी दूर नई बिल्डिंग तक ले जाना पड़ता है। गंभीर मरीजों के लिए यह दूरी खासा मुश्किल पैदा करती है। यही स्थिति डॉक्टर की सलाह लेने में भी सामने आती है।
भर्ती मरीज को किसी विशेषज्ञ की राय चाहिए और डॉक्टर नई बिल्डिंग की ओपीडी में उपलब्ध है तो तीमारदार को मरीज से जुड़े कागजात लेकर करीब एक किमी दूर जाना पड़ता है। डॉक्टर से मिलने और फिर वापस लौटने में समय लगता है, जबकि मरीज पुरानी बिल्डिंग में भर्ती रहता है।
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टेंडर और भर्ती पूरी न होने से अड़चन
आईपीडी संचालन के लिए जरूरी व्यवस्थाओं को पूरा करने में टेंडर प्रक्रिया और मानव संसाधन की कमी प्रमुख अड़चन है। 500 बेड के अनुरूप डॉक्टर, पैरामेडिकल और अन्य स्टाफ की पर्याप्त तैनाती के साथ जरूरी सामग्री और सेवाओं की खरीद भी पूरी होनी है। संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही भर्ती सेवा शुरू हो सकेगी।
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दावे होते रहे, तारीख अभी तय नहीं
लोकार्पण के बाद से अस्पताल की सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की बात कही जाती रही है। ओपीडी शुरू हो चुकी है, लेकिन आईपीडी के लिए अभी भी इंतजार है। विवि के प्रवक्ता प्रो. सोमेंद्र पाल ने बताया कि आवश्यक प्रक्रियाएं चल रही हैं। हालांकि भर्ती सेवा किस निश्चित तारीख से शुरू होगी, इस पर अभी स्पष्ट समय सीमा सामने नहीं आई है। ऐसे में 500 बेड के अस्पताल की पूरी क्षमता का लाभ मरीजों को कब मिलेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
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नई बिल्डिंग में भर्ती व्यवस्था हो शुरू
इकदिल की रूबी ने बताया कि वह लोग परिवार के साथ लंबे समय से राजस्थान के गंगानगर में रह रहे थे। उनके मामा की कुछ दिनों से तबीयत खराब थी। वह उन्होंने दिखाने के लिए आयुर्विज्ञान विवि तीन दिन पहले आई थीं। यहां उन्हें भर्ती कर लिया था। अब जांचें कराने के लिए बार-बार नई बिल्डिंग में आना पड़ता है। भागदौड़ से ही परेशान हैं। उन्हें लीवर की दिक्कत बताई है।
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मैनपुरी निवासी राजीव पांडेय ने बताया है कि मेरी माता जी मुन्नी देवी का बीते दिनों हार्ट का ऑपरेशन कराया था। अब हालत खराब होने पर कभी इमरजेंसी में भर्ती करा दिया जाता है, लेकिन ईको आदि जांचें कराने के लिए 500 बेड वाली बिल्डिंग में जाना पड़ता है। भागदौड़ के बीच इलाज कराना मुश्किल हो जाता है। यदि 500 बेड में ही भर्ती की व्यवस्था शुरू हो जाए तो राहत मिल जाएगी।
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तकनीकी कारणों की वजह से कुछ टेंडर निरस्त करने पड़े थे। दोबारा टेंडर प्रक्रिया कराई जा रही है। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया को भी तेजी के साथ किया जा रहा है। जल्द ही 500 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने की सुविधा शुरू करवा दी जाएगी। अस्पताल शुरू होते ही मरीजों की सुविधाएं बढ़ जाएंगी। एक से दूसरी बिल्डिंग जाने के लिए निशुल्क ई-रिक्शा और एंबुलेंस की व्यवस्था है।

- प्रो. डॉ. अजय सिंह कुलपति आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई

फोटो 17::::500 बेड अस्पताल में सीटी स्कैन के लिए अपने मरीज को स्ट्रेचर पर लाए तीमारदार। संवाद

फोटो 17::::500 बेड अस्पताल में सीटी स्कैन के लिए अपने मरीज को स्ट्रेचर पर लाए तीमारदार। संवाद

फोटो 17::::500 बेड अस्पताल में सीटी स्कैन के लिए अपने मरीज को स्ट्रेचर पर लाए तीमारदार। संवाद

फोटो 17::::500 बेड अस्पताल में सीटी स्कैन के लिए अपने मरीज को स्ट्रेचर पर लाए तीमारदार। संवाद

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