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सर्जन ऑपरेशन करें कि ओपीडी में बैठें
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Sun, 03 Apr 2016 11:57 PM IST
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जिला अस्पताल में डॉक्टर के कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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इटावा। मौसम में आए बदलाव के साथ जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी है। ऐसे में फिजीशियन न होने से मरीजों को सर्जन डॉक्टर देख रहे हैं। वहीं सर्जन डॉक्टर के सामने समस्या है कि वे गंभीर बीमारी के मरीजों का ऑपरेशन करें कि ओपीडी में मरीज देखें।
जिला अस्पताल में पिछले एक हफ्ते से मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्थिति यह है कि जहां एक दिन में 100 से 150 मरीज अस्पताल आ रहे थे। वहीं अब इनकी संख्या 200 से ऊपर पहुंच गई है।
अस्पताल में एक भी फिजीशियन डॉक्टर न होने से मरीज सर्जन डॉक्टरों की दया के पात्र बने हैं। इन मरीजों को कोई एक डॉक्टर नहीं देख रहा बल्कि जो सर्जन डॉक्टर जिस समय खाली होता है वह ओपीडी में बैठता है।
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कई बार तो डॉक्टर बीच में ही किसी न किसी बहाने से उठकर चले जाते हैं जिससे कतार में खड़े मरीजों दिखा नहीं पाते हैं। अस्पताल में कोई फिजीशियन न होने के कारण यहां तैनात सर्जन डॉ. पियूष तिवारी व मंगल सिंह समय मिलते ही ओपीडी में बैठते हैं।
अगर इनमें से कोई उपलब्ध नहीं है तो किसी अन्य सर्जन को इस कार्य में लगा दिया जाता है। सर्जन डॉक्टर को रोजाना गंभीर बीमारी के मरीजों का ऑपरेशन भी करना होता है। ऐसे में ओपीडी में सभी मरीजों को देख पाना संभव नहीं होता।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर किसी न किसी बहाने मरीजों की भीड़ के बीच से उठकर यह कहकर चले जाते हैं कि अभी आ रहे हैं लेकिन वह वापस न आकर ऑपरेशन करने चले जाते हैं। मुख्य चिकित्साधीक्षक जिला अस्पताल डॉ. एके पालीवाल ने बताया कि फिजीशियन के लिए कई बार शासन को लिख चुके हैं लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारम इस समस्या का निस्तारण अभी तक नहीं हो सका है। वह कोशिश में लगे हैं कि जल्द शासन से जिला अस्पताल में फिजीशियन की तैनाती हो।
लंबे समय के बाद फरवरी में जिला अस्पताल में फिजीशियन डॉ. नित्यानन्द शर्मा की तैनाती हुई थी। उन्होंने ज्वाइनिंग के बाद दो दिन तक लगभग डेढ़ सौ मरीजों की ओपीडी की लेकिन तीसरे ही दिन वह छुट्टी लेकर चले गए और फिर वापल नहीं आए। हाल ही में उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए डीएनडी में एडमीशन लेने व जिला अस्पताल का कार्यभार छोड़ने के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेज दिया।
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जिला अस्पताल में पिछले एक हफ्ते से मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्थिति यह है कि जहां एक दिन में 100 से 150 मरीज अस्पताल आ रहे थे। वहीं अब इनकी संख्या 200 से ऊपर पहुंच गई है।
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अस्पताल में एक भी फिजीशियन डॉक्टर न होने से मरीज सर्जन डॉक्टरों की दया के पात्र बने हैं। इन मरीजों को कोई एक डॉक्टर नहीं देख रहा बल्कि जो सर्जन डॉक्टर जिस समय खाली होता है वह ओपीडी में बैठता है।
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कई बार तो डॉक्टर बीच में ही किसी न किसी बहाने से उठकर चले जाते हैं जिससे कतार में खड़े मरीजों दिखा नहीं पाते हैं। अस्पताल में कोई फिजीशियन न होने के कारण यहां तैनात सर्जन डॉ. पियूष तिवारी व मंगल सिंह समय मिलते ही ओपीडी में बैठते हैं।
अगर इनमें से कोई उपलब्ध नहीं है तो किसी अन्य सर्जन को इस कार्य में लगा दिया जाता है। सर्जन डॉक्टर को रोजाना गंभीर बीमारी के मरीजों का ऑपरेशन भी करना होता है। ऐसे में ओपीडी में सभी मरीजों को देख पाना संभव नहीं होता।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर किसी न किसी बहाने मरीजों की भीड़ के बीच से उठकर यह कहकर चले जाते हैं कि अभी आ रहे हैं लेकिन वह वापस न आकर ऑपरेशन करने चले जाते हैं। मुख्य चिकित्साधीक्षक जिला अस्पताल डॉ. एके पालीवाल ने बताया कि फिजीशियन के लिए कई बार शासन को लिख चुके हैं लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारम इस समस्या का निस्तारण अभी तक नहीं हो सका है। वह कोशिश में लगे हैं कि जल्द शासन से जिला अस्पताल में फिजीशियन की तैनाती हो।
लंबे समय के बाद फरवरी में जिला अस्पताल में फिजीशियन डॉ. नित्यानन्द शर्मा की तैनाती हुई थी। उन्होंने ज्वाइनिंग के बाद दो दिन तक लगभग डेढ़ सौ मरीजों की ओपीडी की लेकिन तीसरे ही दिन वह छुट्टी लेकर चले गए और फिर वापल नहीं आए। हाल ही में उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए डीएनडी में एडमीशन लेने व जिला अस्पताल का कार्यभार छोड़ने के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेज दिया।