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Etawah News: कूटरचित दस्तावेज बनाने की आरोपी महिला की जमानत खारिज
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= सोलर कारोबार से जुड़े मामले में 22.13 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप
= पति की जमानत भी हो चुकी है निरस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। सोलर पावर जनरेटिंग सिस्टम और इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार से जुड़े 22.13 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-एक ने आरोपी महिला दीपिका गुप्ता की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने केस डायरी में दर्ज तथ्यों और कथित कूटरचित बिलों व दस्तावेजों से जुड़े आरोपों को मामले में गंभीर माना है। इस प्रकरण में महिला के पति प्रवीण कुमार गुप्ता भी आरोपी हैं, जिनकी जमानत पहले ही निरस्त हो चुकी है।
अपर सत्र न्यायाधीश ने सोमवार को को जमानत प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता राकेश कुमार त्रिपाठी ने अपने घर और दुकान पर सोलर पावर जनरेटिंग सिस्टम लगवाने के लिए प्रवीण कुमार गुप्ता की फर्म यूकावा इंडस्ट्रीज से संपर्क किया था। इसी दौरान दोनों के बीच जान-पहचान हो गई थी। आरोप है कि प्रवीण ने इलेक्ट्रिक वाहन के क्षेत्र में नई कंपनी स्थापित करने का प्रलोभन देकर अपनी फर्म की देनदारियां चुकाने के लिए रुपये मांगे थे।
इस पर राकेश ने अलग-अलग बैंक खातों से 16.13 लाख रुपये दिए थे। इसके अलावा पारिवारिक मित्र के माध्यम से छह लाख रुपये का चेक भी दिया था। बाद में दोनों ने बेलोमो मोटो हब प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी स्थापित की, लेकिन लंबे समय तक कारोबार शुरू नहीं हुआ। रुपये वापस मांगने पर भुगतान से इन्कार कर दिया। अदालती आदेश के अनुसार, मामले की शुरुआती विवेचना में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी। शिकायतकर्ता ने इसका विरोध करते हुए प्रोटेस्ट पिटीशन प्रस्तुत की।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के 19 अक्तूबर 2024 के आदेश पर मामले में अग्रिम विवेचना के निर्देश दिए थे। अग्रिम विवेचना के दौरान विवादित चेकों और हस्ताक्षरों की जांच फॉरेंसिक साइंस लैब से कराई गई। आदेश में बिलों, लेजर और बैंक लेनदेन से संबंधित अभिलेखों में विसंगतियों का भी उल्लेख है। केस डायरी में आरोप लगाया गया कि कथित कूटरचित बिल और दस्तावेज तैयार करने में दीपिका गुप्ता की भूमिका थी। वह संबंधित कंपनी में निदेशक भी थीं।
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बचाव पक्ष ने बताया निर्दोष
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दीपिका गुप्ता को निर्दोष बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता से उनकी रंजिश है और उन्हें झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता और दीपिका दोनों कंपनी के निदेशक थे। शिकायतकर्ता की कथित अनियमितताओं को लेकर उनके खिलाफ भी प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। अभियोजन पक्ष ने आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें और केस डायरी में दर्ज तथ्यों पर विचार करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने दीपिका गुप्ता की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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= पति की जमानत भी हो चुकी है निरस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। सोलर पावर जनरेटिंग सिस्टम और इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार से जुड़े 22.13 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-एक ने आरोपी महिला दीपिका गुप्ता की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने केस डायरी में दर्ज तथ्यों और कथित कूटरचित बिलों व दस्तावेजों से जुड़े आरोपों को मामले में गंभीर माना है। इस प्रकरण में महिला के पति प्रवीण कुमार गुप्ता भी आरोपी हैं, जिनकी जमानत पहले ही निरस्त हो चुकी है।
अपर सत्र न्यायाधीश ने सोमवार को को जमानत प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता राकेश कुमार त्रिपाठी ने अपने घर और दुकान पर सोलर पावर जनरेटिंग सिस्टम लगवाने के लिए प्रवीण कुमार गुप्ता की फर्म यूकावा इंडस्ट्रीज से संपर्क किया था। इसी दौरान दोनों के बीच जान-पहचान हो गई थी। आरोप है कि प्रवीण ने इलेक्ट्रिक वाहन के क्षेत्र में नई कंपनी स्थापित करने का प्रलोभन देकर अपनी फर्म की देनदारियां चुकाने के लिए रुपये मांगे थे।
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इस पर राकेश ने अलग-अलग बैंक खातों से 16.13 लाख रुपये दिए थे। इसके अलावा पारिवारिक मित्र के माध्यम से छह लाख रुपये का चेक भी दिया था। बाद में दोनों ने बेलोमो मोटो हब प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी स्थापित की, लेकिन लंबे समय तक कारोबार शुरू नहीं हुआ। रुपये वापस मांगने पर भुगतान से इन्कार कर दिया। अदालती आदेश के अनुसार, मामले की शुरुआती विवेचना में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी। शिकायतकर्ता ने इसका विरोध करते हुए प्रोटेस्ट पिटीशन प्रस्तुत की।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के 19 अक्तूबर 2024 के आदेश पर मामले में अग्रिम विवेचना के निर्देश दिए थे। अग्रिम विवेचना के दौरान विवादित चेकों और हस्ताक्षरों की जांच फॉरेंसिक साइंस लैब से कराई गई। आदेश में बिलों, लेजर और बैंक लेनदेन से संबंधित अभिलेखों में विसंगतियों का भी उल्लेख है। केस डायरी में आरोप लगाया गया कि कथित कूटरचित बिल और दस्तावेज तैयार करने में दीपिका गुप्ता की भूमिका थी। वह संबंधित कंपनी में निदेशक भी थीं।
बचाव पक्ष ने बताया निर्दोष
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दीपिका गुप्ता को निर्दोष बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता से उनकी रंजिश है और उन्हें झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता और दीपिका दोनों कंपनी के निदेशक थे। शिकायतकर्ता की कथित अनियमितताओं को लेकर उनके खिलाफ भी प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। अभियोजन पक्ष ने आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें और केस डायरी में दर्ज तथ्यों पर विचार करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने दीपिका गुप्ता की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी।