फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   treatment in nursing home means heavy expense

पहले दहशत भरते फिर करते मोटी कमाई

Thu, 15 Jan 2015 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Thu, 15 Jan 2015 11:53 PM IST
विज्ञापन
treatment in nursing home means heavy expense

शहर के देवेश कुमार ने बताया कि पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो वह सरकारी अस्पताल ले गए। एक स्टाफ ने बाहर ले जाने की बात कहकर चलता कर दिया। इसके बाद पत्नी को लेकर शहर के एक बडे़ नर्सिंगहोम में पहुंचा। डाक्टर ने सबसे पहले अल्ट्रासाउंड कराया। इसके बाद खून की जांच।

विज्ञापन


फिर बच्चा उल्टा बताकर आपरेशन को कह दिया। डाक्टरों की बातें सुनकर पूरा परिवार आपरेशन को तैयार हो गया। तत्काल दस हजार रुपये जमा कराए गए। डेढ़ घंटे बाद शाम सात बजे आपरेशन का समय दिया गया। बेहोशी वाले डॉक्टर ने रात डेढ़ बजे का समय दिया।
विज्ञापन


ऐसे में आपरेशन टल गया। महिला डॉक्टर घर चली गईं तो नर्सिंग होम के स्टाफ ने नार्मल डिलीवरी करने की बात कही। इसके एवज में उनकी कुछ डिमांड थी। हम तैयार हो गए। रात साढ़े नौ बजे डाक्टर के आने से पहले ही नर्सों ने मिलकर नार्मल डिलीवरी कर दी। पत्नी को एक बेटी हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकारी अस्पतालों में सीजर केस कम होने का सबसे बड़ा कारण वहां नर्सिंग होम के एंजेटों का जाल होना है। ये एजेंट जैसे ही किसी गर्भवती को देखते हैं, सक्रिय हो जाते हैं। अस्पताल की बदहाली और दवाएं न मिलने का झांसा देकर मरीज के परिजनों को भयभीत कर दिया जाता है।

तब एजेंट उन्हें नर्सिंगहोम जाने की सलाह देते हैं। एक बार तीमारदार ने पूछा लिया कि अच्छा नर्सिंग होम कौन सा है इसके बाद वह उनका शिकार बन जाता है। चिकित्सा विज्ञान से अनभिज्ञ भोले-भाले लोग यह नहीं जान पाते कि जिन्हें वह देवदूत समझ रहे हैं असल में वह उनकी जेब काटने वाले हैं।

गुरुवार 15 जनवरी के अंक में हमने बताया था कि किस तरह नर्सिंग होम सीजर केसों के जरिए अंधी कमाई कर रहे हैं। इसे साबित करने के लिए सरकारी अस्पताल और नर्सिंग होम में नार्मल और सीजर केस के आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए थे। आज हम यह बताएंगे कि किस तरह नर्सिंग होम उनसे मोटी कमाई करते हैं।

नर्सिंग होम में गर्भवती महिला के आने के बाद सबसे पहले तो एक निश्चित एमाउंट जमा कराया जाता है। इसके बाद तमाम सारी जंाचें और दवाएं लिख दी जाती हैं। पैथालाजिकल जांच, अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नर्सिंग होम में ही होती है। स्वाभाविक है कि लोग इधर-उधर जाने के बजाय नर्सिंग होम में ही जांच करा लेते है।

नर्सिंग होम में यह जरूरी नहीं होता कि पैथालाजी पर जांच करने वाला डिग्रीधारक ही हो। नर्सिंग होम के डॉक्टर जो दवाएं लिखते हैं वो नर्सिंग होम के मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं। इन दवाआें पर 30 से 40 फीसदी तक का कमीशन होता है।

कैंपस में चल रही पैथालॉजी, अल्ट्रासाउंड, मेडिकल स्टोर पर डाक्टर का ही पूरा होल्ड होता है। अगर जान लिया गया कि मरीज खर्च कर सकता है तो सीजर केस करने में कतई नहीं हिचकते। सरकारी अस्पतालों में सवा सौ से अधिक डॉक्टरों की कमी है। सीएचसी और पीएचसी में प्रसूति रोग विशेषज्ञों के पद खाली पडे हैं। जो डाक्टर है भी उनका मौके पर मिलना आसान नहीं है।

रेट लिस्ट तक नहीं
जिले के ज्यादातर नर्सिंग होम पर रेट लिस्ट तक नहीं है। जबकि लाइसेंस की शर्त में लिस्ट लगाना अनिवार्य बताया गया है। मरीजों से चेहरा देखकर बिल बनाया जाता है। कभी-कभी तो सीजर केस के बाद नवजात शिशु को मशीन में रख दिया जाता है। कई बार ऐसा बिल बढ़ाने के लिए किया जाता है। सीजर के बाद यदि शिशु मशीन में पहुंच गया तो बिल 50 हजार के ऊपर पहुंच जाता है।

अल्ट्रासाउंड से खतरा
नर्सिंग होम के डॉक्टरों के  द्वारा प्रेग्नेंसी पीरिएड में कई बार अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। जानकारों के मुताबिक अल्ट्रासाउंड मशीन में रेडिएशन होता है जो आम आदमी के लिए खतरनाक है।


हालत बिगड़ने पर करते रेफर
वैसे तो नर्सिंग होम संचालकों के द्वारा मरीजों को हर प्रकार की सुविधाएं देने का वादा किया जाता है, लेकिन जब गर्भवती की हालत बिगड़ती है तो हाथ खड़े कर देते है। मरीज को जिला अस्पताल या पीजीआई सैफई के लिए रेफर कर दिया जाता है। रिकार्ड देखा जाए तो जिला अस्पताल में प्रति माह ऐसे कई केस पहुंचते हैं जो नर्सिंग होम में बिगड़े होते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed