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खांसी की आवाज से होगी टीबी की पहचान
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इटावा। अब खांसने की आवाज से ही क्षय रोग की पहचान की जा सकेगी। इसके लिए सेंट्रल टीबी डिविजन ने पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके लिए फील्डी एप बनाया गया है। जिसमें टीबी के संभावित मरीजों के खांसने की आवाज के नमूने रिकार्ड किए जा रहे हैं। जिले से 50 नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. शिवचरण ने बताया कि जिले में 11 टीमों ने फील्डी एप की सहायता से घर-घर जाकर नमूने एकत्रित किए हैं। टीबी के बिना लक्षण वाले, लक्षण वाले तथा उनके संपर्क में आने वाले व रिश्तेदारों के नमूने लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक टीबी की जांच बलगम से होती है। सेंट्रल टीबी डिविजन ने खांसी के तरीके से संभावित मरीज की पहचान पर शोध शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट में देश के अलग-अलग जिलों से 50 आवाजों के नमूने लिए जा रहे हैं।
जिला कार्यक्रम समन्वयक कंचन तिवारी ने बताया कि जिले से सभी 50 नमूने सेंट्रल टीबी डिविजन भेज दिए गए हैं। इनमें सीएचसी भरथना से चार, इटावा शहर से 14, जसवंतनगर से छह, सैफई से तीन, महेवा से पांच, राजपुर से चार, ताखा से तीन, सरसई नावर से तीन, उदी से तीन, बसरेहर से पांच नमूने मिले हैं।
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कंचन तिवारी ने बताया प्रोजेक्ट का मकसद मोबाइल एप (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के जरिये महज खांसी की आवाज से संभावित मरीज की पहचान करना है। कई बार लोग लंबे समय तक खांसी आने के बावजूद डर व संकोच के चलते जांच नहीं कराते हैं, वह खुद ही मोबाइल में एप इंस्टाल कर अपनी जांच कर सकेंगे।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. शिवचरण ने बताया कि जिले में 11 टीमों ने फील्डी एप की सहायता से घर-घर जाकर नमूने एकत्रित किए हैं। टीबी के बिना लक्षण वाले, लक्षण वाले तथा उनके संपर्क में आने वाले व रिश्तेदारों के नमूने लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक टीबी की जांच बलगम से होती है। सेंट्रल टीबी डिविजन ने खांसी के तरीके से संभावित मरीज की पहचान पर शोध शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट में देश के अलग-अलग जिलों से 50 आवाजों के नमूने लिए जा रहे हैं।
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जिला कार्यक्रम समन्वयक कंचन तिवारी ने बताया कि जिले से सभी 50 नमूने सेंट्रल टीबी डिविजन भेज दिए गए हैं। इनमें सीएचसी भरथना से चार, इटावा शहर से 14, जसवंतनगर से छह, सैफई से तीन, महेवा से पांच, राजपुर से चार, ताखा से तीन, सरसई नावर से तीन, उदी से तीन, बसरेहर से पांच नमूने मिले हैं।
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कंचन तिवारी ने बताया प्रोजेक्ट का मकसद मोबाइल एप (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के जरिये महज खांसी की आवाज से संभावित मरीज की पहचान करना है। कई बार लोग लंबे समय तक खांसी आने के बावजूद डर व संकोच के चलते जांच नहीं कराते हैं, वह खुद ही मोबाइल में एप इंस्टाल कर अपनी जांच कर सकेंगे।