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184 करोड़ की लागत से चंबल नदी पर प्रस्तावित है फोरलेन पुल का निर्माण
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इटावा। मध्यप्रदेश की सीमा को जोड़ने वाली चंबल नदी पर प्रस्तावित 184 करोड़ की लागत का फोरलेन पुल जलीव जीवों की सुरक्षा के मद्देनजर अटका हुआ है। निर्माण के लिए कर्ज देने वाले विश्व बैंक ने शर्त रखी है कि पुल के पिलर से टकराकर घड़ियाल, मगरमच्छ या डॉल्फिन जैसे जलीव जीव चोटिल न होने पाए। इधर, नेशनल हाईवे के अफसरों का कहना है कि अब सॉफ्ट कोटिंग वाले पिलर बनाने की तकनीकी खोज ली गई है, जिससे जलीय जीवों को नुकसान नहीं होगा।
इनसेट
एक साल से अटका है प्रस्ताव
चंबल नदी पर नये पुल के निर्माण का प्रस्ताव एक साल से विश्व बैंक कार्यालय में लटका है। चंबल नदी का यह क्षेत्र सेंचुरी क्षेत्र घोषित है। केंद्र सरकार के वन्य जीव मंत्रालय ने चंबल नदी को वन्य जीवों का अभयारण्य के लिए आरक्षित किया है। इस क्षेत्र में कोई भी काम बगैर सेंचुरी विभाग की स्वीकृति के नहीं हो सकता। विश्व बैंक ने भी पुल के निर्माण में यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी वन्य जीव को नुकसान नहीं पहुुंचना चाहिए। लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय मार्ग खंड के अधिकारी वन्य जीवों को सुरक्षित रखते हुए पुल का निर्माण कराने की तकनीकी का इस्तेमाल करने पर सहमति जता चुके हैं। पुराना पुल लगातार कमजोर होता जा रहा है। ऐसे में नये पुल के निर्माण की प्रक्रिया में लंबा वक्त लगा तो मुश्किल हो जाएगी।
पुराने पुल को बने पांच दशक बीते, दिनभर रहता जाम
भिंड-इटावा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 92 में यूपी और एमपी के बीच चंबल नदी पड़ती है। चंबल नदी पर वर्ष 1972 में पुल बनाया गया। दोनों राज्यों के बीच आवागमन सुगम हो गया। लगभग पांच दशक बीतने वाले हैं। यह सिंगल लेन पुराना कमजोर हो रहा है। सिंगल लेन होने के कारण उदी मोड़ से चंबल पुल पर दिन दिन भर जाम लगा रहता है।
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फोरलेन बनेगा नया पुल
चंबल नदी पर नये पुल के निर्माण का प्रस्ताव एक साल पहले विश्व बैंक को भेजा गया है। पुराने समानांतर नया पुल फोरलेन का होगा। वाहनों का जाम नहीं लग सकेगा। विश्व बैंक को इसकी डीपीआर भेजी गई है। इस पुल की लंबाई 594 मीटर होगी। चौड़ाई 15 मीटर रहेगी। इनसेट
चंबल में कार्य कराने को सेंचुरी विभाग की अनुमति जरूरी
राजस्थान के धौलपुर, मध्यप्रदेश के मुरैना, भिंड होकर इटावा और औरैया से गुजरी चंबल नदी में घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन, कछुआ जैसे विशेष प्रजाति के वन्य जीव बहुतायत में पाए जाते हैं। इन वन्य जीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र को सेंचुरी क्षेत्र घोषित कर रखा है। इस क्षेत्र में कोई भी निर्माण कार्य बगैर स्वीकृत के नहीं हो सकता। यही कारण है कि नए पुल के निर्माण के लिए केंद्र सरकार के वन्य जीव मंत्रालय की एनओसी चाहिए। एनओसी दिलाने के लिए यूपी और एमपी के अधिकारी पुल का कई बार दौरा भी कर चुके हैं। विश्व बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि पुल के पिलर बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि किसी भी मगरमच्छ, घडिय़ाल या डाल्फिन को चोट नहीं पहुंचनी चाहिए।
प्रस्ताव अभी भी है लंबित
राष्ट्रीय मार्ग खंड के अधिशासी अभियंता चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि चंबल नदी पर फोरलेन के निर्माण की डीपीआर विश्व बैंक को भेजी जा चुकी है। वन्य जीव विभाग से भी एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। विश्व बैंक के दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा।
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इनसेट
एक साल से अटका है प्रस्ताव
चंबल नदी पर नये पुल के निर्माण का प्रस्ताव एक साल से विश्व बैंक कार्यालय में लटका है। चंबल नदी का यह क्षेत्र सेंचुरी क्षेत्र घोषित है। केंद्र सरकार के वन्य जीव मंत्रालय ने चंबल नदी को वन्य जीवों का अभयारण्य के लिए आरक्षित किया है। इस क्षेत्र में कोई भी काम बगैर सेंचुरी विभाग की स्वीकृति के नहीं हो सकता। विश्व बैंक ने भी पुल के निर्माण में यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी वन्य जीव को नुकसान नहीं पहुुंचना चाहिए। लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय मार्ग खंड के अधिकारी वन्य जीवों को सुरक्षित रखते हुए पुल का निर्माण कराने की तकनीकी का इस्तेमाल करने पर सहमति जता चुके हैं। पुराना पुल लगातार कमजोर होता जा रहा है। ऐसे में नये पुल के निर्माण की प्रक्रिया में लंबा वक्त लगा तो मुश्किल हो जाएगी।
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पुराने पुल को बने पांच दशक बीते, दिनभर रहता जाम
भिंड-इटावा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 92 में यूपी और एमपी के बीच चंबल नदी पड़ती है। चंबल नदी पर वर्ष 1972 में पुल बनाया गया। दोनों राज्यों के बीच आवागमन सुगम हो गया। लगभग पांच दशक बीतने वाले हैं। यह सिंगल लेन पुराना कमजोर हो रहा है। सिंगल लेन होने के कारण उदी मोड़ से चंबल पुल पर दिन दिन भर जाम लगा रहता है।
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फोरलेन बनेगा नया पुल
चंबल नदी पर नये पुल के निर्माण का प्रस्ताव एक साल पहले विश्व बैंक को भेजा गया है। पुराने समानांतर नया पुल फोरलेन का होगा। वाहनों का जाम नहीं लग सकेगा। विश्व बैंक को इसकी डीपीआर भेजी गई है। इस पुल की लंबाई 594 मीटर होगी। चौड़ाई 15 मीटर रहेगी। इनसेट
चंबल में कार्य कराने को सेंचुरी विभाग की अनुमति जरूरी
राजस्थान के धौलपुर, मध्यप्रदेश के मुरैना, भिंड होकर इटावा और औरैया से गुजरी चंबल नदी में घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन, कछुआ जैसे विशेष प्रजाति के वन्य जीव बहुतायत में पाए जाते हैं। इन वन्य जीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र को सेंचुरी क्षेत्र घोषित कर रखा है। इस क्षेत्र में कोई भी निर्माण कार्य बगैर स्वीकृत के नहीं हो सकता। यही कारण है कि नए पुल के निर्माण के लिए केंद्र सरकार के वन्य जीव मंत्रालय की एनओसी चाहिए। एनओसी दिलाने के लिए यूपी और एमपी के अधिकारी पुल का कई बार दौरा भी कर चुके हैं। विश्व बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि पुल के पिलर बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि किसी भी मगरमच्छ, घडिय़ाल या डाल्फिन को चोट नहीं पहुंचनी चाहिए।
प्रस्ताव अभी भी है लंबित
राष्ट्रीय मार्ग खंड के अधिशासी अभियंता चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि चंबल नदी पर फोरलेन के निर्माण की डीपीआर विश्व बैंक को भेजी जा चुकी है। वन्य जीव विभाग से भी एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। विश्व बैंक के दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा।