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तेजी से सूख रही धरती की कोख
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Mon, 01 Jun 2015 11:02 PM IST
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जिले में धरती की कोख तेजी से सूख रही है। प्लेन क्षेत्र में करीब तीन मीटर और बीहड़ी क्षेत्र में लगभग पांच मीटर तक जल स्तर गिर चुका है। नतीजतन सैकड़ों हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत ज्यादा हो गई है। शहरी क्षेत्र में सबमर्सिबल पंपों ने काफी हद तक समस्या को संभाले रखा है।
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जिले में यूं तो मानक से अधिक हैंडपंप लगे हैं। जलनिगम का यही दावा है। तकरीबन 26 हजार हैंडपंप स्थापित हैं। फिर भी पानी के लिए हायतौबा मच रही है। दरअसल जमीन में पानी की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। पहले जहां 90 से 100 फीट की गहराई में पानी मिल जाता था, आज करीब सौ-सवा सौ फीट पर पानी मिल रहा है।
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ऐसे में हैंडपंप पानी छोड़ रहे हैं। जिले भर में करीब दो हजार हैंडपंप खराब माने जा रहे हैं। जल निगम के मुताबिक जिले में भले ही अभी डार्क या ग्रे एरिया जैसी खतरनाक स्थिति नहीं है लेकिन जल स्तर में गिरावट तेजी से हो रही है। शहर में ही करीब एक हजार हैंडपंप लगे हैं। उनमें करीब दो सौ के आसपास खराब पड़े हैं। इन्हें रिबोर करने की नौबत आ गई है।
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भूगर्भ जल स्तर में गिरावट गर्मी के कारण और तेजी से बढ़ती है। लेकिन जल स्तर गिरने का मात्र यही एक कारण नहीं है। शहर में करीब 450 सबमर्सिबल पंप लगे हैं। बेशक इनसे लोगों को काफी राहत मिल रही है लेकिन पानी का अत्यधिक दोहन भी इन्हीं से हो रहा है।
दूसरी ओर जल स्तर बढ़ाने के साधन नहीं अपनाए जा रहे हैं। तमाम गलियां कंक्रीट से बनी है। इससे सारा बरसाती पानी नालों के रास्ते बह जाता है। बरसाती पानी भी रि-स्टोर नहीं किया जा रहा। लिहाजा जमीन के अंदर पानी नहीं पहुंच रहा और दोहन लगातार हो रहा है।
चकरनगर के पारपट्टी क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। यहां हैंडपंपों से पानी की जगह गर्म हवा ही निकल रही है। वह भी तब, जब इस क्षेत्र में पांच-पांच नदियां हैं। लोगों के लिए पीने और सिंचाई के पानी की समस्या आम है। गर्मी के चलते क्वारी नदी पूरी तरह सूख चुकी है।
इससे पशुओं के लिए भी पानी मुहैया नहीं हो पा रहा। यमुना नदी का जल बेहद प्रदूषित है और यह कतई पीने योग्य नहीं है। चंबल नदी में घड़ियाल और मगरमच्छों का राज है। लिहाजा लोग इस नदी से दूर ही रहते हैं। सिंध और पहुज नदियां क्षेत्र के कुछ हिस्से से होकर गुजरती है। इससे इनका लाभ सीमित लोगों को ही मिल पाता है। इस अति पिछड़े क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्रशासन को क्षेत्र में पेयजल समस्या का स्थाई हल खोजना चाहिए।