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सैलानियों को लुभा रहा नदी का किनारा
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चकरनगर। चंबल के बीहड़ों में अब सैलानियों का बसेरा हो रहा है। नदियों के किनारे रात में तंबुओं में सैलानी ठहरने लगे हैं। पांच नदियों के संगम स्थल पर चांदी की तरह चमकते रेतीले कण, मनोरम शांत किनारा, लुभाने वाली प्रवासी पक्षियों के कलरव, एकांत टापू सैलानियों के लिए बेहतरीन पिकनिक स्थल बन रहे हैं।
दिल्ली और मध्यप्रदेश के शहरों से दो दिवसीय पंचनद रॉक नाइट फेस्टिवल में सैलानी शामिल हो रहे हैं।
चंबल टूरिज्म के बैनर तले आयोजित इस उत्सव में पर्यटक रात-दिन कैंपिंग, कैंप फायर, हाइकिंग, बोटिंग, सैंड स्पोर्ट्स आदि के साथ खाने-पीने के साथ बीच नाइट स्टे का खूब लुत्फ़ उठा रहे हैं।
सिंध, पहुज, क्वारी, चंबल और यमुना पांच नदियों के संगम स्थल पर्यटकों के लिए हब बनने संभावना को पंख लग सकते हैं। चंबल पर्यटन के सलाहकार शाह आलम ने बताया कि पंचनद घाटी में डाकुओं के खात्मे के बाद अब सैलानी उमड़ने लगे हैं।
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पंचनद फेस्टिवल में लोककला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोग जमकर थिर रहे हैं। इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन भी हो रहा है। धीरे-धीरे अब चंबल बदल रहा है। यहां डाकुओं के डेरे नहीं, अब सैलानियों के बसेरे देखने को मिल रहे हैं।
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दिल्ली और मध्यप्रदेश के शहरों से दो दिवसीय पंचनद रॉक नाइट फेस्टिवल में सैलानी शामिल हो रहे हैं।
चंबल टूरिज्म के बैनर तले आयोजित इस उत्सव में पर्यटक रात-दिन कैंपिंग, कैंप फायर, हाइकिंग, बोटिंग, सैंड स्पोर्ट्स आदि के साथ खाने-पीने के साथ बीच नाइट स्टे का खूब लुत्फ़ उठा रहे हैं।
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सिंध, पहुज, क्वारी, चंबल और यमुना पांच नदियों के संगम स्थल पर्यटकों के लिए हब बनने संभावना को पंख लग सकते हैं। चंबल पर्यटन के सलाहकार शाह आलम ने बताया कि पंचनद घाटी में डाकुओं के खात्मे के बाद अब सैलानी उमड़ने लगे हैं।
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पंचनद फेस्टिवल में लोककला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोग जमकर थिर रहे हैं। इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन भी हो रहा है। धीरे-धीरे अब चंबल बदल रहा है। यहां डाकुओं के डेरे नहीं, अब सैलानियों के बसेरे देखने को मिल रहे हैं।