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बस की सवारी, जान पर भारी
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Tue, 23 Dec 2014 12:03 AM IST
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कोहरे के बीच रोडवेज बसों में यात्रा खतरे से खाली नहीं है। इटावा डिपो के अलावा कई अन्य रीजन के बसों पर अभी फॉग लाइट नहीं लगाईं गई हैं। कई बसों में तो वाइपर तक नहीं हैं। ऐसे में जहां चालकों को बस चलाने में परेशानी उठानी पड़ती है वहीं हादसों का अंदेशा बना रहता है।
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सर्दी अपने चरम पर है। जबरदस्त कोहरा पड़ रहा है। कोहरे के कारण हाइवे पर दस फीट दृश्यता तक नहीं रहती। ढलते ही कोहरा गिरना शुरू हो जाता है जो अगले दिन दोपहर तक छाया रहता है। ऐेसे में सड़क पर वाहन कैसे चलते है यह किसी चौपहिया वाहन के चालक से पूछिए।
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गाड़ियों में सामान्यता लगीं हेडलाइट्स कोहरे में काम नहीं करतीं। इसके लिए अलग से फाग लाइट लगवाईं जाती हैं। लगता है रोडवेज प्रशासन इससे अनजान है। रीजन के डिपो इटावा, मैनपुरी, औरैया, फर्रुखाबाद, बेवर, शिकोहाबाद आदि से संचालित होने वाली अधिकतर रोडवेज बसों में अभी तक फॉग लाइटें नहीं लगवाई गई हैं।
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बस चालकों का कहना है कि कोहरे में गाड़ी चलाना बेहद रिस्की होता है। फॉग लाइट की व्यवस्था अफसरों की जिम्मेदारी है। लंबी दूरी की बसों में भी अभी तक फॉग लाइटें नहीं लगी हैं। स्टोर से डिमांड की तो आश्वासन मिला है कि जल्द ही फॉग लाइट बस में लगवा दी जाएगी।
महज 400 की आती है लाइट
बसों में लगने वाली फॉग लाइट की कीमत करीब चार सौ रुपये के आसपास होती है। चार सौ रुपये की फॉग लाइट बस में न लगाकर यात्रियों की सुरक्षा का रिस्क लिया जा रहा है। खुद अफसर स्वीकार कर रहे हैं कि फॉग लाइटें और पीला बल्ब स्टोर में पर्याप्त मात्रा में है। कोहरे को चीरने के लिए पीली रोशनी की जरूरत होती है। इसीलिए फॉग लाइट पीली रंग की बनाई जाती हैं जो कोहरे को आसानी से चीर सकती हैं।
अफसर बोले, लग रही हैं लाइटें
रोडवेज अफसरों ने बताया कि अभियान चलाकर फॉग लाइटें लगाने का काम किया जा रहा है। शुरुआत में लंबी दूरी की बसों में एक फॉग लाइट तथा एक पीला बल्ब लगाया जा रहा है। इसके बाद लोकल में चलने वाली गाड़ियों में यह व्यवस्था कराई जाएगी।
बसों में वाइपर तक नहीं
कुछ बसों को छोडृ दिया जाए तो रीजन की कई बसों में वाइपर भी नहीं है। ऐसे में कोहरे के शीशे पर जमा हो जाने से चालक को देखने में परेशानी होती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। मजबूरी में चालक को बीच-बीच में बस रोककर कपड़ा या फिर कागज से शीशा साफ करना पड़ता है।