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खेती तक पहुंची महंगाई की आग

Sun, 03 Apr 2022 11:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2022 11:51 PM IST
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The fire of inflation reached agriculture
खेत में गेहूं की फसल दिखाता किसान साधु यादव - फोटो : ETAWAH
चकरनगर (इटावा)। बढ़ती महंगाई की आग पर खेतीबाड़ी तक भी पहुंच गई है। डीजल के लगातार दाम बढ़ने से ट्रैक्टर संचालकों ने चकरनगर क्षेत्र में थ्रेसरिंग (मड़ाई) का भाव बढ़ा दिया है। पिछले वर्ष प्रति क्विंटल 10 किलो लिया जा रहा था, इस बार भाव 12 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। मजदूरों ने खेत की कटाई भी 10 किलो प्रति बीघा बढ़ा दी है।
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अधिक ठंड होने से पहले सरसों की फसल कमजोर हुई, फिर समय से पहले अधिक गर्मी पड़ने से गेहूं की फसल कमजोर पड़ गई। दोनों ही फसलों में दाना कमजोर हो गया है। इससे उपज में 20 से 30 प्रतिशत तक कम हो रही है। कम उपज से परेशान किसानों को डीजल बढ़े दामों ने और झटका दे दिया है। डीजल के दाम बढ़ने से ट्रैक्टर चालकों ने थ्रेसिंग का भाव बढ़ा दिया है। पिछले वर्ष प्रति क्विंटल 10 किलो गेहूं ट्रैक्टर संचालक लेते थे, अब भाव प्रति क्विंटल 12 किलो कर दिया है। खेत से गेहूं कटाई करने वाले मजदूरों ने भी प्रति बीघा कटाई 10 किलो बढ़ा दी है। पिछले वर्ष तक 50 किलो गेहूं प्रति बीघा ले रहे थे।
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किसानों ने बयां किया दर्द
किसान विजय सिंह यादव ने कहा कि इस वर्ष खेती में घाटा ही घाटा हो रहा है। मौसम अनुकूल न होेने से गेहूं की उपज बहुत कम हो रही है। एक बीघे में दो -तीन क्विंटल ही गेहूं निकल रहा है।
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किसान रंगलाल ने कहा कि महंगी खाद, बीज, जुताई, पानी की लागत के बाद अब कटाई और मड़ाई का भाव भी बढ़ गया है। डीजल के दाम लगातार बढ़ने से खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
किसान जयवीर सिंह ने कहा कि खेती के सहारे अब परिवार पालना मुश्किल होता जा रहा है। इस वर्ष सरसों के बाद गेहूं की फसल भी धोखा दे गई है। परिवार के भरण-पोषण लायक भी गेहूं की उपज नहीं होगी।

किसान सुरेश तिवारी ने कहा कि मौसम अनुकूल न मिलने के कारण गेहूं का दाना पतला होने से उपज का औसत गिर गया है। फसल में खर्चा भी निकलना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
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