फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   The filth in the distributaries was not washed away even by a downpour of crores.

Etawah News: करोड़ों की बारिश से भी नहीं बही रजबहों की गंदगी

Mon, 21 Sep 2026 11:18 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2026 11:18 PM IST
विज्ञापन
The filth in the distributaries was not washed away even by a downpour of crores.
इटावा। नहरों की सफाई पर हर साल लाखों-करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद इटावा प्रखंड निचली गंगा नहर और उससे जुड़े रजबहों में गंदगी जस की तस रहती है। पिछले साल नहरों और रजबहों की सफाई पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इस बार 1.43 करोड़ से सिल्ट सफाई कराने की तैयारी है। लोगों का कहना है कि अगर सही ढंग से काम हो तो हर बार सफाई की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
विज्ञापन

इटावा प्रखंड निचली गंगा नहर की ओर से 23 अलग-अलग कार्यों के लिए 1.43 करोड़ की रकम खर्च की जाएगी। विभाग के मुताबिक, संबंधित ठेकेदार को कार्यादेश मिलने के बाद 21 दिन में काम पूरा करना होगा। यानी तीन सप्ताह के भीतर कई किलोमीटर लंबे हिस्सों की सफाई कराने का लक्ष्य रखा गया है।
विज्ञापन

सफाई का काम इटावा प्रखंड की निचली गंगा नहर की पटरियों और रजबहों के विभिन्न हिस्सों में कराया जाना है। सफाई के दायरे में गांगसी, कुरसेंडा, रत्नपुर, बिलंदा, ककरेसी, उमरसेंडा, करहल, सैफई, बांसक और बाहरपुर जैसे रजबहों के हिस्से शामिल हैं। इन स्थानों पर जमा सिल्ट की सफाई के लिए अलग-अलग लागत निर्धारित की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

23 कार्यों में बिलंदा रजबहा के किमी शून्य से 30.144 तक की सफाई पर सबसे अधिक 13.01 लाख रुपये की अनुमानित लागत रखी गई है। कुरसेंडा रजबहा के किमी शून्य से 17.250 तक की सफाई पर आठ लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं, गांगसी रजब के किमी 16.800 से 30 तक की सफाई के लिए 9.80 लाख रुपये तय किए गए हैं। बाहरपुर रजबहे के किमी शून्य से 16.66 तक के काम के लिए 7.53 लाख की लागत निर्धारित की गई है।
सैफई क्षेत्र के ग्राम नायकपुर निवासी किसान प्रमोद कुमार ने बताया है कि माइनर की सफाई हर साल होती है लेकिन सिर्फ खानापूर्ति होती है। सड़क के किनारों पर साफ करके खानापूर्ति कर ली जाती है। सही ढंग से काम न होने के कारण हर बार सफाई की जरूरत पड़ती है।
भरथना क्षेत्र के ग्राम नगला आशाराम निवासी किसान अजब सिंह बताते हैं कि एक वर्ष से अधिक समय से कंधेसी रजबहे की सफाई नहीं हुई। पुलियों में घनी झाड़ उगने से पानी का बहाव प्रभावित हो रहा है। विभाग दावा करता है कि हर साल सफाई होती है लेकिन हकीकत इससे उलट है।
इटावा। नहरों की सिल्ट सफाई में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश सोमवार को डीएम ने दिए। रबी 1434 फसली वर्ष 2026-27 के लिए आयोजित बैठक में उन्होंने कार्ययोजना और अनुमोदन पर विस्तृत चर्चा की। डीएम ने कहा कि सिल्ट सफाई का कार्य केवल औपचारिकता न हो। स्थल पर रहकर कार्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। सफाई के दौरान नहर का निर्धारित लेवल खराब नहीं होना चाहिए। संबंधित अधिकारी मौके पर उपस्थित रहकर कार्य की निगरानी करें। इससे नहर की संरचना और जल प्रवाह प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने नहरों में पानी के प्रवाह का तकनीकी अध्ययन करने को भी कहा। टेल तक पर्याप्त पानी पहुंच सके, यह सुनिश्चित किया जाए।

डीएम ने कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता न करने के निर्देश दिए। मानकों के अनुरूप कार्य सुनिश्चित होने के बाद ही सत्यापन किया जाए। सिल्ट सफाई में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों का विशेष ध्यान रखा जाए। उचित प्रक्रिया से ही एजेंसी या ठेकेदार का चयन हो। जिन संस्थाओं का कार्य पहले संतोषजनक नहीं रहा, उन्हें टेंडर न दिया जाए। नहरों से निकलने वाली मिट्टी का आकलन कर नियमानुसार नीलामी की कार्रवाई हो। जनपद में कुल 109 नहरें हैं, जिनकी लंबाई 704.529 किलोमीटर है। इनमें इटावा, भोगनीपुर और औरैया-दिबियापुर प्रखंड की नहरें शामिल हैं। बैठक में आईएएस कोमल पुनिया सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed