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Etawah News: खाद के लिए हाहाकार, बोआई के वक्त किसानों पर दोहरी मार
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फोटो 10:: सतेंद्र यादव।
= सुबह सात बजे से लग रहीं कतारें, तीन घंटे में खत्म हो रहीं 300 बोरी डीएपी
= जिले में 5985 एमटी खाद उपलब्ध होने का दावा, कई समितियों पर किल्लत
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिले में खाद की किल्लत किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई है। बोआई के अंतिम समय पर सहकारी समितियों पर खाद के लिए मारामारी है। सुबह से कतार में लगने के बावजूद किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
बकेवर में मंगलवार को 300 बोरी खाद कुछ ही घंटों में खत्म हो गई, जबकि निवाड़ीकला क्षेत्र की दो समितियों पर कई दिनों से डीएपी नहीं है। उदी में भी खाद न मिलने से किसानों को लौटना पड़ा। दूसरी ओर, विभाग जिले में 5985 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध होने और 51 सहकारी समितियों पर पर्याप्त खाद होने का दावा कर रहा है। ऐसे में सवाल है कि उपलब्धता के बावजूद किसानों को खाद क्यों नहीं मिल रही है।
जिले में सरसों की बोआई तेजी से चल रही है। अगले महीने से आलू की बोआई भी शुरू हो जाएगी। दोनों फसलों के लिए खाद की जरूरत के बीच आपूर्ति की कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है। समय पर डीएपी नहीं मिलने से बोआई में देरी की आशंका है। किसान खाद के लिए समितियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन मांग के मुकाबले कम आपूर्ति के कारण सभी को खाद नहीं मिल पा रही है।
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केस-एक
300 बोरी के लिए लगी कतार, सौ से अधिक किसान लौटे
बकेवर। सहकारी समिति पर मंगलवार को डीएपी की 300 बोरियां वितरित की गईं। सुबह सात बजे से ही किसान लाइन में लग गए। भीड़ बढ़ने पर पुलिस बल बुलाना पड़ा। शाम चार बजे तक पूरी खाद बंट गई, लेकिन सौ से अधिक किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा। कई किसान लंबी कतार देखकर ही वापस चले गए। (संवाद)
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केस-दो
दो समितियों पर कई दिन से डीएपी नहीं
निवाड़ीकला। बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समिति अहेरीपुर और उरेंग पर कई दिनों से डीएपी नहीं है। इससे 50 से अधिक गांवों के किसानों को निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। निवाड़ीकला, निवाड़ीखुर्द, खितौरा, नौगवां, नगला भदोरिया, दांदरपुर, अहेरीपुर, पेवली और कुशगवां समेत कई गांवों के किसान परेशान हैं। अहेरीपुर समिति के सचिव दुर्गपाल ने बताया कि समिति पर यूरिया उपलब्ध है, लेकिन डीएपी नहीं है। उन्होंने खाद रखने के लिए जगह की समस्या भी बताई। (संवाद)
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केस-तीन
कामेत समिति से बिना खाद लौटे किसान
उदी। बढ़पुरा ब्लाॅक की साधन सहकारी समिति लिमिटेड कामेत पर मंगलवार को भी खाद का वितरण नहीं हुआ। डीएपी लेने पहुंचे किसानों को निराश होकर लौटना पड़ा। समिति के सचिव आशीष कुमार ने बताया कि मंगलवार को दोपहर दो बजे खाद आई है, बुधवार से खाद वितरण शुरू किया जाएगा। (संवाद)
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केस-चार
जसवंतनगर में तीन घंटे में खत्म हो रही खाद
जसवंतनगर। ब्लॉक की आठ सहकारी समितियों पर मांग के मुकाबले कम खाद पहुंच रही है। एक केंद्र पर करीब 300 बोरी खाद आती है, जो तीन घंटे में खत्म हो जाती है। इससे बाद में पहुंचने वाले किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। नगला इच्छा समेत क्षेत्र के किसानों ने आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है। उन्हें आशंका है कि खाद की कमी बनी रही तो आलू की बुआई के समय संकट और गहरा जाएगा। (संवाद)
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किसानों की बात
सरसों की बोआई के लिए नहीं मिल रही डीपीए
टिटावली समिति पर खाद लेने पहुंचे ग्राम अर्रुपुरा निवासी किसान सतेंद्र यादव ने बताया कि सरसों की बोआई के लिए खेत तैयार है, लेकिन डीएपी खाद नहीं मिल रही है। अगर समय पर खाद नहीं मिली तो बुवाई प्रभावित होगी और खेत खाली रह जाएगा।
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हर दिन खाली हाथ लौटना पड़ता है
बकेवर समिति पर खाद लेने पहुंचे घुघसीना निवासी किसान सनोज कुमार ने बताया कि पांच बोरी खाद लेने के लिए वह शुक्रवार से रोज सुबह समिति पहुंचकर लाइन में लग रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद खाद नहीं मिल पा रही है। हर दिन उम्मीद लेकर आते हैं और खाली हाथ लौटना पड़ता है।
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समिति में लटका रहता है ताला
कामेत सहकारी समिति पर खाद लेने पहुंचे अड्डा निवासी किसान पुष्पेंद्र ने बताया कि वह सोमवार को खाद मिलने की उम्मीद लेकर समिति पहुंचे थे, लेकिन वहां ताला लटका मिला। खाद की जरूरत होने के बावजूद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
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खाद के लिए तीन दिन से लगा रहे चक्कर
जसवंतनगर के ग्राम नगला इच्छा निवासी किसान राधेश्याम ने बताया कि वह खाद के लिए तीन दिन से समिति के चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें रोज टालकर वापस भेज दिया जाता है। हालत यह है कि उनके कागजात तक जमा नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि खाद के लिए आखिर कहां जाएं।
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वर्जन
जिले की सभी 51 समितियों पर खाद की उपलब्धता है, कभी-कभी ऐसा हो जाता है कि दिनभर खाद बांटी गई और शाम को खत्म हो गई। फिर आने में एक दिन का समय लग जाता है। जिले में खाद की किल्लत नहीं है, किसान निर्धारित मानकों के अनुरूप खाद ले जाएं। - कमलेश वर्मा, एआर कॉपरेटिव
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= जिले में 5985 एमटी खाद उपलब्ध होने का दावा, कई समितियों पर किल्लत
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिले में खाद की किल्लत किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई है। बोआई के अंतिम समय पर सहकारी समितियों पर खाद के लिए मारामारी है। सुबह से कतार में लगने के बावजूद किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
बकेवर में मंगलवार को 300 बोरी खाद कुछ ही घंटों में खत्म हो गई, जबकि निवाड़ीकला क्षेत्र की दो समितियों पर कई दिनों से डीएपी नहीं है। उदी में भी खाद न मिलने से किसानों को लौटना पड़ा। दूसरी ओर, विभाग जिले में 5985 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध होने और 51 सहकारी समितियों पर पर्याप्त खाद होने का दावा कर रहा है। ऐसे में सवाल है कि उपलब्धता के बावजूद किसानों को खाद क्यों नहीं मिल रही है।
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जिले में सरसों की बोआई तेजी से चल रही है। अगले महीने से आलू की बोआई भी शुरू हो जाएगी। दोनों फसलों के लिए खाद की जरूरत के बीच आपूर्ति की कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है। समय पर डीएपी नहीं मिलने से बोआई में देरी की आशंका है। किसान खाद के लिए समितियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन मांग के मुकाबले कम आपूर्ति के कारण सभी को खाद नहीं मिल पा रही है।
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300 बोरी के लिए लगी कतार, सौ से अधिक किसान लौटे
बकेवर। सहकारी समिति पर मंगलवार को डीएपी की 300 बोरियां वितरित की गईं। सुबह सात बजे से ही किसान लाइन में लग गए। भीड़ बढ़ने पर पुलिस बल बुलाना पड़ा। शाम चार बजे तक पूरी खाद बंट गई, लेकिन सौ से अधिक किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा। कई किसान लंबी कतार देखकर ही वापस चले गए। (संवाद)
केस-दो
दो समितियों पर कई दिन से डीएपी नहीं
निवाड़ीकला। बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समिति अहेरीपुर और उरेंग पर कई दिनों से डीएपी नहीं है। इससे 50 से अधिक गांवों के किसानों को निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। निवाड़ीकला, निवाड़ीखुर्द, खितौरा, नौगवां, नगला भदोरिया, दांदरपुर, अहेरीपुर, पेवली और कुशगवां समेत कई गांवों के किसान परेशान हैं। अहेरीपुर समिति के सचिव दुर्गपाल ने बताया कि समिति पर यूरिया उपलब्ध है, लेकिन डीएपी नहीं है। उन्होंने खाद रखने के लिए जगह की समस्या भी बताई। (संवाद)
केस-तीन
कामेत समिति से बिना खाद लौटे किसान
उदी। बढ़पुरा ब्लाॅक की साधन सहकारी समिति लिमिटेड कामेत पर मंगलवार को भी खाद का वितरण नहीं हुआ। डीएपी लेने पहुंचे किसानों को निराश होकर लौटना पड़ा। समिति के सचिव आशीष कुमार ने बताया कि मंगलवार को दोपहर दो बजे खाद आई है, बुधवार से खाद वितरण शुरू किया जाएगा। (संवाद)
केस-चार
जसवंतनगर में तीन घंटे में खत्म हो रही खाद
जसवंतनगर। ब्लॉक की आठ सहकारी समितियों पर मांग के मुकाबले कम खाद पहुंच रही है। एक केंद्र पर करीब 300 बोरी खाद आती है, जो तीन घंटे में खत्म हो जाती है। इससे बाद में पहुंचने वाले किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। नगला इच्छा समेत क्षेत्र के किसानों ने आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है। उन्हें आशंका है कि खाद की कमी बनी रही तो आलू की बुआई के समय संकट और गहरा जाएगा। (संवाद)
किसानों की बात
सरसों की बोआई के लिए नहीं मिल रही डीपीए
टिटावली समिति पर खाद लेने पहुंचे ग्राम अर्रुपुरा निवासी किसान सतेंद्र यादव ने बताया कि सरसों की बोआई के लिए खेत तैयार है, लेकिन डीएपी खाद नहीं मिल रही है। अगर समय पर खाद नहीं मिली तो बुवाई प्रभावित होगी और खेत खाली रह जाएगा।
हर दिन खाली हाथ लौटना पड़ता है
बकेवर समिति पर खाद लेने पहुंचे घुघसीना निवासी किसान सनोज कुमार ने बताया कि पांच बोरी खाद लेने के लिए वह शुक्रवार से रोज सुबह समिति पहुंचकर लाइन में लग रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद खाद नहीं मिल पा रही है। हर दिन उम्मीद लेकर आते हैं और खाली हाथ लौटना पड़ता है।
समिति में लटका रहता है ताला
कामेत सहकारी समिति पर खाद लेने पहुंचे अड्डा निवासी किसान पुष्पेंद्र ने बताया कि वह सोमवार को खाद मिलने की उम्मीद लेकर समिति पहुंचे थे, लेकिन वहां ताला लटका मिला। खाद की जरूरत होने के बावजूद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
खाद के लिए तीन दिन से लगा रहे चक्कर
जसवंतनगर के ग्राम नगला इच्छा निवासी किसान राधेश्याम ने बताया कि वह खाद के लिए तीन दिन से समिति के चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें रोज टालकर वापस भेज दिया जाता है। हालत यह है कि उनके कागजात तक जमा नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि खाद के लिए आखिर कहां जाएं।
वर्जन
जिले की सभी 51 समितियों पर खाद की उपलब्धता है, कभी-कभी ऐसा हो जाता है कि दिनभर खाद बांटी गई और शाम को खत्म हो गई। फिर आने में एक दिन का समय लग जाता है। जिले में खाद की किल्लत नहीं है, किसान निर्धारित मानकों के अनुरूप खाद ले जाएं। - कमलेश वर्मा, एआर कॉपरेटिव

फोटो 10:: सतेंद्र यादव।

फोटो 10:: सतेंद्र यादव।

फोटो 10:: सतेंद्र यादव।

फोटो 10:: सतेंद्र यादव।

फोटो 10:: सतेंद्र यादव।

फोटो 10:: सतेंद्र यादव।

फोटो 10:: सतेंद्र यादव।