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Etawah News: आज शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की छटा के बीच गूंजेंगे भक्ति के स्वर
Sun, 25 Oct 2026 12:35 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:35 AM IST
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इटावा। शरद पूर्णिमा का पर्व रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर घरों और मंदिरों में मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाएगी। रात में खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा निभाई जाएगी। मान्यता है कि पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में अमृततुल्य गुण होते हैं। इसी विश्वास के चलते श्रद्धालु रातभर खीर को चांदनी में रखकर अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्तूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्तूबर को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय शाम 4:47 बजे होगा। शाम 7:22 बजे तक रेवती नक्षत्र रहेगा, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र लग जाएगा। पूर्णिमा पर हर्षण योग के बाद वज्र योग रहेगा।
उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा को कौमुदी पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी रात गोपियों के साथ महारास रचाया था। वहीं, समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी के प्रकट होने की मान्यता के चलते इस दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना के साथ मां लक्ष्मी की आराधना करेंगे।
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आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्तूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्तूबर को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय शाम 4:47 बजे होगा। शाम 7:22 बजे तक रेवती नक्षत्र रहेगा, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र लग जाएगा। पूर्णिमा पर हर्षण योग के बाद वज्र योग रहेगा।
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उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा को कौमुदी पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी रात गोपियों के साथ महारास रचाया था। वहीं, समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी के प्रकट होने की मान्यता के चलते इस दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना के साथ मां लक्ष्मी की आराधना करेंगे।
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