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दम तोड़ रही एसएमएस हाजिरी योजना
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Sat, 14 May 2016 12:10 AM IST
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बीएसए कार्यालय पर एसएमएस हाजिरी के लिए बने कंट्रोल रूम में कार्यकरते कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
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परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शासन द्वारा जिले में शुरू की गई पायलट एसएमएस हाजिरी योजना का विभागीय ढिलाई से दम घुटने लगा है। स्थिति यह है कि दिन प्रतिदिन एसएमएस से हाजिरी लगाने वाले शिक्षकों की संख्या बढ़ने की बजाय घटती जा रही है। विभागीय अधिकारी चुप्पी साधकर बैठे हैं। शुरूआती दिनों में योजना को कड़ाई से लागू करने का दम भरने वाले बीएसए के तेवर भी पूरी तरह से ठंडे हो चुके हैं और वह अब इस पर ज्यादा कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
शासन ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की शत प्रतिशत उपस्थिति के लिए प्रदेश में एसएमएस हाजिरी व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। इस व्यवस्था से विभाग को तुरंत यह जानकारी हो जाएगी कि शिक्षक ने कहां से एसएमएस किया है, वह स्कू ल में है या नहीं। इसके लिए पायलट योजना के रूप में प्रदेश के कुछ जनपदों में इस नई योजना को लागू कर दिया गया है, जिसमे इटावा भी शामिल है।
जनपद में 26 अप्रैल से एसएमएस हाजिरी व्यवस्था को परिषदीय विद्यालयों में लागू किया गया, लेकिन पहले ही दिन से शिक्षकों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया और मात्र 450 विद्यालयों से ही हाजिरी लगाई गई, इसमें से आधे से ज्यादा विद्यालयों से गलत एसएमएस भेजा गया।
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इसके बाद विभाग ने जब नकेल कसी तो हाजिरी लगाने वाले विद्यालयों की संख्या 550 तक पहुंच गई, लेकिन इसी बीच प्राथमिक शिक्षक संघ ने इसका विरोध शुरू कर दिया और शिक्षकों से एसएमएस से हाजिरी न लगाने का आह्वान करते हुए इस नई व्यवस्था का पूर्ण विरोध करने की घोषणा कर दी। इसके बाद कई दिनों तक शिक्षक नेताओं व बीएसए के बीच तलवारें खिंच गई और दोनों ही ओर से चेतावनी जारी की जाने लगीं।
जहां बीएसए जेपी राजपूत वेतन रोकने और हाजिरी न लगाने पर निलंबन की कार्रवाई किए जाने की घुड़की दी। वहीं शिक्षक नेताओं ने इसके जवाब में चोक डाउन हड़ताल करने की चेतावनी दे डाली। इसके बाद बीएसए के तेवर पूरी तरह से ठंडे पड़ गए और वह पूरी तरह से बैक फुट पर जाकर शांत हो गए। विभाग के ढीले पड़ते ही शिक्षकों को मौका मिल गया और जो हाजिरी लगा रहे थे, उन्होंने भी हाजिरी लगाना बंद कर दिया। इसका नतीजा है कि आज न के बराबर शिक्षक हाजिरी लगा रहे हैं और जिले में पायलट योजना दम तोड़ने लगी है।
औपचारिकता पूरी कर रहा कंट्रोल, हाजिरी लगाने वालों पर ही चलाया जा रहा डंडा- इटावा। एसएमएस हाजरी व्यवस्था पर निगरानी व नियंत्रण के लिए बीएसए कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है।
यह कंट्रोल रूम भी यहां सिर्फ औपचारिकता पूरी कर रहा है, जो शिक्षक हाजिरी नहीं लगा रहे हैं, वह तो सुकून से हैं और जो अपने नेताओं की बात की अवहेलना करते हुए अपने दायित्वों क ो निभाकर हाजिरी लगा रहे हैं, विभाग उन पर ही शिकंजा कसकर कड़ाई का दिखावा कर रहा है। कंट्रोल रूम हाजरी लगाने वालों की मानीटरिंग कर उन पर कार्रवाई करने में जुटा है। यही कारण है कि धीरे धीरे हाजिरी लगाने वाले विद्यालयों की संख्या घटकर शून्य की और बढ़ रही है।
करते हैं, करते हैं, रू को कुछ करते हैं: बीएसए- इटावा। कुछ समय पहले तक जहां बीएसए जेपी राजपूत हाजिरी न लगाने वाले शिक्षकों के विरुद्ध वेतन काटने व निलंबन की कार्रवाई करने का दम भर रहे थे। वहीं अब उनके हाव भाव भी पूरी तरह से बदल गए हैं। शुक्रवार को जब उनसे कॉल पर प्लाप होती इस योजना के संबंध में बात की गई तो वह इस पर किसी भी प्रकार का जवाब देने से कतराते रहे और सिर्फ एक ही बात की रट लगाए रहे कि करते हैं, करते हैं, रूको कुछ करते हैं। यह कहते हुए उन्होंने फोन काट दिया।
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शासन ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की शत प्रतिशत उपस्थिति के लिए प्रदेश में एसएमएस हाजिरी व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। इस व्यवस्था से विभाग को तुरंत यह जानकारी हो जाएगी कि शिक्षक ने कहां से एसएमएस किया है, वह स्कू ल में है या नहीं। इसके लिए पायलट योजना के रूप में प्रदेश के कुछ जनपदों में इस नई योजना को लागू कर दिया गया है, जिसमे इटावा भी शामिल है।
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जनपद में 26 अप्रैल से एसएमएस हाजिरी व्यवस्था को परिषदीय विद्यालयों में लागू किया गया, लेकिन पहले ही दिन से शिक्षकों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया और मात्र 450 विद्यालयों से ही हाजिरी लगाई गई, इसमें से आधे से ज्यादा विद्यालयों से गलत एसएमएस भेजा गया।
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इसके बाद विभाग ने जब नकेल कसी तो हाजिरी लगाने वाले विद्यालयों की संख्या 550 तक पहुंच गई, लेकिन इसी बीच प्राथमिक शिक्षक संघ ने इसका विरोध शुरू कर दिया और शिक्षकों से एसएमएस से हाजिरी न लगाने का आह्वान करते हुए इस नई व्यवस्था का पूर्ण विरोध करने की घोषणा कर दी। इसके बाद कई दिनों तक शिक्षक नेताओं व बीएसए के बीच तलवारें खिंच गई और दोनों ही ओर से चेतावनी जारी की जाने लगीं।
जहां बीएसए जेपी राजपूत वेतन रोकने और हाजिरी न लगाने पर निलंबन की कार्रवाई किए जाने की घुड़की दी। वहीं शिक्षक नेताओं ने इसके जवाब में चोक डाउन हड़ताल करने की चेतावनी दे डाली। इसके बाद बीएसए के तेवर पूरी तरह से ठंडे पड़ गए और वह पूरी तरह से बैक फुट पर जाकर शांत हो गए। विभाग के ढीले पड़ते ही शिक्षकों को मौका मिल गया और जो हाजिरी लगा रहे थे, उन्होंने भी हाजिरी लगाना बंद कर दिया। इसका नतीजा है कि आज न के बराबर शिक्षक हाजिरी लगा रहे हैं और जिले में पायलट योजना दम तोड़ने लगी है।
औपचारिकता पूरी कर रहा कंट्रोल, हाजिरी लगाने वालों पर ही चलाया जा रहा डंडा- इटावा। एसएमएस हाजरी व्यवस्था पर निगरानी व नियंत्रण के लिए बीएसए कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है।
यह कंट्रोल रूम भी यहां सिर्फ औपचारिकता पूरी कर रहा है, जो शिक्षक हाजिरी नहीं लगा रहे हैं, वह तो सुकून से हैं और जो अपने नेताओं की बात की अवहेलना करते हुए अपने दायित्वों क ो निभाकर हाजिरी लगा रहे हैं, विभाग उन पर ही शिकंजा कसकर कड़ाई का दिखावा कर रहा है। कंट्रोल रूम हाजरी लगाने वालों की मानीटरिंग कर उन पर कार्रवाई करने में जुटा है। यही कारण है कि धीरे धीरे हाजिरी लगाने वाले विद्यालयों की संख्या घटकर शून्य की और बढ़ रही है।
करते हैं, करते हैं, रू को कुछ करते हैं: बीएसए- इटावा। कुछ समय पहले तक जहां बीएसए जेपी राजपूत हाजिरी न लगाने वाले शिक्षकों के विरुद्ध वेतन काटने व निलंबन की कार्रवाई करने का दम भर रहे थे। वहीं अब उनके हाव भाव भी पूरी तरह से बदल गए हैं। शुक्रवार को जब उनसे कॉल पर प्लाप होती इस योजना के संबंध में बात की गई तो वह इस पर किसी भी प्रकार का जवाब देने से कतराते रहे और सिर्फ एक ही बात की रट लगाए रहे कि करते हैं, करते हैं, रूको कुछ करते हैं। यह कहते हुए उन्होंने फोन काट दिया।