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कमीशन ने रामलीला मैदान व मंच की नापजोख की
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लवेदी। श्रीरामलीला समिति लखना के मंच पर लखना राज द्वारा बनवाई गई बाउंड्री को लेकर सिविल कोर्ट में चल रहे मामले में बुधवार को कोर्ट का कमीशन जांच के लिए मैदान पहुंचा। कमीशन के अधिकारियों ने मैदान व मंच की नापजोख की। अब वह अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करेगा।
कोर्ट से कमीशन में अमीन अभय प्रताप सिंह व अधिवक्ता रामकुमार तिवारी ने मौके पर पहुंचकर रामलीला कमेटी के पदाधिकारी संतोष सिंह चौहान, संजीव त्रिपाठी, सुनीत सिंह चौहान, संजय त्रिपाठी गगन, पूर्व चेयरमैन सतीश वर्मा, सुरेंद्र कुशवाहा समेत अन्य लोगों से बातचीत की। इसके बाद रामलीला मैदान समेत पूरे मैदान व मंच की नापजोख की।
बता दें नगर पंचायत द्वारा बोर्ड बैठक में रामलीला मैदान को इंटरलाकिंग से पक्का बनाने व मंच पक्का करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। ठेकेदार ने निर्माण कार्य काम प्रारंभ किया, तो मंच को लखना राज ने बाउंड्री बनवाकर अपने कब्जे में ले लिया गया था। इस पर रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने डीएम व एसडीएम भरथना समेत कई अधिकारियों से लिखित शिकायत की थी। साथ ही धरना-प्रदर्शन भी किया था। पुलिस ने शांतिभंग का हवाला देकर धरना खत्म करा दिया था। जबकि, नगर पंचायत के अभिलेखों में यह मैदान रामलीला मैदान के नाम पर दर्ज है। स्थानीय प्रशासनिक अफसरों के मामले में कार्रवाई न करने पर रामलीला कमेटी ने सिविल कोर्ट में रामलीला मंच को कब्जे से मुक्त कराने के लिए मुकदमा दायर किया।
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कोर्ट से कमीशन में अमीन अभय प्रताप सिंह व अधिवक्ता रामकुमार तिवारी ने मौके पर पहुंचकर रामलीला कमेटी के पदाधिकारी संतोष सिंह चौहान, संजीव त्रिपाठी, सुनीत सिंह चौहान, संजय त्रिपाठी गगन, पूर्व चेयरमैन सतीश वर्मा, सुरेंद्र कुशवाहा समेत अन्य लोगों से बातचीत की। इसके बाद रामलीला मैदान समेत पूरे मैदान व मंच की नापजोख की।
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बता दें नगर पंचायत द्वारा बोर्ड बैठक में रामलीला मैदान को इंटरलाकिंग से पक्का बनाने व मंच पक्का करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। ठेकेदार ने निर्माण कार्य काम प्रारंभ किया, तो मंच को लखना राज ने बाउंड्री बनवाकर अपने कब्जे में ले लिया गया था। इस पर रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने डीएम व एसडीएम भरथना समेत कई अधिकारियों से लिखित शिकायत की थी। साथ ही धरना-प्रदर्शन भी किया था। पुलिस ने शांतिभंग का हवाला देकर धरना खत्म करा दिया था। जबकि, नगर पंचायत के अभिलेखों में यह मैदान रामलीला मैदान के नाम पर दर्ज है। स्थानीय प्रशासनिक अफसरों के मामले में कार्रवाई न करने पर रामलीला कमेटी ने सिविल कोर्ट में रामलीला मंच को कब्जे से मुक्त कराने के लिए मुकदमा दायर किया।
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