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अल्लाह पर भरोसा करने वाले पहुंचते हैं बुलंद मंजिल तक : मौलाना
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फोटो: 36 मजलिस में तकरीर करते मौलाना अनवारुल हसन जैदी। स्रोत आयोजक
अल्लाह पर भरोसा करने वाले पहुंचते हैं बुलंद मंजिल तक : मौलाना क्रासर
मरहूमा रियाज फातिमा की बरसी पर मस्जिद पंजतनी में हुआ मजलिस का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। मरहूमा रियाय फातिमा निवासी कोठी मोहसिनुल मुल्क सराये शेखकी बरसी की मजलिस मस्जिद पंजतनी में जुमे की नमाज के बाद हुई।
गुलामुस सैयदेन व अंदलीब की ओर से आयोजित मजलिस में तकरीर करते हुए मौलाना अनवारुल हसन जैदी ने कहा कि जो अल्लाह पर भरोसा करता है वह बुलन्द मंजिल तक पहुंचता है। नवें इमाम मोहम्मद तकी फरमाते हैं कि बुरे इंसानों की सोहबत से बचो, समाज मे बुराई पैदा करने वालों से दूर रहो, मोमिन को अल्लाह की तौफीक से फिक्रमंद होना चाहिए, नसीहत करने वाले की बात कुबूल करना चाहिए। औलाद की परवरिश में मां का अहम किरदार होता है इसीलिए अल्लाह ने मां को बड़ा मर्तबा दिया। अल्लाह ने मां के कदमों को जन्नत करार दिया। इमाम हुसैन की मां अपने बेटों को इतना चाहिती हैं कि जहां इमाम हुसैन की मजलिस होती है वो वहां आ जाती हैं। उन्होंने कहा मरहूमा रियाज फातिमा सिर्फ एक मां ही नही थीं बल्कि वह एहलेबैत की जाकिरा भी थीं।
मजलिस में अल्हाज कमर अब्बास नकवी, हाजी अरशद मरगूब, सलीम रजा, मो. अब्बास, शावेज नकवी, तनवीर हसन, समर अब्बास, अख्तर अब्बास, हसन अब्बास, अली साबिर, इबाद रिजवी, अयाज हुसैन, मो. जुनैद, जहूर नकवी, तहसीन र सहित बड़ी संख्या में लोग सामिल रहे।
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अल्लाह पर भरोसा करने वाले पहुंचते हैं बुलंद मंजिल तक : मौलाना क्रासर
मरहूमा रियाज फातिमा की बरसी पर मस्जिद पंजतनी में हुआ मजलिस का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। मरहूमा रियाय फातिमा निवासी कोठी मोहसिनुल मुल्क सराये शेखकी बरसी की मजलिस मस्जिद पंजतनी में जुमे की नमाज के बाद हुई।
गुलामुस सैयदेन व अंदलीब की ओर से आयोजित मजलिस में तकरीर करते हुए मौलाना अनवारुल हसन जैदी ने कहा कि जो अल्लाह पर भरोसा करता है वह बुलन्द मंजिल तक पहुंचता है। नवें इमाम मोहम्मद तकी फरमाते हैं कि बुरे इंसानों की सोहबत से बचो, समाज मे बुराई पैदा करने वालों से दूर रहो, मोमिन को अल्लाह की तौफीक से फिक्रमंद होना चाहिए, नसीहत करने वाले की बात कुबूल करना चाहिए। औलाद की परवरिश में मां का अहम किरदार होता है इसीलिए अल्लाह ने मां को बड़ा मर्तबा दिया। अल्लाह ने मां के कदमों को जन्नत करार दिया। इमाम हुसैन की मां अपने बेटों को इतना चाहिती हैं कि जहां इमाम हुसैन की मजलिस होती है वो वहां आ जाती हैं। उन्होंने कहा मरहूमा रियाज फातिमा सिर्फ एक मां ही नही थीं बल्कि वह एहलेबैत की जाकिरा भी थीं।
मजलिस में अल्हाज कमर अब्बास नकवी, हाजी अरशद मरगूब, सलीम रजा, मो. अब्बास, शावेज नकवी, तनवीर हसन, समर अब्बास, अख्तर अब्बास, हसन अब्बास, अली साबिर, इबाद रिजवी, अयाज हुसैन, मो. जुनैद, जहूर नकवी, तहसीन र सहित बड़ी संख्या में लोग सामिल रहे।
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